रोशन आनंद सर और फैजल सर के बीच असहमति: पटना में कोचिंग जगत का सियासी खेल  

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पटना : बिहार के प्राइवेट कोचिंग तंत्र में पिछले दिनों जो घटना घटी, वह शिक्षा के नाम पर चल रही सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई को उजागर करती है। पटना में खान सर (फैजल खान) के ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ पर 2 जून 2026 की रात कथित पथराव, तोड़फोड़ और गार्ड पर हमले का मामला तेजी से बढ़ा। फैजल खान द्वारा आरोप लगाए जाने पर पुलिस ने ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के डायरेक्टर रोशन आनंद समेत उनके दो साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

फैजल खान का पक्ष: फैजल का आरोप है कि रोशन आनंद के लोग जानबूझकर उनके केंद्र पर हमला करवाकर बदनाम करने की साजिश रच रहे थे। बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में उनके अच्छे परिणामों से ईर्ष्या थी। गार्ड पर हमला हुआ, सिर पर चोट आई और शुरू में फायरिंग की भी बात कही गई। फैजल के समर्थकों ने इसे प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान की गुंडागर्दी बताया। घटना के बाद उनके छात्रों ने न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया।

रोशन आनंद सर का पक्ष और नया मोड़: रोशन आनंद सर ने सभी आरोपों से इनकार किया और इसे पूरी साजिश बताया। उन्होंने दावा किया कि बिहार पुलिस में बेहतर रिजल्ट देने के कारण फैजल उनके संस्थान को कुचलना चाहते थे। महत्वपूर्ण बात यह है कि बाद में एक वीडियो सामने आने पर पुलिस नेफैजल के दो गार्डों को गिरफ्तार कर लिया। फायरिंग का आरोप उनके गार्डों पर ही लगा। रोशन आनंद सर के छात्रों ने पटना की सड़कों पर बड़े प्रदर्शन किए, रोशन सर की रिहाई और फैजल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

यह विवाद सिर्फ दो शिक्षकों की व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। बिहार में कोचिंग उद्योग पर कुछ बड़े नामों का दबदबा रहा है। ठीक वैसे ही जैसे तीन खानों ने हिंदी सिनेमा में वर्षों तक वर्चस्व बनाए रखा-जिसे चाहा स्टार बनाया, जिसे चाहा करियर खत्म कर दिया-उसी तरह यहां भी नए आने वाले शिक्षकों को नेटवर्क का इस्तेमाल कर कुचला जाता रहा। छात्रों का भविष्य दांव पर लगाकर वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धा चल रही है।

दोनों पक्षों के छात्र सड़कों पर हैं, दोनों ही अपने गुरु को निर्दोष बता रहे हैं। पुलिस जांच जारी है। यह मामला कोचिंग उद्योग में पारदर्शिता, कानून का राज और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की जरूरत को रेखांकित करता है। शिक्षा का मंदिर बनने वाले ये केंद्र अगर आपसी ईर्ष्या और साजिश के अड्डे बन जाएं तो छात्रों का भरोसा टूटेगा।

सच्चाई अदालत और निष्पक्ष जांच तय करेगी। लेकिन दोनों ही शिक्षक छात्रों के भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए उन्हें संयम बरतना चाहिए। कोचिंग तंत्र को शिक्षा केंद्रित होना चाहिए, न कि पावर गेम का शिकार।

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