पुणे। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में नवी पेठ स्थित पुणे श्रमिक पत्रकार संघ की ओर से आयोजित विशेष वार्तालाप कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि “देश की नई पीढ़ी यानी ‘ज़ेन ज़ी’ (Gen Z) को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) बेहद आशान्वित है। आज के युवा अपनी परंपराओं और भारत के गौरवशाली इतिहास से जुड़े हुए हैं। समाज में सकारात्मक और रचनात्मक बदलाव लाने में यह पीढ़ी बहुत बड़ा योगदान दे रही है”।
आरएसएस के सभी वित्तीय व्यवहार केवल बैंकों के जरिए
संघ के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) को लेकर कतिपय राजनेताओं द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “संघ के विधि-सम्मत अस्तित्व को लेकर कोई कानूनी विवाद है ही नहीं; केवल तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए कुछ तत्वों द्वारा दिग्भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्णतः विधि-सम्मत और मान्यता प्राप्त सामाजिक संगठन है। यही कारण है कि स्वतंत्रता के पश्चात समय-समय पर सभी सरकारों ने विभिन्न राष्ट्रीय आपदाओं और रचनात्मक कार्यों में संघ का सक्रिय सहयोग लिया है। संघ के पथ संचलन को प्रशासन द्वारा नियमानुसार अनुमति प्राप्त होती है, इतना ही नहीं, हमारी स्थानीय शाखाओं के नाम पर बैंकों में अधिकृत खाते संचालित हैं। संघ का समस्त आर्थिक व्यवहार पूर्णतः पारदर्शी है और केवल बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से ही होता है। संघ अपनी दैनिक शाखा पद्धति के माध्यम से प्रतिदिन समाज के प्रति प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी (जवाबदेह) रहता है।”
वर्ष 1947 के दुर्भाग्यपूर्ण विभाजन का स्मरण कराते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि देश का बँटवारा भी ‘डेमोग्राफिक असंतुलन’ के कारण ही हुआ था। यदि भविष्य में पुनः किसी भूभाग में ऐसा असंतुलन पैदा हुआ, तो अखंड भारत की पहचान, सुरक्षा और सनातन संस्कृति को अक्षुण्ण रखना अत्यंत कठिन हो जाएगा। अतः भारतीय संस्कृति और राष्ट्रनिष्ठा को मानने वाले नागरिकों की बहुलता देश के प्रत्येक क्षेत्र और कोने में होनी अनिवार्य है।



