दिल्ली । कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब भविष्य कीकोई दूर की तकनीक नहीं रह गई है। यह कार्यालयों, उद्योगों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, मीडिया संस्थानों, बैंकों, न्यायव्यवस्था, मानव संसाधन प्रबंधन और सरकारी सेवाओं तक पहुंचचुकी है। भर्ती से लेकर कर्मचारी मूल्यांकन तक, ग्राहक सेवा सेलेकर सामग्री निर्माण तक और निर्णय लेने से लेकर डेटाविश्लेषण तक एआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। लेकिनइसी तेजी के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जो तकनीकीप्रगति से कहीं अधिक गंभीर सवाल उठाती है। 16 सितंबर2026 को प्रकाशित एचआर ड्राइव की रिपोर्ट के अनुसार, एलआरएन के एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि 10 में से1 से भी कम संस्थागत आचार-संहिताओं में आर्टिफिशियलइंटेलिजेंस या तकनीकी नैतिकता का स्पष्ट उल्लेख है। यानीजिन संस्थाओं में कर्मचारियों से नैतिक आचरण की अपेक्षा कीजाती है, उनमें से बड़ी संख्या ने उस तकनीक के लिए स्पष्टनैतिक दिशा-निर्देश ही तैयार नहीं किए हैं जो अब उनकेकामकाज को प्रभावित कर रही है।
यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आचार-संहिता केवलएक औपचारिक दस्तावेज नहीं होती। उसका उद्देश्य कर्मचारियोंको यह बताना होता है कि कठिन परिस्थितियों में संगठन उनसेकिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा करता है। लेकिन यदिकर्मचारी प्रतिदिन एआई का उपयोग कर रहा है और संगठन कीआचार-संहिता में एआई से जुड़े प्रश्नों का कोई स्पष्ट उत्तर नहींहै, तो वह कर्मचारी कई महत्वपूर्ण निर्णयों में अपने विवेक, सुविधा या तत्काल लक्ष्य पर निर्भर हो सकता है। क्या किसीकर्मचारी को गोपनीय दस्तावेज किसी सार्वजनिक एआईप्रणाली में डालना चाहिए? क्या एआई से तैयार सामग्री कोबिना सत्यापन के आधिकारिक रिपोर्ट में इस्तेमाल किया जासकता है? यदि एआई किसी उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया मेंबाहर कर देता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यदिएआई द्वारा तैयार सूचना गलत निकलती है तो जवाबदेहीकिसकी होगी? यदि किसी कर्मचारी के प्रदर्शन का आकलनकिसी एल्गोरिदम से किया जाता है तो कर्मचारी को उस निर्णयको समझने और चुनौती देने का अधिकार होना चाहिए या नहीं? ऐसे प्रश्न अब काल्पनिक नहीं हैं।
एलआरएन के अध्ययन से जुड़ी एचआर ड्राइव की रिपोर्ट यह भीबताती है कि लगभग 2,000 पूर्णकालिक कर्मचारियों में लगभगसभी ने कहा कि उनके नियोक्ता उनसे आचार-संहिता कोस्वीकार करने या उसके अनुपालन की पुष्टि करने की अपेक्षाकरते हैं। लेकिन आचार-संहिता को वास्तविक मार्गदर्शक के रूपमें इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों का अनुपात घटा है। लगभग5 में से 1 कर्मचारी ने कहा कि उनकी आचार-संहिता मेंव्यावहारिक मार्गदर्शन का अभाव है। यह तथ्य हमें एक बड़े प्रश्नतक ले जाता है—क्या संस्थानों में आचार-संहिताएं केवलअनुपालन की औपचारिकता बनती जा रही हैं, जबकि वास्तविककार्यस्थल की समस्याएं उनसे आगे निकल चुकी हैं?
एआई के मामले में यह अंतर और भी गंभीर है। तकनीक काविकास संस्थागत नीतियों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से होरहा है। कुछ वर्ष पहले तक अधिकांश कर्मचारियों के लिएएआई का अर्थ मुख्यतः स्वचालन या मशीन लर्निंग था। आजजनरेटिव एआई, बड़े भाषा मॉडल और एआई एजेंट कार्यालयीकार्यों के अनेक हिस्सों में प्रवेश कर चुके हैं। कर्मचारी ईमेललिखने, रिपोर्ट तैयार करने, डेटा का विश्लेषण करने, प्रस्तुतियांबनाने, कोड लिखने, अनुवाद करने और शोध में एआई काइस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में केवल यह कहना कि “तकनीकका जिम्मेदारी से उपयोग करें” पर्याप्त नहीं है। जिम्मेदार उपयोगका अर्थ क्या है, यह भी स्पष्ट करना होगा।
यहां गोपनीयता का प्रश्न सबसे पहले सामने आता है। किसीसंगठन के पास कर्मचारियों, ग्राहकों, मरीजों, विद्यार्थियों याव्यापारिक साझेदारों से संबंधित संवेदनशील जानकारी होसकती है। यदि कर्मचारी सुविधा के लिए ऐसी जानकारी किसीबाहरी एआई प्रणाली में डाल देता है, तो डेटा सुरक्षा औरगोपनीयता से जुड़े गंभीर प्रश्न पैदा हो सकते हैं। इसलिएसंस्थागत एआई नीति में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन-साडेटा एआई उपकरणों में डाला जा सकता है, कौन-सा डेटाप्रतिबंधित है और किन परिस्थितियों में संगठन द्वारा स्वीकृतएआई प्रणालियों का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न है—सटीकता और सत्यापन। जनरेटिवएआई उपयोगी सामग्री तैयार कर सकता है, लेकिन उसकाआउटपुट स्वतः सत्य का प्रमाण नहीं बन जाता। गलत तथ्य, काल्पनिक संदर्भ, गलत आंकड़े और भ्रमित करने वाले उत्तरसंभव हैं। इसलिए यदि एआई किसी रिपोर्ट, समाचार, शोध, कानूनी दस्तावेज या प्रशासनिक निर्णय के लिए इस्तेमाल कियाजा रहा है, तो मानव सत्यापन आवश्यक हो सकता है। संगठनकी आचार-संहिता को यह निर्धारित करना चाहिए कि किसप्रकार के कार्यों में मानव समीक्षा अनिवार्य होगी।
तीसरा प्रश्न निष्पक्षता का है। एआई प्रणालियां जिन आंकड़ोंऔर प्रक्रियाओं पर आधारित होती हैं, उनमें मौजूद पूर्वाग्रह उनकेपरिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। भर्ती, पदोन्नति, कर्मचारीमूल्यांकन, ऋण, बीमा और अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों में यदिएआई का इस्तेमाल किया जाता है तो यह देखना जरूरी है किक्या किसी समूह के साथ व्यवस्थित रूप से असमान व्यवहार तोनहीं हो रहा। SHRM ने भी कार्यस्थल में एआई के नैतिकउपयोग के संदर्भ में स्पष्ट अपेक्षाओं, प्रशिक्षण, संचार औरनेतृत्व की जिम्मेदारी पर जोर दिया है।
चौथा प्रश्न जवाबदेही का है। मशीन निर्णय ले सकती है, लेकिननैतिक और कानूनी जिम्मेदारी अंततः किसी व्यक्ति या संस्था केस्तर पर तय होनी ही होगी। “
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