रायपुर । मिल तो रामचरित मानस भी गया, खोए तो कागभूसुंडी भी नहीं थे, पर सारा कामकाज छोड़ कर हर बात की सफाई देते रहना ही आपका या हमारा काम नहीं है। समस्या ये कथित खोना-मिलना, चोरी-साधुता आदि है ही नहीं।
समस्या तो यह है कि कालनेमियों और मारीचों को आप पहचान नहीं रहे। समस्या केवल यह है कि आप आज भी सदियों पुराना लिजलिजापन-पिलपिलापन छोड़ नहीं पाये हैं जिसे अखिलेश यादव जैसा …. भी हांक लेता है।
अगर राहुल गांधी जैसा …. व्यक्ति भी हिंदुओं का रहनुमा बनने का पाखंड करने लगे, तो इतने से ही आपको समझ जाना चाहिए कि रामजी सही होंगे और रायजी भी। राहुल कभी भी उस विषय पर बात कर ही नहीं सकते, जो देश या सनातन के हित में हो। यह उनकी पेशेवर विवशता है। उन्होंने देश विरोधी ताकतों का समर्थन लेकर ऐसे शेर की सवारी कर लिया है, जिससे अब वह चाह कर भी उतर नहीं सकते। उतरते ही उनका भी वही हाल कर देंगी सोरोस ताकतें, जैसा पहले भी करती रही हैं।
पर दिक्कत आपकी मोम की तरह की आस्था में है जो हर घंटे खंडित होने को तैयार रहती है। ऐसे ही थोड़े आप 600-800 वर्ष गुलाम रहे हैं? आपको स्वयं के धर्म, स्वयं की संस्कृति और अपने लोगों पर ही सवाल पूछते रहने में महारत हासिल है। इसके उलट किसी बात पर तो आप सहिष्णुता में गांधी के भी दादा निकल जाते हैं।
ऐसा करते-करते कितना नुकसान किया है पीढ़ियों से आपने अपना, उसका कोई मूल्यांकन हो ही नहीं सकता। सात समंदर पार से आए हुए मुट्ठी भर ईसाइ आक्रांताओं की जमात आपको 200 वर्ष तक गुलाम कोई अपनी ताकत से थोड़े बनाए रखने में सफल हुआ था?
या कि उससे पहले रेगिस्तान से आए भूखे-नंगे चंद इस्लामी डाकुओं का गिरोह थोड़े 600 वर्ष तक आपको बंधक बनाए रख सकता था? या कि स्वतंत्रता के बाद बिना धर्म वालों (कथित धर्म निरपक्षों) का गिरोह आप पर शासन थोड़े कर सकता था अगर आपकी आस्था पत्थर की लकीर होती तो?
जिस व्यक्ति का न दादा हिंदू रहा हो और न नाना, वह आपको हिंदू धर्म पर तकरीर करता दिखे, जिसकी सबसे बड़ी पहचान ही यही हो केवल कि उनके दादा का श्वसुर भारत का पीएम थे पहले, वह अपनी अयोग्यता आप पर तमाम कुटिलता के साथ थोपने में लगा हो और आप पर थोप लें भी अपने ऊपर, तो समझिए कि कैसे हैं आप?
मार्टिन लूथर किंग ने कहा था कि आपकी पीठ पर तभी कोई सवार हो सकता है जब आप उसे झुकाने के लिए तैयार हों। थोथी और ओछी भावनाओं में बहकर आपने पीठ दिखाना अब भी नहीं छोड़ा, यह अच्छी बात थोड़े है।
जिस व्यक्ति का खानदान श्रीराम भक्तों के रक्त से सरयूजी को लाल करने का दोषी रहा हो, वह भी आज अगर सनातनी बन आपका खैरख्वाह दिखना चाह रहा है, तो सोचिए न कृपया कि कालनेमि या मारीच आदि की कहानी कितनी सही है।
अगर आज भी आप मारीच को साधु समझने की भूल करना छोड़ेंगे नहीं तो स्वतंत्रता सीता आपकी अपहृत होंगी ही। इसके उलट अगर कालनेमि का सीना चाक कर देने वाली हनुमत बुद्धिमता से काम लेंगे, तो सोने वाली विपक्षी लंका को भी भस्म करने का माद्दा आपमें ही है।
कृपया विश्वास करना सीखिये। स्वयं में बेहतर शत्रु बोध विकसित कीजिए। किसी भी नागरिक बोध से बड़ा शत्रु बोध होता है, उसे पहचाने बिना कुछ ही बेहतर होना संभव नहीं है। संशय छोड़िए और अनुभवों से सीख लीजिये। हर समय प्रयोग नहीं किए जाते। किए गए प्रयोगों को पढ़ कर, जान कर उसके अनुसार आचरण करना होता है। यह कीजिए और प्रसन्न रहिए।



