—कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल
रायपुर : नीट पेपर लीक मामले में सोनम वांगचुक ने जबसे भूख हड़ताल अनशन तोड़ा है। ठीक उसी समय से कांग्रेस, कम्युनिस्ट, AAP-सपा के पत्रकार-नेता-कार्यकर्ता , FCRA वाले NGO’s गैंग सब दुःखी हैं। सबके खेमे में मातम सा पसरा हुआ है। सोनम वांगचुक के कंधों पर अपनी बंदूक रखकर सियासी रोटियां सेंकने वाले लोग, अब उन्हें गाली दे रहे हैं। उन पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं। उन्हें सर्टिफिकेट बांट रहे हैं।
•पंजाब चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में प्रोटेक्ट को लेकर हाईजैक और क्रेडिट की होड़ वाली नूराकुश्ती जारी है। सिर फुटौव्वल मचा हुआ है। इसी को कहते हैं प्रोफेशनल हिप्पोक्रेसी।
•लेकिन सोनम वांगचुक से अब कांग्रेसी, आपिए, सपाई और कम्युनिस्ट क्यों दुःखी हैं? सोनम वांगचुक को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जो भगवा पटका पहनाया, उससे क्यों दुःखी हैं? ये सब सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने से क्यों परेशान हैं?
उसके लिए एक सत्य कहानी जान लीजिए। यहां मैं स्पष्ट कर दूं कि इस कहानी की सोनम वांगचुक से तुलना नहीं की जा रही है। सिर्फ़ ये उस इकोसिस्टम के पैटर्न को समझने के लिए बताई जा रही है। जो अपनी ज़िद के लिए किसी की भी जान लेने से पीछे नहीं हटता है।
कहानी यूं है —
गद्दार कम्युनिस्ट और उनको बैकिंग देने वाले राजनीतिक दल, नेता और संगठन हमेशा लाशों, रक्तपात-हिंसा के ज़रिए सत्ता तक पहुंचने की रणनीति पर काम करते हैं। कम्युनिस्ट जिन्हें भी अपना टारगेट सेट करते हैं, उनका ‘ज़िंदा और मुर्दा’ दोनों ढंग से इस्तेमाल करने और माइलेज लेने में पीछे नहीं रहते। कैसे अर्बन नक्सली अपना टारगेट फिक्स्ड करते हैं? उसे चारा-पानी देते हैं। फिर अपनी रणनीति के मुताबिक़ उसका इस्तेमाल करते हैं।
√ अगर उनका टूल-उनके एजेंडे में फिट नहीं बैठता है तो वो कैसे उसकी क्रेडिबिलिटी पर अटैक करते हैं। इस पैटर्न को समझिए।
•छत्तीसगढ़ के पूवर्ती गांव में नक्सलवाद-माओवादी आतंक के प्रकोप के बीच जनजातीय समाज के घर सालों पहले एक बालक पैदा हुआ। उसका नाम रखा गया माडवी हिड़मा। वो जैसे बड़ा हुआ, बालिग अवस्था में आया। माओवादियों ने उसे टारगेट फिक्स्ड किया और फिर क्या था? उसे नक्सली बना दिया गया।
• वो बच्चा जो—
अपने माता-पिता की आंखों का तारा होना चाहिए था। वो जवानों, मासूम लोगों की ह-त्या करने का कुख्यात चेहरा बन गया। उस खूं’खार माओवादी आ-तंकी पर पर 6 राज्यों ने तक़रीबन 1.80 करोड़ का ईनाम रखा था।18 नवंबर 2025 को लाल आतंक के पर्याय हिड़मा मारा गया।
— किन्तु इसके पहले छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा उसके गांव गए। हिड़मा की माँ से मिले। भावुक अपील कराई कि अगर हिड़मा सरेंडर कर दे तो उसका पुनर्वास कराया जाएगा।
— लेकिन अर्बन नक्सलियों ने हिड़मा को जानबूझकर सरेंडर नहीं करने दिया। अंततोगत्वा एक मुठभेड़ में सैकड़ों लोगों का ह-त्यारा हिड़मा मारा गया। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने संवेदनशीलता दिखलाई। हिड़मा के शव को अंतिम संस्कार के लिए उसके गांव भेजा।
— फिर क्या था?
पूरे अर्बन नक्सलियों के गिरोह के चेहरों में चमक आ गई। पूवर्ती में कैमरे, कलम, की-बोर्ड अपना काम करने लगे। ग्राउंड पर कुछ अर्बन नक्सली घड़ियाली आंसू बहाने लगे। माओवादी आ-तंक के पर्याय हिड़मा का ग्लैमराइजेशन शुरू हो गया। उसे पीड़ित,दमित बताया जाने लगा। अब हिड़मा को हीरो के तौर पर पूरे समाज में स्थापित करने की मुहिम शुरू हुई। इकोसिस्टम के किसी नेता ने संसद में कन्वर्जन के विरोधी धर्मरक्षक भगवान बिरसा मुंडा से हिड़मा की तुलना करने का अक्षम्य अपराध किया। वो इसलिए ताकि हमारा जनजातीय समाज — उद्वेलित रहे, हिंसा के रास्ते को Recall करता रहे। क्योंकि हम जैसे आदर्श चुनते हैं, हम वैसे ही बनते हैं।
— सोचिए अगर अर्बन नक्सलियों ने हिड़मा को सरेंडर करने दिया होता तो वो जवानों के हाथों नहीं मारा जाता। फिर क्या होता? हिड़मा – माओवादी आ-तंक फैलाने वाले अर्बन नक्सलियों के लिए स्थायी खाद-बीज न बन पाता। सो, इन सबने हिड़मा को सरेंडर नहीं करने दिया, उसे मरने के लिए मजबूर किया। शायद आपको इससे इस इकोसिस्टम के बारे में समझ आया होगा कि — ये समाज को हिंसा, अराजकता की आग में झोंकता है? इसका ये पैटर्न समझ आया?
—— अब पुनश्च आइए सोनम वांगचुक पर…
इन्होंने सबसे पहले एक ऐसे चेहरे को चुना समाज में जिसकी छवि को लेकर स्वीकार्यता हो। सोनम वांगचुक इसके लिए परफेक्ट चेहरे मिले। उन्होंने 28 जून 2026 को जंतर-मंतर में भूख हड़ताल शुरू की। और इधर इनके सियासी नफ़ा नुकसान के कैलकुलेशन शुरू हो गए।
— ये सब नहीं चाहते थे कि सोनम वांगचुक अपनी भूख हड़ताल तोड़ें। क्योंकि इनमें से कोई भी भूख हड़ताल नहीं कर रहा था।सबकी पिज्जा, बर्गर और नॉनवेज पार्टियों के वीडियो सबने देखे ही हैं। इसी के चलते सोनम वांगचुक को ये तक कहना पड़ गया था कि—“आप लोग यहां आकर ठूंस-ठूंस कर खा रहे हैं, मुझे यह देखकर बहुत दुख होता है।”
—• सो इकोसिस्टम ने ये तय किया कि – सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल करने दीजिए। उनकी हालत नाज़ुक होने दीजिए। ताकि अगर उन्हें धोखे से कुछ हो जाए तो समाज में उस सहानुभूति, आक्रोश के ज़रिए ये अपना उल्लू सीधा कर सकें। देश को हिंसा, अराजकता, उपद्रव की आग में झोंक सकें।
•जैसा इनके समूह ने मूल मुद्दे को पहले किनारे कूड़ेदान में फेंका। फिर 20 जुलाई 2026 को पुलिस की बिना अनुमति के ‘चलो संसद मार्च’ के ज़रिए व्यापक हिंसा को रणनीतिक हथियार बनाया। हिंसा, Moblinching करने ,
हिंदुत्व के ख़िलाफ़ विष-वमन, भारत के इ-स्लामीकरण के नारे, अश्लीलता, गालीबाजी फैलाने के संगठित प्रयास किए। जोकि अब भी जारी है।
— यानी ये पूरा इकोसिस्टम सोनम वांगचुक को शहीद बनाकर, उनके नाम पर राजनीतिक हिंसा और सत्ता का खेल खेलना चाहता था। जिस पर सोनम वांगचुक ने पानी फेर दिया। सरकार ने सोनम वांगचुक को पहले सफदरजंग अस्पताल इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट की निगरानी में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उन्हें भर्उती कराकर उपचार दिलाया। केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेन्द्र सिंह ने प्रॉपर दो बार मुलाक़ात की। उन्हें वाजिब मांगों के लिए आश्वस्त किया। अंततोगत्वा सोनम वांगचुक ने अपना 23 जुलाई 2026 को अनशन तोड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र
मोदी ने X पर लिखा भी —“मैं सोनम जी से आग्रह करता हूँ की वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वज़न फिर से प्राप्त करें।मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि सोनम जी स्वस्थ रहें।”
इधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सख्त एक्शन को लेकर 23 जुलाई 2026 को रात्रि 12 बजे सोशल मीडिया में वीडियो जारी किया। पूर्व में ही गिरफ्तार सभी 13 आरोपियों के ख़िलाफ़ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को लेकर आश्वस्त किया। कोर्ट का गठन भी हुआ। शिक्षा, युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार के कार्यों और प्रतिबद्धता की जानकारी दी। 24 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्रालय के सचिव हटाए गए। NTA के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया। दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई। मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक को रोकने से जुड़े एक सख़्त बिल को मंजूरी दी। जो कि संसद सत्र में पेश होकर पारित हो जाएगा। सरकार NEET समेत पेपर लीक से जुड़े मामलों में संसद में चर्चा भी करा रही है।
— अब क्या हुआ? सोनम वांगचुक ने जैसे ही 23 जुलाई 2026 को मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह के हाथों अनशन तोड़ा, भगवा पटका पहना। देश में हिंसा, उपद्रव फैलाने वाले अराजकतावादियों के
सपने ढहने शुरू हो गए। इसीलिए कांग्रेस, आप, सपा और ढफली गैंग का AISA, SFI, ASIF ये पूरा इकोसिस्टम सोनम वांगचुक को अपराधी बताने, गाली देने और उन्हें सर्टिफिकेट देने में जुट गया। इकोसिस्टम की ओर से उनकी पत्नी डॉ गीतांजलि जे आंग्मो की हैसियत पूछी जाने लगी। उन पर ये आरोप लगाए जाने लगे कि- सोनम वांगचुक ने राहुल गांधी का नुक़सान करने के लिए अनशन तोड़ दिया है। हिंसात्मक प्रोटेस्ट को जारी रखने के लिए यूथ को प्रोवोक किया जाने लगा। जो राहुल गांधी कहीं नहीं दिख रहे थे वो पूरा प्रोटेस्ट हाईजैक करने लगे? वामपंथी पत्रकार सौरभ दास, AAP के प्रवक्ता रहे आशुतोष रंका, AAP के सोशल मीडिया हैंडलर, स्ट्रेटजिस्ट रहे – अभिजीत दीपके के चेहरे मलिन होने लगे। ये सब डायरेक्ट और इन डायरेक्ट सोनम वांगचुक पर सवाल खड़े करने लगे। उन पर ये आरोप लगाने लगे कि- आपने केंद्रीय मंत्रियों के हाथों जूस पीकर अनशन क्यों तोड़ा? ऐसे ढेर सारे सवाल उन पर अराजकतावादी इकोसिस्टम दागने लगा।
अपने ऊपर हो रहे इन्हीं हमलों के चलते सोनम वांगचुक ने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि—“अभी जो मैं वीडियो बना रहा हूं वो थोड़ा हैरान, गम और गुस्से के साथ बना रहा हूं। मेरा वजन 11 किलो कम हो गया। लद्दाख के कड़कती ठंड से दिल्ली की तपती धूप में बैठकर ये सब करने के बाद क्या मुझे किसी के कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेनी होगी कि मेरा अनशन कितना पवित्र था?”
इतना ही नहीं आगे सोनम वांगचुक ने अराजकता फैलाने वाले इकोसिस्टम को लताड़ लगाते हुए कहा कि— “अगर मुझे सौदा करना होता तो क्या 26 दिन भूखे रहता। कितनों ने डील किया है। क्या वो इस तरह से डील करते हैं। आलीशान कमरे में बैठकर डील होती है।धिक्कार है ऐसे देश पर जहां ऐसे दिमागों की उपज होती है जिसमें से ऐसे नीच ख्याल निकलते हैं।”
यानी सोचिए कि जिस प्रोटेस्ट को सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के कारण पहचान मिली। अब इस प्रोटेस्ट में शामिल राजनीतिक और अराजकतावादी मानसिकता के लोग बौखला गए हैं? ये उन्हीं सोनम वांगचुक को कठघरे में खड़े कर रहे हैं, जिन्होंने इन्हें पहचान दी? इनकी ज़मीन तैयार की। ये इसलिए हो रहा है क्योंकि सोनम वांगचुक ने आखिर शिक्षा के सुधार के मुद्दे पर सरकार से सहमति क्यों जताई? ये इकोसिस्टम इसलिए भी बौखलाया है क्योंकि
सोनम वांगचुक ने एजुकेशन के मूल मुद्दे को सरकार के सामने क्यों एड्रेस किया? क्योंकि इनकी अराजकता फैलाने की मंशा पर पानी फेर दिया। इनके राजनीति हित कमजोर होते दिख रहे हैं।
इन सब बातों का अर्थ ये है कि—सोनम वांगचुक को ये इकोसिस्टम केवल अपने राजनीतिक हित साधने, खोई हुई ज़मीन तलाशने, हिन्दुत्व विरोध-मोदी विरोध के टूल के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता था। ऐसे में ये अराजकतावादी इकोसिस्टम सोनम वांगचुक को शहीद बना देना चाहता, जो हो नहीं पाया। ये मौत के सौदागर हैं, जो ये कर नहीं पाए।
ऐसे में अब इनके पास हिंसा, उपद्रव, अश्लीलता, गालीबाजी, हिंदू द्रोह के अलावा कुछ बचा नहीं है। सो, अब खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तर्ज़ पर अब ये सोनम वांगचुक पर अटैक कर रहे हैं। क्योंकि इस प्रहसन की किरदारों के पास शिक्षा, यूथ के लिए कुछ सकारात्मक करने की कोई सोच नहीं है।अब जब सुधार के सारे काम सरकार कर रही है, लगातार संवाद कर रही है।जो 20 मासूम बच्चों नहीं रह गए, उनके परिवार के साथ सरकार खड़ी है।
ऐसे में अराजकतावादी इकोसिस्टम ने जिस मूल मंशा से बाज़ार खड़ा किया है। वो फीका पड़ रहा है। क्योंकि जंतर-मंतर में लगातार हो रहे हिंदू आस्था के अपमान, हिंसा, उपद्रव, महिलाओं , पुलिस और पत्रकारों की Moblinching, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर अभद्रता, गालीबाज, अश्लीलता के चलते जनमानस की संवेदनाएं इनसे हट चुकी हैं।सबने इनके असली चेहरों को देख लिया है। इस अराजकतावादी इकोसिस्टम के पास अब छटपटाने के अलावा कुछ भी बचता नज़र नहीं आ रहा है।अब चारों ओर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियों, ढफली गैंग में हिस्सेदारी को लेकर जंग छिड़ी है। ऐसे में किसी न किसी तरीके से इस प्रहसन को खींचने की पूरी तैयारी है। क्योंकि सोनम वांगचुक का साथ छूटते ही इनका प्रोटेस्ट केवल प्रोटेस्ट के लिए बच चुका है। आम लोगों में और युवाओं, स्टूडेंट्स में जो भी सहानुभूति थी — वो सोनम वांगचुक के लिए देखने को मिली। ऐसे में जब ये अराजकतावादी इकोसिस्टम सोनम वांगचुक का सगा नहीं हुआ तो किसका सगा होगा? ये इकोसिस्टम ज़िंदा और मुर्दा दोनों परिस्थितियों में सिर्फ़ अपना शिकार ढूंढता है।इसे देश और समाज से कोई मतलब नहीं होता है। ये हम आप जितना जल्दी जान और समझ लें। ये उतना हमारे, समाज और राष्ट्र के लिए हितकारी होगा। अन्यथा हम आप केवल ट्रैप का शिकार होते रहेंगे।



