एक ओर विद्यार्थी परिषद विद्यार्थियों के मुद्दों को लेकर जमीन पर लगातार सक्रिय है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस का छात्र संगठन NSUI अपने राजनीतिक दल की कार्यशैली को ही छात्र राजनीति में दोहराते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाने और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है। हाल के दिनों में NSUI के भीतर सामने आए मतभेद और आंतरिक विवाद यह दिखाते हैं कि संगठन अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने में असफल रहा है। इन आंतरिक मतभेदों से विद्यार्थियों का ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस और NSUI लगातार प्रचार के नए हथकंडे अपना रहे हैं। संविधान के रक्षक बनने का दावा करने वाले NSUI के लोगों द्वारा संविधान और संगठन के झंडे तक जलाए जाने की घटनाएं उनके कथनी और करनी के अंतर को स्पष्ट करती हैं। NSUI को अपनी हार स्पष्ट दिखाई दे रही है और यही कारण है कि वह विद्यार्थियों के वास्तविक मुद्दों से बचकर केवल भ्रम फैलाने और प्रचार के सहारे चुनावी माहौल को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।
अभाविप, दिल्ली के प्रदेश मंत्री श्री सार्थक शर्मा ने कहा, “NSUI में जिस प्रकार के आंतरिक मतभेद और विवाद सामने आ रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि संगठन अपने ही लोगों को संभालने में असमर्थ है। जो संगठन अपने कार्यकर्ताओं और साथियों के बीच समन्वय और विश्वास कायम नहीं कर पा रहा, वह दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों की समस्याओं और उनकी आकांक्षाओं को कैसे संभालेगा? NSUI को विद्यार्थियों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर बात करनी चाहिए, लेकिन वह अपनी अंदरूनी कलह से ध्यान हटाने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रम और प्रचार का सहारा ले रही है। इसके विपरीत अभाविप लगातार विद्यार्थियों के बीच जाकर उनकी बात सुन रही है और छात्रहित के मुद्दों को लेकर जमीन पर काम कर रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अब सब कुछ देख और समझ रहे हैं। इस बार विद्यार्थियों का स्पष्ट समर्थन अभाविप के साथ है और 7-3-3-3 के साथ विद्यार्थी परिषद का पूरा पैनल निर्णायक विजय की ओर बढ़ रहा है।”



