अयोध्या :अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों के चढ़ावे और दान की राशि में कथित चोरी तथा गबन के आरोपों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। राम मंदिर का निर्माण लाखों स्वयंसेवकों और कारसेवकों की बलिदान की साधना का प्रतीक था, लेकिन अब दान-पेटियों से करोड़ों रुपये गायब होने के दावों ने आस्था पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। इस प्रकरण में ट्रस्ट के न्यासियों और पदाधिकारियों पर नैतिक जिम्मेदारी का बोझ बढ़ गया है, जिनसे त्यागपत्र की मांग जोर पकड़ रही है।
विवाद की शुरुआत इस माह की शुरुआत में हुई जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये का गबन हुआ है। पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने गंभीर खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि दान गिनने की प्रक्रिया में अनियमितताएं लंबे समय से चल रही थीं। उन्होंने चंपत राय और अन्य ट्रस्ट सदस्यों को सूचित किया था, लेकिन शिकायत के अगले दिन उन्हें पद से हटा दिया गया। महिपाल सिंह ने सीसीटीवी फुटेज डिलीट होने और सोने-चांदी-हीरे जैसी संपत्तियों में गड़बड़ी का भी आरोप लगाया।
ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारी और आरोप
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस पूरे प्रकरण में घेरे गए हैं। आरोप है कि 7 जून को कथित चोरी की घटना के बाद उन्होंने अन्य न्यासियों को सूचना नहीं दी। ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और परिसर प्रशासक गोपाल राव की भूमिका भी जांच के दायरे में है। विनय कटियार जैसे राम जन्मभूमि आंदोलन के नेता ने खुलकर कहा कि ‘सब चोर हैं’ और ट्रस्टियों की संलिप्तता की आशंका जताई।
ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं। स्थायी सदस्यों में महंत नृत्य गोपाल दास (अध्यक्ष), चंपत राय (महासचिव) आदि प्रमुख हैं। जांच में कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लवकुश मिश्रा (दान गिनने वाला कर्मचारी), रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव (चंपत राय के करीबी, पूर्व ऑटो ड्राइवर), उनके भतीजे मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, राजेश पाठक, केडी तिवारी, करुण और ऋतिक सिंह शामिल हैं। इनमें से कई के पास 18-20 हजार रुपये मासिक वेतन के बावजूद करोड़ों की संपत्ति, लग्जरी कारें, आईफोन और जमीनें पाई गई हैं।
जांच और बरामदगी
उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय SIT गठित की, जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। SIT ने अयोध्या पहुंचकर दस्तावेज खंगाले। लवकुश मिश्रा की गिरफ्तारी हुई और उनके घर से लगभग 10 लाख रुपये बरामद किए गए-कुछ अलमारी में, कुछ गोबर के ढेर में छिपाए गए। कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये नकद, सोना, कार और आईफोन जैसी वस्तुएं बरामद हुई हैं। करीब 50 कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। ट्रस्ट का दावा है कि 11 माह में 82.78 करोड़ रुपये दान प्राप्त हुए और ऑडिट में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं मिली, लेकिन विपक्ष और जनता इसे पर्याप्त नहीं मान रही।
न्यासियों के त्यागपत्र पर केंद्रित बहस
इस प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू न्यासियों की नैतिक जिम्मेदारी है। विपक्षी नेता, पूर्व सांसद और स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि जांच पूरी होने तक चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा समेत सभी संदिग्ध न्यासी और पदाधिकारी त्यागपत्र दे दें। महिपाल सिंह ने नाम लेकर कुछ ट्रस्टियों पर आरोप लगाए हैं। पवन पांडे और अवधेश प्रसाद जैसों ने कहा कि नैतिकता का रंच मात्र भी बचा हो तो पद छोड़ दें।
आरएसएस और हिंदू संगठनों के लिए यह बेहद चिंताजनक है। राम मंदिर आंदोलन में हजारों कारसेवकों ने प्राणों की आहुति दी। लाखों स्वयंसेवकों ने वर्षों साधना की। आज जब दान चोरी के आरोप लग रहे हैं, तो पदों पर बने रहना शर्मनाक माना जा रहा है। विनय कटियार ने कहा कि कल्यान सिंह जैसे लोग पद छोड़ देते थे; ऐसे लोग ट्रस्ट में जगह नहीं रख सकते।
नैतिक साहस की कमी?
सवाल उठ रहा है कि इतने गंभीर आरोपों के बीच न्यासी क्यों चुप हैं? चंपत राय बीमार पड़ गए, अनिल मिश्रा केरल चले गए-यह बचाव की रणनीति लग रही है। ट्रस्ट ने SIT मांगी है, जो सकारात्मक है, लेकिन स्वयं त्यागपत्र देकर जांच को निष्पक्षता का संदेश क्यों नहीं देते? जांच पूरी होने तक पद छोड़ना नैतिक कर्तव्य है। जिन्होंने चोरी की, वे पकड़े जाएंगे, लेकिन न्यास के सदस्यों में नैतिकता बची भी है या नहीं, यह बड़ी परीक्षा है।
राम मंदिर केवल ईंट-गारे का ढांचा नहीं, आस्था का प्रतीक है। यदि दान की एक-एक पाई का हिसाब साफ नहीं, तो करोड़ों भक्तों का विश्वास डांवाडोल हो जाएगा। SIT की रिपोर्ट 15 दिनों में आनी है। उसमें दोषी पाए गए किसी भी स्तर के व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, ट्रस्ट को पारदर्शिता बढ़ानी होगी-दान की राशि, व्यय और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं।
यह प्रकरण RSS की शताब्दी साधना को धत्ता बता रहा है। यदि न्यासी नैतिक साहस दिखाकर त्यागपत्र देते हैं, तो यह आंदोलन की पवित्रता बचाने का कार्य होगा। अन्यथा, आस्था के इस महान मंदिर पर हमेशा सवालिया निशान लग जाएगा। जांच सत्य उजागर करे और दोषियों को सजा मिले-यही भक्तों की अपेक्षा है।



