दूसरी बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ उन्होंने 23 मार्च, 2022 को ली थी। इस हिसाब से दूसरे कार्यकाल के पांच साल अगले साल 23 मार्च को पूरे होते हैं। लेकिन उससे पहले ही राज्य में विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाएंगे। इसलिए चार जुलाई को पूरे हो रहे पांच साल खास तौर पर महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
इन पांच वर्षों में उत्तराखंड में ऐसा बहुत कुछ घटित हुआ है, जिसकी पहले कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। चार जुलाई को लगातार शासन के पांच साल पूरे होने पर राज्य में बड़े खर्चीले तामझाम वाले कार्यक्रम आयोजित करने की बजाए धामी सरकार ने जनता की विशेष सेवा का संकल्प लिया है। इसके लिए चार जुलाई को सेवा पखवाड़े का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार के बैनर तले सेवा पखवाड़े की शुरुआत कर रहे हैं। इस दौरान 15 दिनों तक राज्य के सभी जिलों में जनसेवा कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में राज्य के निवासियों की सेहत की जांच के साथ ही सभी सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही जगह पर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी का मकसद सरकार को आम लोगों के और ज्यादा पास लाना है। यानी सरकार चाहती है कि योजनाओं का फायदा अंतिम व्यक्ति तक हर हाल में पहुंचे। यानी, अगर आप उत्तराखंड के निवासी हैं और किसी वजह से अभी तक आयुष्मान भारत कार्ड नहीं बनवा पाए हैं, तो चिंता मत करिए। अगर आप पात्रता रखते हैं, तो सेवा पखवाड़े के दौरान कैंप में जा कर यह कार्ड आसानी से बनवा सकते हैं।
इसी तरह सामाजिक सुरक्षा पेंशन, दिव्यांगजन कल्याण, राजस्व संबंधी मामलों का हल, विभिन्न प्रमाण-पत्रों से जुड़ी सेवाओं, महिला और बाल विकास, कृषि, उद्यान, पशुपालन, कौशल विकास, स्वरोजगार समेत दूसरी सभी सरकारी योजनाओं से जुड़ी सेवाएं आप तक इस दौरान खास तौर पर पहुंचाई जाएंगी। कुल मिलकर सरकारी विभागों से जुड़ी सभी समस्याओं का सिंगल विंडो समाधान सेवा पखवाड़े के दौरान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में वे उत्तराखंड की अप्रतिम सेवा कर पा रहे है। केंद्र सरकार को धामी सरकार पर पूरा भरोसा है। यही वजह है कि मोदी सरकार ने उत्तराखंड के लिए खजाना खोलते हुए एसएएससीआई योजना के तहत 2355 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। आइए, जानते हैं कि धामी सरकार के पांच साल के लगातार दो कार्यकालों में कौन से पांच काम ऐसे हुए, जो उत्तराखंड और देश के लिए ऐतिहासिक रहे हैं-
मदरसा बोर्ड का वजूद खत्म
गत एक जुलाई से ‘उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड’ का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया है। इसकी जगह अब ‘राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ ने काम शुरू कर दिया है। ऐसी व्यवस्था करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। खास बात यह है कि मदरसों समेत अब सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान एक ही दायरे में आ गए हैं। सभी पर एक समान नियम लागू होंगे।
समान नागरिक संहिता
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने राज्य में विवाह, तलाक और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए समान कानून लागू किया है। इससे मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को खास तौर पर सामाजिक सुरक्षा मिल रही है।
कड़ा नकल विरोधी कानून
उत्तराखंड में नौकरियों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून पास किया गया है। इसके तहत दोषियों पर भारी जुर्माना और उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई
राज्य में वन भूमि और सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर हजारों एकड़ जमीन खाली कराई गई है।
पर्यटन का रिकॉर्ड
राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास पर काफी ध्यान दिया गया है। ऑल-वेदर रोड का जाल बिछाया गया है। बेहतर प्रबंधन के जरिए चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। इसके अलावा होम-स्टे और शीतकालीन यात्रा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके अलावा देशी-विदेशी निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए उत्तराखंड की धानी सरकार ने पहली बार ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ का आयोजन किया। इसके माध्यम से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश की संभावनाएं बनी हैं। साथ ही, स्थानीय उद्योगों, एमएसएमई प्रोत्साहन, और पलायन रोकने के साथ ही राज्य में वापसी की दिशा में सरकार ने कई नई असरदार नीतियां लागू की हैं।
समय से पहले विधानसभा चुनाव
राज्य में समय से पहले चुनाव की अटकलें इस वजह से लगाई जा रही हैं, क्योंकि फरवरी, 2027 से राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा चरण शुरू होना है। इसके अलावा जनवरी 2027 से हरिद्वार में अर्द्धकुंभ मेला शुरू होना है। ऐसे में विधानसभा चुनाव, जनगणना और अर्धकुंभ के सफल आयोजन के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारियों की जरूरत कैसे पूरी होगी? ऐसे में या तो चुनाव पहले कराने पड़ेगे या फिर जनगणना का काम स्थगित करना होगा। अर्धकुंभ को तो टाला नहीं जा सकता।



