आदित्य चोपड़ा: अल्फा मिशन या हनी ट्रैप ऑपरेशन?

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दिल्ली। अरे भाई, आदित्य धर बनने की राह पर निकले आदित्य चोपड़ा फिर से अपनी स्पेशलिटी लेकर आ गए हैं – ‘कॉपी-पेस्ट + प्रोपगैंडा + अनइंटेंशनल कॉमेडी’ का त्रिवेणी संगम। फिल्म का नाम अल्फा रखा है, पर टीजर देखकर तो लग रहा है पूरा अल्फा-बीटा-गामा टेस्ट फेल हो चुका है।

सबसे पहले तो बॉबी देओल का वो सीन। बेटी के कंधे पर ‘ए’ का टैटू बनवा दिया, फिर जब बेटी पूछती है ‘ये क्या है पापा?’, तो बॉबी गंभीर मुद्रा में बोलते हैं — “ये सीक्रेट है बेटा।” अरे भाई, बाजू पर बना के सीक्रेट क्या बचा? ये तो वैसा ही है जैसे कोई अपना आधार कार्ड फेसबुक स्टेटस पर डालकर लिखे “पर्सनल इंफॉर्मेशन, प्लीज डू नॉट शेयर”। आदित्य चोपड़ा की फिल्मों में लॉजिक का यही हाल होता है – पहले चीज को खुल्लमखुल्ला दिखाओ, फिर उसे ‘सीक्रेट मिशन’ बोलो।

अब आलिया भट्ट की बारी। उनकी किरदार का नाम सीता रखा गया है। नाम सुनकर ही फिल्मी पंडित चीख रहे हैं – ‘प्रोपगैंडा! प्रोपगैंडा!’। मिशन पर जा रही आलिया को देखकर लगता है वो किसी पाकिस्तानी जासूस को हनीट्रैप करने निकली है, न कि देश बचाने। अगर बीच में एक स्लीवलेस सीन आ गया तो पूरा देश चिल्लाएगा – “अरे! गंगाधर ही शक्तिमान है!”। सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट हो जाएंगी कि यार, ये मिशन है या फैशन वीक?

वाईआरएफ की पिछली फिल्म बुरी तरह पीट चुकी थी। अब नई फिल्म से पहले ही लोग टीजर के कमेंट्स में लिख रहे हैं – “पहला दिन, पहला शो? भाई, उसी दिन मैं फिर धुरंधर देख लूंगा”। इतने दिन पहले ही फिल्म को पीटने की रिहर्सल चल रही है, रिलीज के बाद तो क्या हाल होगा, सोच भी नहीं सकते।

फिल्म प्रमोट करने में शाहरुख खान, सलमान खान से लेकर ध्रुव राठी तक उतर आए। जब इतने ‘धुरंधर’ एक साथ किसी फिल्म को प्रमोट करें तो समझ लेना चाहिए कि फिल्म में कंटेंट कम, एजेंडा ज्यादा है। एक तरफ तो ‘मिशन अल्फा’, दूसरी तरफ ‘मिशन एजेन्डा सेटिंग’।

कुल मिलाकर आदित्य चोपड़ा साहब ने फिर वही पुराना फॉर्मूला दोहराया है – थोड़ी बहुत एक्शन, ढेर सारी खामियां, एक चम्मच प्रोपगैंडा और आलिया भट्ट को गंभीर चेहरा बनाकर खड़ा कर दो। दर्शक पहले ही तैयार बैठे हैं – पॉपकॉर्न साथ में, मजाक उड़ाने का मूड भी साथ में।

अल्फा आने वाली है, पर फिल्म का ब्रेन तो अभी भी बीटा वर्जन में ही अटका पड़ा है।

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आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु एक पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों से मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान स्टेप से जुड़े हुए हैं

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