चरित्र हत्या भी हत्या ही है!

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-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
इंदौर। अगर आपके पास लायसेंस और बंदूक है तो क्या आप किसी को भी गोली मार देंगे?
– अगर आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस है और आप स्टेयरिंग संभाल रहे हैं तो क्या आप किसी को भी कुचल देंगे?
– अगर आपके पास चैनल है और आपके हाथ में माइक है तो क्या आप किसी को भी प्रॉस्टिट्यूट बता देंगे?
किसी को भी गोली मारने या कुचलने पर अपराधी के खिलाफ जो कार्रवाई होती है, वही एक्शन ग़लत खबर दिखाने वालों पर भी होनी चाहिए! अगर उस खबर से किसी के चरित्र पर उंगली उठाई जाने की आशंका हो तो कम से कम तीन या चार बार फैक्ट चेक करना ही चाहिए! आप पर नेशनल मीडिया का तमगा लगा हुआ है, तब तो जिम्मेदारी कई गुना ज्यादा हो जाती है!
कई बार तो पत्रकार खुद पार्टी बन जाते हैं और कई बार उन्हें ऊपर से आदेश आता है कि आप रिपोर्टिंग ना करो, प्रेस वार्ता में जाकर हंगामा करो या यह नैरेटिव सेट करने की नौटंकी करो! ऐसे मामलों में संपादक और मालिक जवाबदार क्यों नहीं है? किसी भी रिपोर्टर ने कोई खबर भेज दी और आपने दिखा दी! कोई क्रॉस चेक तक नहीं! आप पत्रकार हो?
हमें तो राजेन्द्र माथुर साहब और राहुल बारपुते साहब ने यह बात सिखाई थी कि अगर आप खुद अपनी आंखों से भी कोई घटना को देखो तो संबंधित पक्षों से इसकी पुष्टि करो उसके बाद ही खबर को छापने के लिए दो. वरिष्ठ उस खबर की पुष्टि एकाधिक स्रोतों से करते थे! तनख्वाह मामूली थी लेकिन जिम्मेदारी बहुत बड़ी! अब तनख्वाह बहुत बड़ी है और जिम्मेदारी लगभग शून्य!
🙏🙏
(1).
वी. एन. नारायणन ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के संपादक थे उनका एक कॉलम था – ‘फॉरएवर इन ट्रांसिट’. उन्होंने अपने एक लेख में संडे टाइम्स के संपादक ब्रायन एम्पल्यार्ड एक हिस्सा कॉपी कर लिया था. पायनियर अखबार के बी. एन. उन्नीयल ने इसे एक्सपोज़ किया. उन दिनों इंटरनेट का चलन इतना नहीं था. हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक नारायणन को इस्तीफा देना पड़ा! घटना शायद 1999 की है!
(2).
बीबीसी में भी पिछले साल एक गड़बड़ी की थी. 6 जनवरी 2021 को डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के वीडियो को इस तरह एडिट किया था कि ऐसा लगे कि ट्रंप हिंसा के लिए आह्वान कर रहे हों! लीक हुए आंतरिक मेमो से विवाद बढ़ा. बीबीसी के डायरेक्टर जनरल टिम डेवी और न्यूज़ के सीईओ डेबेरा टरनेस को इस्तीफा देना पड़ा. बीबीसी ने एडिटिंग के साथ की गई इस छेड़छाड़ के लिए माफी मांगी.
(3).
‘आनंद बाजार पत्रिका’ के संपादक अनिर्बन चट्टोपाध्याय को भी कोविड काल के दौरान मौतों के आंकड़ों को लेकर झूठी रिपोर्ट के मामले में इस्तीफा देना पड़ा था. ममता बनर्जी की सरकार ने उन पर ‘मिस इन्फ़ॉर्मेशन’का आरोप लगाया था. इससे ‘आनंद बाजार पत्रिका’ की साख को बट्टा लगा.
(4).
CNBC – TV18 में एडिटर टिमसी जयपुरिया ने एक रिपोर्ट दिखाई थी, जिसमें दावा किया गया था कि सरकार विदेशी यात्रा पर टैक्स /सेस /सरचार्ज लगाने पर विचार कर रही है. उसी रात को प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर इसे ‘पूरी तरह झूठ’ और ‘जरा भी सच्चाई नहीं’ बताते हुए खारिज कर दिया था. चैनल को तो अपनी स्टोरी तुरंत वापस लेनी पड़ी और माफी मांगनी पड़ी. जयपुरिया को ऑफलाइन कर दिया गया. कुछ दिनों में उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
(5).
द वायर में मेटा से जुड़ी एक सीरीज आई थी, उसमें दावा किया कि बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को मेटा की तरफ से खास सुविधाएं दी गई हैं. बाद में जांच हुई तो पता चला कि वायर में जो भी ईमेल आदि छपे थे, वे सब फर्जी निकले. वायर में माफी मांगी और कहा कि एक टीम के सदस्य ने धोखा दिया. संपादकीय टीम ने नैतिक जिम्मेदारी ली और संबंधित व्यक्ति को टीम से अलग कर दिया गया. हालांकि उसका इस्तीफा अभी नहीं हुआ है लेकिन उसे उस काम से हटा दिया गया है.
(6).
न्यू यॉर्क टाइम्स में एक रिपोर्टर था जेसन ब्लेयर. उसने दर्जनों स्टोरी फैब्रिकेटेड की. झूठे कोट्स छापे, जगह-जगह होने का दावा पेश किया. उसने यह भी दावा किया था कि वह स्नाइपर हमलों और इराक युद्ध में मौके पर था. जबकि वह न्यू यॉर्क में ही था. जांच हुई तो उसमें कम से कम 36 स्टोरी झूठी मिली. इसके बाद न्यूयॉर्क टाइम्स के एक्जीक्यूटिव एडिटर होवेल रेंस और मैनेजिंग एडिटर गेरोल्ड बॉयड ने इस्तीफा दे दिया. अखबार ने इसे अपने इतिहास का ‘लो पॉइंट’ बताया और सिस्टम की कमियां की मानी!
(7).
जर्मनी के एक अवॉर्ड विनिंग रिपोर्टर रेलोटियस ने स्टोरी फैब्रिकेटेड करके खूब नाम कमाया था. बाद में जांच में पता चला कि बंदे में ऐसी फर्जी कम से कम 14 स्टोरी बना दी थी जो प्रकाशित भी हुई. इस मामले के बाद में एक एडिटर इन चीफ और एक सेक्शन एडिटर को इस्तीफा देना पड़ा.कई संपादकों को भी हटा दिया गया.
***
नेहा सिंह राठौड़ कैसी लोक गायिका हैं – यह मुद्दा नहीं है. वे सरकार की समर्थक हैं या सरकार की विरोधी; यह भी मामला नहीं है. मामला यह है कि किसी को भी किसी के चरित्र पर अंगुली उठाने का अधिकार नहीं है.
यह भी आपराधिक मामला है! सभी ज़िम्मेदारों को हटाना चाहिए!

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