संस्कारयुक्त बच्चों से ही बनेगा बलशाली राष्ट्र

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लखनऊ। राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के राजेन्द्रनगर स्थित कार्यालय में- बाल पोषण से राष्ट्र पोषण-विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में शहर के गणमान्य लोगों ने अपने-अपने विचार रखे। गोष्ठी की अध्यक्षता राष्ट्रधर्म के प्रभारी निदेशक सर्वेश चन्द्र द्विवेदी ने की।
सभी वक्ताओं का मानना था कि मजबूत भविष्य के लिए वर्तमान का मजबूत होना जरूरी है। अर्थात् यदि आज बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सांस्कृतिक पक्षों को बलशाली बनाया जायेगा तो वे शक्तिशाली राष्ट्र की सुदृढ़ नींव रख सकेंगे। डाॅ. फैय्याज ने कहा कि बच्चों के लिए माँ का दूध सबसे आवश्यक है। इस पर सबको ध्यान देना चाहिए। बढ़ते एकल परिवारों के कारण इस पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है।
अमित कुमार मल्ल ने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति के कुप्रचार के कारण समाज समूचा प्रभावित हो रहा है, बच्चे इससे अछूते नहीं हैं। अब बच्चे घर का खाना खाने से बचते हैं। वही वस्तु यदि बाजार की हो तो उसे बड़ी रुचि से खाते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
पायल लक्ष्मी सोनी ने कहा कि देर से हो रहे विवाह का दुष्प्रभाव परिवार-समाज पर पड़ रहा है। इससे सतर्क रहने की आवश्यकता है।
बाबूलाल शर्मा ने कहा कि अब हम इतना आगे आ चुके हैं कि पीछे लौटना सम्भव नहीं है लेकिन सांस्कृतिक ह्रास न हो, इस पर ध्यान देना जरूरी है।
राष्ट्रधर्म के निदेशक डाॅ. ओमप्रकाश ने कहा कि समुन्नत राष्ट्र के लिए व्यक्ति, समाज अनिवार्य है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि बचपन से ही भोजन, खेलकूद को संस्कारयुक्त रखा जाये। इसमें परिवार की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। गोष्ठी में संजीव सिंह, राजीव द्विवेदी ने भी अपने विचार प्रकट किये।

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