वे लौट कर फिर ना आए

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संजीव लपप्रीत

दिल्ली। मैं इन बुजुर्ग देवी द्वारा जो एक कार्यक्रम में बोला गया उसे जस का तस लिख रहा हूँ… कुछ भी मिलाये बिना…
“मैं दस साल की थी जब मैंने खेल(बैडमिंटन) शुरू किया और साढ़े दस साल में स्टेट का ladies double started भी जीत लिया।
फिर मैं खेली till the age of twenty two and I represented India. उसके बाद शादी करने का टाइम आ गया। It was an arranged marriage, my husband was in the air force, a fighter pilot.
हम लोग अंबाला में posted थे, लड़ाई का माहौल कुछ बनने लगा and suddenly 3rd of December nineteen seventy-one में लड़ाई शुरू हो गई और उस समय तो फिर bombing शुरू ही अंबाला से हुई। My husband वो night duty पे थे, base पे duty पे थे। वो जाने लगे, he said मैं जा रहा हूँ तुम हो सके तो घर चले जाना। मैंने कहा मैं कहीं नहीं जाती, मैं यही रहूँगी, I will wait for you.
उन्होंने ये भी guidance दिया कि siren बजेगा तो आपको trench के अंदर जा के बैठना है। 3rd of December was peak of interest, तीन दिन हम वहाँ पे उस trench में ही बैठे रहे और third day gate पे दो जने आए। Official वर्दी में थे but उन्होंने कहा कि साहब ने कहा है आप घर चले जाओ।
छोटा सा सूटकेस बांधा, घर को ताला लगाया। And believe me ढाई से तीन किलोमीटर आधी रात को बारह से दो बजे पैदल जा के स्टेशन पे खड़ी हो गई मैं। आज ही वो सोच के ज्यादा डर लगता है जितना उस समय नहीं लग रहा था कि मैंने कैसे किया होगा? पता नहीं, I was twenty-three at that time.
वहाँ गाड़ी आई, फिर blackout रहता है तो lights नहीं जलाते ना स्टेशन पे ना डिब्बे के अंदर, अँधेरा रहता है पूरा। मैं अपना किसी तरह से सूटकेस ले के चढ़ गई। बाथरूम के बाहर बैठ के रात गुजारी and I reached home.
तो ये तो my first encounter with war था, जिसको कहिए आप। बहरहाल वो हुआ, लड़ाई चली, इतने दिन लड़ाई खत्म भी हो गई। इस बीच में मेरे father in law ने कहीं से एक न्यूज़ पेपर लाया जो कि पाकिस्तान का न्यूज़ पेपर था।
और उसके फ्रंट पेज पे लिखा था:
पाकिस्तान डाउंस forty six planes, five pilots captured अलीवे और उसमें मेरे हस्बैंड का नाम था।
वो दिन और आज का दिन, वो पेपर पे ही रह गया, आज तक नहीं पता चला।
पर जो… अकेले हम नहीं, चौवन परिवार ऐसे हैं जो लोग आज तक लौट के नहीं आए उनके परिवार के लोग।
हम लोगों ने कोशिश करी, नहीं ऐसा हुआ होगा, वैसा हुआ होगा। जब जंग होती है तो individual मायने नहीं रखता है, देश मायने रखता है।”
ये बातें कहीं तश्वीर में दिख रही “श्रीमती दमयंती ताँबे” ने…. जो कभी राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाडी रहीं और उनके पति फ्लाइट लेफ्टिनेंट विजय वसंत ताँबे 1971 की जंग में पाकिस्तान के आसमान में लापता घोषित हुए…. और फिर कभी न लौटे
और न युद्ध जीतने के बाद भारत की तब की सरकार ने उनपर सोचा!!

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