असम में भूमि आंदोलन पर कार्रवाई की गूंज दुनिया तक

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नव ठाकुरीया

गुवाहाटी। असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निकट प्रस्तावित पर्यटन परियोजना का विरोध कर रहे भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले की गिरफ्तारी ने स्थानीय विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। दुनिया के कई मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों ने डोले की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त करते हुए उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों की पैरवी करने वालों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

विवाद की शुरुआत तब हुई, जब असम सरकार ने UNESCO विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निकट इंगले पाथर क्षेत्र में लगभग 30 बीघा भूमि असम पर्यटन विकास निगम (ATDC) को आवंटित की। इस भूमि पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत एक लग्ज़री होटल और चाय बागान समुदाय की विरासत पर आधारित संग्रहालय विकसित करने की योजना है। सरकार का तर्क है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। दूसरी ओर, स्थानीय निवासियों और भूमि अधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भूमि का वर्गीकरण बिना पर्याप्त जनपरामर्श के बदला गया, जबकि कई परिवार पीढ़ियों से उस क्षेत्र में खेती करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि हाल के वर्षों में 60 बीघा से अधिक कृषि और सामुदायिक चरागाह भूमि का स्वरूप बदला गया है।

मिसिंग समुदाय से आने वाले सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता प्रणब डोले लंबे समय से प्रस्तावित हयात होटल परियोजना का विरोध कर रहे हैं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) से स्नातकोत्तर डोले का कहना है कि यह परियोजना स्थानीय समुदायों के पर्यावरण, आजीविका और पारंपरिक अधिकारों को प्रभावित करेगी। उन्हें 12 जुलाई को गुवाहाटी के सुंदरपुर स्थित किराये के घर से हिरासत में लिया गया और बाद में बोकाखाट पुलिस को सौंप दिया गया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जिनमें आपराधिक साजिश, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और धमकी जैसे आरोप शामिल हैं। अगले दिन उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस का आरोप है कि 29 जून को इंगले पाथर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान डोले प्रमुख आयोजकों में शामिल थे। शिकायत के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान निर्माण स्थल पर पहुंची भीड़ ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, कर्मचारियों को धमकाया और झड़प में दस से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। डोले के साथ उनके दो सहयोगी अमित नाग और ब्रिजित कुतुम को भी गिरफ्तार किया गया, जबकि भास्कर सैकिया और राजीव पेगू ने स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण किया। अदालत के आदेश के बाद सभी पुलिस हिरासत में हैं।

भूमि विवाद अब न्यायालय तक पहुंच चुका है। कई किसान परिवारों ने मुआवजा स्वीकार कर लिया है, लेकिन कुछ अब भी अपनी जमीन पर दावा कर रहे हैं। कम से कम 12 याचिकाकर्ताओं ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना उनकी भूमि अधिग्रहित कर ली गई। जून में उच्च न्यायालय ने इस मामले में असम पर्यटन विकास निगम को नोटिस जारी किया था। इसी दौरान डोले और अन्य लोगों की गिरफ्तारी का असम नागरिक सम्मेलन, असम मजूरी श्रमिक यूनियन, भूमि अधिकार आंदोलन और ऑल इंडिया किसान मजदूर सभा सहित अनेक संगठनों ने विरोध किया।

इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की। लंदन स्थित सर्वाइवल इंटरनेशनल ने कहा कि प्रस्तावित फाइव-स्टार होटल परियोजना से 45 से अधिक आदिवासी परिवार प्रभावित हुए हैं। संगठन की निदेशक कैरोलिन पियर्स ने आरोप लगाया कि काजीरंगा के आसपास की भूमि को निजी पर्यटन परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है और संरक्षण तथा पर्यटन को आदिवासी समुदायों के मौलिक अधिकारों से ऊपर रखा जा रहा है। उन्होंने डोले सहित सभी गिरफ्तार लोगों की तत्काल रिहाई की मांग की।

कोपेनहेगन स्थित इंटरनेशनल वर्क ग्रुप फॉर इंडिजिनस अफेयर्स (IWGIA) ने भी गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा कि यह मानवाधिकारों की पैरवी और शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का प्रयास प्रतीत होता है। फिलीपींस स्थित इंडिजिनस पीपल्स राइट्स इंटरनेशनल ने इसे आदिवासी भूमि अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों को अपराधी ठहराने की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा बताया।

अमेरिका के एरिजोना स्थित इंडिजिनस पीपल्स लॉ एंड पॉलिसी प्रोग्राम की इंडिजिनस राइट्स एंड प्रोटेक्टेड एरियाज़ इनिशिएटिव ने केंद्र और असम सरकार से डोले के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उन्हें कानूनी सहायता, परिवार और स्वतंत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की अपील की।

इसी तरह थाईलैंड स्थित एशिया इंडिजिनस पीपल्स पैक्ट, इंडिजिनस पीपल्स ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स नेटवर्क और प्लेटफ़ॉर्म फॉर एशिया इंडिजिनस पीपल्स टेरिटोरियल राइट्स ने भी गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

हाल ही में जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र के व्यवसाय और मानवाधिकार कार्य समूह ने भी डोले और चार अन्य लोगों की गिरफ्तारी पर चिंता जताई। विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार की गिरफ्तारियां नागरिक समाज की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती हैं और मानवाधिकार रक्षकों में भय का वातावरण पैदा कर सकती हैं। उन्होंने सरकारों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि मानवाधिकार रक्षक बिना प्रतिशोध या आपराधिक कार्रवाई के डर के अपना कार्य कर सकें।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे ने असम की राजनीति में हलचल पैदा की। असम कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने राज्य सरकार पर लोकतांत्रिक असहमति को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। विधायक अखिल गोगोई ने भी विधानसभा परिसर में प्रदर्शन कर आदिवासी समुदायों की भूमि से जुड़े मुद्दे को उठाया और सरकार की कार्रवाई की आलोचना की।

हालांकि, असम सरकार अपने फैसले का बचाव कर रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि प्रस्तावित पर्यटन परियोजना से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निहित स्वार्थ परियोजना का विरोध कर रहे हैं। स्थानीय विधायक एवं मंत्री अतुल बोरा ने भी कहा कि संबंधित भूमि सरकारी है और चाय बागान समुदाय की विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से संग्रहालय विकसित किया जा रहा है। उनके अनुसार, इस पहल को स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन प्राप्त है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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