20 जुलाई 2026: दिल्ली का वह दिन जब अहिंसा का मुखौटा फटा

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दिल्ली। रात के 11 बजे के बाद की बात। 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर मंतर पर कोक्रोच जनता पार्टी (CJP)का ‘चलो संसद’ मार्च हिंसा में बदल गया। पुलिस पर पत्थरबाजी हुई, जिसमें 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। दिल्ली पुलिस ने 70 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। करीब 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। दोनों पक्षों से संयम बरता गया, जिससे बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि टली। पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है और अधिक गिरफ्तारियां संभव हैं।

नेतृत्व की गैर-मौजूदगी

जब पुलिस लाठीचार्ज कर रही थी और समर्थक आगे बढ़ रहे थे, तब CJP के कई प्रमुख नेता कहां थे? रिपोर्ट्स और वीडियो फुटेज में दिखता है कि जब समर्थकों पर लाठियां बरस रही थीं, तब कई शीर्ष चेहरे मुंह छुपाए इलाके में घूम रहे थे। वे अगली पंक्ति में क्यों नहीं खड़े हुए? सवाल उठ रहा है कि आंदोलन के चेहरे युवाओं को आगे धकेलकर खुद पीछे क्यों रह गए?

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस ने घटनास्थल से सरकारी बस में संरक्षण में बाहर निकाला। पुलिस का कहना है कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया, बल्कि सुरक्षा के मद्देनजर एस्कॉर्ट किया गया। लेकिन आलोचक इसे विशेष व्यवस्था बता रहे हैं।

चाय पर चर्चा और गायब चेहरे

इसी दौरान CJP के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के यहां चाय पर चर्चा में शामिल थे। वहीं, प्रवक्ता विजेता दहिया लापता नजर आए-बाद में उन्हें दूर मेट्रो स्टेशन पर पाया गया। ये घटनाएं आंदोलन की निष्पक्षता पर सवाल उठाती हैं। क्या नेतृत्व युवाओं के साथ था या अलग सौदेबाजी में लगा था?


ढाका-काठमांडू मॉडल की छाया

सूत्रों के मुताबिक, कुछ तत्व इस प्रदर्शन को ढाका (2024) और काठमांडू मॉडल की तर्ज पर भड़काना चाहते थे। युवाओं को संसद की ओर उकसाया जाता, पुलिस बल प्रयोग करती और देशभर में गुस्सा फैल जाता। दिल्ली पुलिस और सरकार ने समझदारी से काम लिया। हिरासत में पूछताछ से कई कड़ियां जुड़ रही हैं। शक की सूई पावरफुल लोगों की ओर है।

पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा का अचानक तबादला और इंटेलिजेंस बैकग्राउंड वाले अनुराग कुमार की नियुक्ति भी इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

योगेंद्र यादव जैसे एक्टिविस्ट ने 20 जुलाई के प्रोटेस्ट को ‘प्रोटोटाइप टेस्टिंग” बताया और भविष्य में शिक्षा से आगे अन्य मुद्दे, पूरे देश में विस्तार तथा नई लीडरशिप लाने की बात कही। कुछ इसे रिजीम चेंज की बड़ी योजना का हिस्सा मान रहे हैं-अमेरिकी कनेक्शन, सोशल मीडिया पर अचानक वायरल होना, लद्दाख के नेताओं का जुड़ना और एक बड़े राष्ट्रीय नेता की अचानक लंबी छुट्टी जैसे संकेतों के साथ।

तथ्य और सवाल

CJP का आंदोलन NEET पेपर लीक और शिक्षा सुधार को लेकर जून से चल रहा है। सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर थे। लेकिन 20 जुलाई की हिंसा ने इसे नया मोड़ दिया।

पत्थर फेंकना ‘अहिंसक’ कैसे? पुलिस घायल हुई, प्रदर्शनकारी घायल हुए-दोनों पक्षों की कहानी अलग-अलग है।

तफ्तीश जारी है। क्या यह शुद्ध छात्र आंदोलन था या राजनीतिक-विदेशी एजेंडे का इस्तेमाल? युवाओं का गुस्सा वाजिब है, लेकिन नेतृत्व की जिम्मेदारी भी उतनी ही है। जब लाठियां चलीं तो अगली पंक्ति में कौन था और कौन चाय पी रहा था-यह जांच बताएगी।

20 जुलाई दिल्ली के लिए सबक है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन हिंसा और दोहरे मापदंड नहीं। सच्चाई सामने आएगी, लेकिन युवा ऊर्जा को साजिश की बलि न चढ़ने दें।

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