इसलिए भाजपा के “थिंक टैंक” (??) ने सोचा कि बाँकीपुर तो अब इतनी सुरक्षित सीट है कि यदि वहाँ से कुत्ता-बिल्ली किसी को खड़ा कर देंगे तो वह चुनाव जीत ही जाएगा! एक तरह से बाँकीपुर के मतदाताओं को यह बेइज्जती ही महसूस हुई होगी कि हम लोगों का प्रतिनिधि इतना गया-गुजरा बन सकता कि किसी को भी खड़ा कर दो तो वह जीत जाएगा!
बस यहीं से अक्खड़ किन्तु भाजपा के कमजोर उम्मीदवार से लाख गुना बेहतर प्रशांत किशोर जी को बाँकीपुर के मतदाताओं ने चुन लिया! अब यहाँ से PK यदि अपने अक्खड़पन को छोड़ आगे बढ़ जाए तो बिहार में भाजपा का तो फिलहाल नहीं, किन्तु एक मजबूत विपक्ष शनै: शनै: तैयार हो जाएगा और राजद की परिवारवादी राजनीति केवल उसके जातीय समर्थकों तक ही सीमित रह जाएगी! बाकी काम AIMIM कर देगी।
यदि भाजपा ने अब भी खुद को नहीं संवारा और मन ही मन कमजोर विपक्ष के कारण भविष्य में भी जीतने का सपना देखती रही तो आगे PK बिहार की राजनीती में पकड़ बना सकते हैं। इसलिए PK भी समझ रहे होंगे कि एक जो उनका काम है चुनावों में राजनीतिक दलों का मैनेजमेंट संभालना, या फिर अब विधायक बनने के बाद यहाँ से आगे निकल कर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को विस्तार देना, दोनों में कोई एक राह अब चुन ले!
व्यक्तिगत रूप से बाँकीपुर से अयोग्य भाजपा उम्मीदवार का हारना मुझे सुकून दे रहा क्योंकि यदि यह अयोग्य उम्मीदवार जीत जाता तो यह मतदाताओं की संकीर्णता को ही दर्शाता तथा भाजपा और Arrogant हो जाती! अच्छा हुआ हारी। स्वस्थ लोकतंत्र हेतु यह जरुरी है जब आप लोकतंत्र को अपनी दुकान समझने लगे तो!
ऐसा नहीं कि भाजपा कोई बहुत बेस्ट है… बस यह सभी खराबों में सबसे कम खराब है! वह भी इसलिए कि आज भी यही इकलौती पार्टी है जिसके हारने पर चीन और पाकिस्तान खुश होंगे बाकी विपक्षियों के साथ! मेरे लिए अपनी तमाम कमियों के बावजूद, सनद रहे, तमाम कमियों के बावजूद फिलहाल यह कामचलाऊ ठीक है बाकियों की तुलना में!
हालांकि पेपर लीक न रोक पाना, कोई भी भाजपा ज्वाइन कर लेने के बाद दूध का धुला हो जाना, योग्यता से ज्यादा अब यहाँ भी चाटुकारिता, धन एवं तीन-पांच पर जरुरत से ज्यादा बल देना, बाकी राजनीतिक दलों की तरह ही केवल चुनाव जीतने पर हद से ज्यादा Involve रहना इत्यादि इसकी बड़ी कमियाँ हैं।
बाकी जिनको लगता है कि राहुल गाँधी जी के डिंपल बनते गाल में इसलिए उनको PM होना चाहिए या भाजपा EVM के कारण जीतती है, तो उनकी बुद्धि पर तरस ही आता है! एक मजबूत योग्य विपक्ष होता तो भाजपा पिछला चुनाव ही हार जाती। पर विपक्ष का रद्दी होना और तुष्टीकरण का वाहक होना, भाजपा को वाकओवर दे जाता है!



