समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, विशिष्ट अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना, प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य, उ.प्र. राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव तथा पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र सहित अनेक प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती निदर्शना गोवानी ने भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “महिलाएं वस्तुतः महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का स्वरूप हैं। जब वे महाकाली बनती हैं तो परिवार, कुटुंब और समाज की सुरक्षा के लिए ढाल बनकर खड़ी होती हैं। महालक्ष्मी के रूप में वे गृह-प्रबंधन, अर्थ-व्यवस्था और दयाभाव से पूरे समाज का संचालन करती हैं। वहीं महासरस्वती के रूप में ईश्वर ने हमें विवेक और ज्ञान दिया है। हमारी पहचान परिधानों से नहीं, बल्कि हमारे उच्च संस्कारों से है।”

उन्होंने आगे कहा कि स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं। पुरुष आदिशक्ति के अभिन्न अंग हैं और परस्पर सहयोग से ही सृष्टि एवं समाज में पूर्णता आती है। अपने अनुभवों को साझा करते हुए श्रीमती गोवानी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारत विकास परिषद जैसे संगठनों ने सदैव बहनों को मातृवत और भगिनी भाव से आगे बढ़ने का संबल दिया है। आज सामाजिक व संगठनात्मक कार्यों में बहनों को भाइयों के समान ही सम्मान और अवसर प्राप्त हैं।
कार्यक्रम के अंत में पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र की दूरदृष्टि की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। उपस्थित अतिथियों ने इस बात पर बल दिया कि यह कृति आने वाले समय में समाज और राष्ट्र के विकास में महिलाओं की सक्रिय सहभागिता को नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा प्रदान करेगी।



