बाबा रामदेव को क्या सगे ही दे रहे धोखा: कैसे हुआ पतंजलि सिविल सर्विसेज अकादमी में सनातन-द्रोही अवध ओझा का प्रवेश

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हरिद्वार : स्वामी रामदेव जी हिंदू समाज के प्रेरणा स्रोत रहे हैं। योग, आयुर्वेद और स्वदेशी के माध्यम से उन्होंने राष्ट्र जागरण का अभियान चलाया है। लेकिन हाल ही में पतंजलि सिविल सर्विसेज अकादमी के शुभारंभ के साथ उनकी टीम में अवध ओझा का शामिल होना गंभीर सवाल खड़ा करता है। यह लेख तथ्यों पर आधारित है और रामदेव जी के शुभचिंतकों को सजग करने का प्रयास है।

अवध ओझा कौन हैं? यूट्यूब से राजनीति तक सफर

अवध ओझा (जिन्हें Ray Avadh Ojha के नाम से जाना जाता है) एक प्रोपगेंडाबाज यूट्यूबर और यूपीएससी कोच हैं। अब तक उकनी कोचिंग से पढ़कर कितने बच्चे आईएएस बने, इसकी कोई प्रामाणिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है। वे खुद को बकैत बोलते हैं और उनसे पढ़ने से अधिक उनकी बकैती में रूचि रखने वालों ने उन्हें सब्सक्राइब किया है। उनके यूट्यूब चैनल 9 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स वाला है। कोविड काल में ऑनलाइन क्लासेस के जरिए उन्होंने ख्याति कमाई। इलाहाबाद जैसे कोचिंग हब्स में पढ़ाने के बाद उन्होंने आईक्यूआरए आईएएस जैसी अपनी संस्था भी चलाई।

2024 में उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) जॉइन की। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में पटपड़गंज सीट से उम्मीदवार बने। परिणाम? भारी मतों से हार और जमानत जब्त। उनकी बकैती को जनता ने गंभीरता से नहीं लिया। बीजेपी प्रत्याशी रविंदर सिंह नेगी से वे 28,000+ वोटों से हारे। हार स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत हार है और वे जनता से नहीं जुड़ सके। बाद में उन्होंने राजनीति से संन्यास की घोषणा भी कर दी। उनके जाल में बाबा रामदेव कैसे फंस गए? या बाबा रामदेव किसी तरह की ठगी का शिकार हो गए हैं? क्योंकि रामदेव जी ने हाल ही में (जून 2026) पतंजलि योगपीठ में सिविल सर्विसेज अकादमी शुरू की और इसकी कमान जिस तरह अवध ओझा को सौंपी। यह फैसला कई सनातनी विचारकों को चौंकाने वाला लग रहा है।

ओझा की ऐतिहासिक दृष्टि: वामपंथ से भी आगे?

यह बात ओझा नहीं छुपाते कि उनकी दृष्टि वामपंथियों से भी अधिक विकृत, एकांगी और सनातन-विरोधी हैं। ओझा के कई वीडियो में हिंदू समाज, परंपराओं और मूल्यों पर तीखे प्रहार दिखते हैं।

ओझा ने इस्लाम के विस्तार को मुख्यतः ‘भाईचारे और एकेश्वरवाद’ का परिणाम बताया, जबकि ऐतिहासिक तथ्य आक्रामकता, जिहाद और राजनीतिक-धार्मिक विस्तार को प्रमुख कारक मानते हैं। उनके वीडियो में युवाओं में हिंदू संस्कृति के प्रति गौरव के बजाय हीनता का भाव पैदा होता है। एक वीडियो में वे इस्लाम की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि अंधकार के युग में इसने महिलाओं का सम्मान बढ़ाया, जबकि हिंदू समाज पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाते हैं।

तैमूर लंग, नादिरशाह और अब्दाली जैसे आक्रमणकारियों पर उनके विचार भी विवादास्पद रहे हैं। कुछ संदर्भों में वे इन आक्रमणों को सामान्य ऐतिहासिक घटनाओं की तरह प्रस्तुत करते दिखते हैं, जबकि भारतीय इतिहास में इनका उल्लेख मंदिर-विध्वंस, नरसंहार और सनातन संस्कृति पर हमले के रूप में है। एक इंटरव्यू में अकबर की तारीफ करते हुए उन्होंने तैमूर के आक्रमण का जिक्र किया, लेकिन संदर्भ सनातन परंपरा की रक्षा की बजाय अन्य दृष्टिकोण अपनाते दिखे।

गौतम बुद्ध जैसे महापुरुषों के लिए अपमानजनक शब्दों (अय्याश आदि) का इस्तेमाल और जातिसूचक शब्दों का उल्लेख उनकी क्लासेस में रिपोर्टेड है, जो उनकी मानसिकता को दर्शाता है।

सनातन विरोध की पैटर्न: तथ्य और उदाहरण

ओझा के वीडियो सीरीज ‘इस्लाम की पूरी कहानी’ या हिंदू-मुस्लिम तुलना वाले एपिसोड्स में हिंदू समाज को कलंकित करने वाले बयान मिलते हैं। वे हिंदू समाज में महिलाओं की स्थिति, जाति व्यवस्था आदि पर बार-बार प्रहार करते हैं, जबकि इस्लाम की ‘एकता’ और ‘ज्ञान’ की तारीफ करते हैं।

यह दृष्टि एनसीईआरटी की वामपंथी इतिहास-लेखन से मिलती-जुलती है, जहां आक्रमणकारियों को शासक दिखाया जाता है और प्रतिरोध को नजरअंदाज। सनातनी युवा, जो रामदेव जी की अकादमी में आएंगे, ऐसे गुरु से प्रेरणा लेकर सांस्कृतिक गौरव के बजाय संशय और हीनता ग्रस्त हो सकते हैं।

रामदेव जी की टीम में तिजारावाला जैसे मीडिया सलाहकार हैं। इस पृष्ठभूमि से अनजान नहीं हो सकते। फिर भी यह नियुक्ति कैसे हुई है?

पतंजलि अकादमी का सपना और खतरा

पतंजलि सिविल सर्विसेज अकादमी का उद्देश्य योग, नैतिकता और भारतीय ज्ञान परंपरा से युक्त आईएएस—आईपीएस तैयार करना है। रामदेव जी का संकल्प सराहनीय है। लेकिन यदि टीम में ऐसे व्यक्ति हों जिनकी मूल दृष्टि सनातन-विरोधी हो, तो नींव कमजोर हो जाती है।

रामदेव जी के पास अकूत संसाधन और योग्य टीम है। उन्हें चाहिए कि एक स्वतंत्र समिति ओझा के पूरे यूट्यूब आर्काइव, पुरानी क्लासेस और बयानों की समीक्षा करे।

रामदेव जी के शुभचिंतकों का आह्वान

स्वामी जी हिंदू समाज के ऋणी हैं। उन्होंने बाबा रामदेव ब्रांड को सनातन मूल्यों का प्रतीक बनाया है। ऐसे में ‘प्रचार के लिए ऐसे-वैसे को सारथि’ बनाने से बचना चाहिए।

सनातन संस्कृति की रक्षा केवल योग और आयुर्वेद से नहीं, बल्कि सही ऐतिहासिक दृष्टि और सांस्कृतिक गौरव से होती है। एक गलत गुरु पूरी पीढ़ी को प्रभावित कर सकता है।

संकल्प की शुद्धता जरूरी

रामदेव जी का सपना शुभ है, लेकिन नींव में यदि बुरे तत्व घुल गए तो सफलता संदिग्ध है। इतिहास गवाह है-जिस आंदोलन की नींव विकृत विचारों पर हो, वह लंबे समय तक टिक नहीं पाता।

स्वामी जी से अपील:
अपनी टीम को सनातन-समर्थक, प्रामाणिक इतिहासकारों और राष्ट्रवादी विचारकों से भरें। अवध ओझा जैसे विवादित व्यक्तियों को जिम्मेदारी सौंपने से पहले गहन जांच जरूरी है।

हिंदू समाज आप पर भरोसा करता है। इस भरोसे को बनाए रखें। सावधान रहें, सजग रहें, और सही निर्णय लें।

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