विकसित भारत@2047 के लिए भारत की रोजगार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (NFPRC) द्वारा सांसदों एवं विधायकों के लिए कार्यशाला

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Delhi: Nation First Policy Research and Change Foundation (NFPRC) ने इंडिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में सांसदों और विधायकों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें जनप्रतिनिधियों और नीति विशेषज्ञों ने भारत के रोजगार तंत्र को मजबूत करने के विषय पर चर्चा की। विचार-विमर्श में शिक्षा और कौशल विकास, निवेश आधारित औद्योगीकरण और विधायी कार्यों में डिजिटल संचार के उपयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। लोकसभा, राज्यसभा और देश भर की राज्य विधानसभाओं के 40 जनप्रतिनिधियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया।

 

पिछली विधायी कार्यशालाओं को मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया के बाद, NFPRC ने इस पहल को आगे बढ़ाते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्थानीय जरूरतों और संभावनाओं की पहचान कर उन्हें रोजगार और आर्थिक प्रगति के ठोस अवसरों में कैसे बदला जाए। इसी उद्देश्य के साथ जनप्रतिनिधियों और नीति विशेषज्ञों ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और अवसरों के बेहतर उपयोग, प्रभावी नीतिगत क्रियान्वयन और साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया पर विचार साझा किए। कार्यशाला ने जनप्रतिनिधियों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों की प्राथमिकताओं के अनुरूप व्यावहारिक समाधान तलाशने और उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक साझा मंच प्रदान किया।

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए NFPRC Foundation के बोर्ड सदस्य श्री अभिनव प्रकाश ने विकसित भारत @2047 की दिशा में देश की यात्रा में रोजगार और आर्थिक अवसरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, कौशल और उद्योगों की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना आवश्यक है। साथ ही, स्थानीय क्षमताओं और अवसरों के अनुरूप निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से इन चर्चाओं को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ठोस पहल में बदलने का आग्रह किया और स्थानीय आर्थिक विकास को गति देने तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि स्थानीय युवाओं के कौशल, क्षमता और आकांक्षाओं को उनके क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया, ताकि संस्थान स्थानीय जरूरतों के अनुसार युवाओं को तैयार कर सकें और क्षेत्र की विशेषताओं के आधार पर निवेश को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने, पात्र लाभार्थियों को उनका लाभ दिलाने, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा ऐसा वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जहां स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

 

लोकसभा सांसद श्री शशांक मणि ने “निवेश और औद्योगीकरण के जरिए रोजगार सृजन” विषय पर वर्चुअल माध्यम से सत्र को संबोधित करते हुए स्थानीय आर्थिक संभावनाओं को निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों में बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के टियर-2 और टियर-3 जिलों में उद्यमिता और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने देवरिया और आसपास के जिलों में अपने एक दशक के अनुभव के आधार पर “अमृत प्रयास” और “जागृति” मॉडल प्रस्तुत किए। इन मॉडलों में रोजगार सृजन वाले उत्पादन क्षेत्र, कृषि-आधारित उद्योग और पर्यटन सहित छह प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, निवेश को बढ़ावा देने और क्षेत्र में लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए अगले दस वर्षों की रणनीति भी साझा की। भारत में रोजगार के विकास की यात्रा को एक उदाहरण से समझाते हुए उन्होंने कहा, “मोदी 1.0 में रोजगार की नींव रखी गई, मोदी 2.0 में दीवारें बनीं और मोदी 3.0 में छत का निर्माण हो रहा है।” उन्होंने कहा कि यह यात्रा देश में रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक अवसरों के निरंतर विस्तार को दर्शाती है।

फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट के निदेशक श्री राहुल अहलूवालिया ने “निवेश और औद्योगिकीकरण के माध्यम से रोजगार को बढ़ावा” विषय पर सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेश को बढ़ावा देकर, उत्पादन लागत को बेहतर बनाकर और अनुकूल कारोबारी माहौल तैयार करके भारत निर्यात और रोजगार के अवसरों को नई गति दे सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने वियतनाम और गिफ्ट सिटी के उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने विनिर्माण निर्यात और पर्यटन के माध्यम से रोजगार के अवसरों के विस्तार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला तथा राज्यों द्वारा कारोबार को सुगम बनाने और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने वाले सुधारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर निवेश की संभावनाओं की पहचान करने, निवेशकों को आकर्षित करने, उद्योगों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने तथा लाइसेंस और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाने वाले सुधारों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे निवेश को रोजगार, आजीविका और स्थानीय आर्थिक विकास के नए अवसरों में बदलने में मदद मिलेगी।

संचार क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. रोहित उपाध्याय ने जनप्रतिनिधियों के लिए “डिजिटल और सोशल मीडिया संचार” पर सत्र का संचालन किया। सत्र में बदलते डिजिटल परिवेश में जनप्रतिनिधियों के प्रभावी और जिम्मेदार संवाद पर विशेष ध्यान दिया गया। सोशल मीडिया, डिजिटल कंटेंट और एनालिटिक्स के बेहतर उपयोग के साथ नागरिकों की अपेक्षाओं और प्रतिक्रियाओं को समझने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा हुई। साथ ही, भ्रामक सूचनाओं से निपटने और सार्वजनिक संचार में AI के जिम्मेदार उपयोग पर भी विचार साझा किए गए। सत्र ने इस बात को रेखांकित किया कि डिजिटल माध्यम जनप्रतिनिधियों को नागरिकों से अधिक सहज और समयबद्ध संवाद स्थापित करने तथा उनके साथ जुड़ाव को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

समापन संबोधन में श्री वासुदेव देवनानी ने वक्ताओं और कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी करने वाले जनप्रतिनिधियों के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि NFPRC शोध, संवाद और सहयोग के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को प्रभावी नीति निर्माण और बेहतर जनसेवा के लिए उपयोगी दृष्टिकोण एवं संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा। कार्यशाला का समापन नीति और शोध से प्राप्त विचारों को जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणामों में बदलने तथा विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग और श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ। यह पहल विकसित भारत@2047 के अनुरूप समावेशी, प्रभावी और परिणाम-केंद्रित शासन को आगे बढ़ाने की दिशा में NFPRC के प्रयासों को रेखांकित करती है।

 

कार्यशाला में शामिल जनप्रतिनिधियों ने इसे सार्थक नीति संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का उपयोगी मंच बताया। विभिन्न सत्रों में हुए विचार-विमर्श ने जनप्रतिनिधियों को नई सोच और व्यावहारिक दृष्टिकोण से जुड़ने का अवसर दिया। NFPRC इस संवाद को आगे भी जारी रखते हुए विषयगत परामर्श, नीति-केंद्रित चर्चाओं और शोध-आधारित पहलों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों के साथ सहभागिता को और मजबूत करेगा।

 

NFPRC के बारे में:

Nation First Policy Research and Change Foundation (NFPRC) दिल्ली स्थित एक सार्वजनिक नीति संस्थान है, जो शोध आधारित नीति निर्माण, विधायी उत्कृष्टता और नवाचार के माध्यम से भारत की शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने का कार्य करता है। अपने सेंटर फॉर लॉ, पॉलिसी एंड गवर्नेंस (CLPG) और सेंटर फॉर एक्सेलेरेटिंग इंडिया’s ग्रोथ (CAIG) के माध्यम से NFPRC जनप्रतिनिधियों को शोध सहयोग, सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन और विभिन्न क्षेत्रों में सुधार संबंधी सुझाव प्रदान करता है।

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