अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा को नष्ट किया: प्रो. अनुज

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लखनऊ। अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को सुनियोजित षड्यन्त्र के तहत नष्ट करने का कार्य किया। इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह धारणा कि भारतीय शिक्षा अंग्रेजों की देन है, पूरी तरह से गलत है। तथ्य यह है कि जब अंग्रेज ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को जानने-समझने का प्रयास कर रहे थे तब इंग्लैण्ड की शिक्षा अत्यन्त दयनीय स्थिति में थी। यह बात प्रो. अनुज कुमार मिश्र ने राष्ट्रधर्म कार्यालय में आयोजित पुस्तक चर्चा कार्यक्रम में कही। प्रो. अनुज प्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक धर्मपाल की चर्चित पुस्तक ‘द ब्यूटीफुल ट्री’ (रमणीय वृक्ष) पर अपने विचार रख रहे थे।
प्रो. अनुज ने कहा कि अंग्रेजों ने सुनियोजित षड्यन्त्र के तहत भारतीय शिक्षा, संस्कृति और जनसंख्या को क्षति पहुँचाने का कार्य किया। उल्लेखनीय है कि ‘द ब्यूटीफुल ट्री’ लिखने के लिए धर्मपाल जी ने नौ वर्षों तक इंग्लैण्ड में रहकर ब्रिटिश संग्रहालय के दस्तावेजों से तथ्य एकत्र किये। यह पुस्तक उन्हीं तथ्यों-आँकड़ों पर आधारित है। प्रो. अनुज ने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली आचार्यों से पोषित थी। यह आचार्य अपनी भौतिक आवश्यकताओं को महत्त्वहीन मानते हुए शिक्षा देना अपना दायित्व मानते थे। अंग्रेजों ने ऐसे आचार्यों को अपमानित किया। इसके पीछे उनकी योजना यह थी कि धीरे-धीरे आचार्य अपने दायित्व के निर्वाह से पीछे हटेंगे और इससे भारतीय शिक्षा पद्धति ध्वस्त हो जायेगी। प्रो. अनुज ने कहा कि स्थापित और प्रमाणित तथ्य यह है कि भारतीय शिक्षा सबके लिए सहजता से उपलब्ध थी और पूरे समाज को इसने जोड़कर रखा था। भारतीय शिक्षा, सभ्यता किसी को आघात पहुँचाने के लिए नहीं थी।
पुस्तक चर्चा के कार्यक्रम की अध्यक्षता सर्वेश चन्द्र द्विवेदी ने की। कार्यक्रम में मनोजकांत, प्रो. ओमप्रकाश, जय प्रकाश पाण्डेय, अमित कुमार मल्ल, पद्मनाभ पाण्डेय, सुघोष मिश्र, हरमेश चौहान, कुशाग्र शुक्ल, प्रभाकर सिंह, अमन दुबे, राजीव द्विवेदी, मीनाक्षी पाण्डेय, मंगलेश्वर पाण्डेय, तरुषी सिंह, रितू सिंह, शिवम पाण्डेय, अभिषेक प्रजापति और अन्य लोग उपस्थित थे।

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