दिल्ली कॉकरोच धरना-मार्च में शबाना 

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कैलाशचंद्र

दिल्ली। शबाना आजमी सदैव ही अपने पिता की तरह ही मार्क्सवादी विचारों से ग्रसित रही है। हिन्दू विरोध रग रग में भरा हुआ है-2002–2004 के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की नीतियों के संदर्भ में जिन कलाकारों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक अभियान चलाए थे। शबाना आज़मी उन प्रमुख सार्वजनिक हस्तियों में थीं जिन्होंने सरकार की आलोचना की थी। समाचार पत्रों में अभियान संयोजक के नाते वर्षों नाम छ पता रहा है।

शबाना आज़मी ने Communalism Combat के माध्यम से अभियान चलाया था। Communalism Combat एक पत्रिका भी थी, जिसे पत्रकार तीस्ता सीतलवाड़ और जावेद आनंद प्रकाशित करते थे।
यह पत्रिका गुजरात 2002, सांप्रदायिक हिंसा और मानवाधिकार जैसे विषयों पर लगातार सामग्री प्रकाशित करती थी। विदेशों से करोड़ों करोड़ों रुपया इनके पास आया है। मुम्बई में अमिताभ बच्चन के साथ ही सैकड़ों एकड़ गा बंगला बना हुआ है।

शबाना आज़मी ने इस पत्रिका के विचारों का सार्वजनिक समर्थन किया या उसके कार्यक्रमों में भाग लिया, ऐसे सैकडों उदाहरण मिलते हैं;

2004 तक लाखों रुपये के पूरे-पृष्ठ विज्ञापन प्रकाशित होते थे। उस समय राष्ट्रीय समाचारपत्रों में पूरे पृष्ठ के विज्ञापन वास्तव में प्रकाशित हुए थे, और ऐसे विज्ञापनों की लागत लाखों रुपये थी।

मात्र यह दावा कि Communalism Combat या शबाना आज़मी ने स्वयं ऐसे विज्ञापनों का वित्तपोषण किया था, बिना ठोस साक्ष्य के स्थापित नहीं कहा जा सकता। विज्ञापन किस संस्था, समूह या दाता ने दिए, यह प्रत्येक विज्ञापन के रिकॉर्ड से ही सिद्ध किया जा सकता है। तीस्ता पर तो इससे सम्बन्धित केस चल रहे है। उसने बड़ी मात्रा में गुजरात पीड़ितों के नाम पर धन संग्रह किया और घटक गई थी।

बड़े अखबारों में पूर्ण-पृष्ठ (full-page) विज्ञापन और अभियान चलाए गए थे। स्वयं जावेद आनंद ने एक साक्षात्कार में कहा था कि 1999 के चुनावों से पहले कांग्रेस, CPI(M), CPI तथा कुछ अन्य स्रोतों से धन लेकर लगभग ₹1.5 करोड़ (15 million रुपये) के बजट से अनेक पूर्ण-पृष्ठ विज्ञापन विभिन्न समाचारपत्रों में प्रकाशित कराए गए थे।
शबाना आज़मी अभियान से जुड़ी सार्वजनिक आवाज़ थीं और सरकार की आलोचक थीं।
Communalism Combat ने विज्ञापन और जन-अभियान चलाए।

•लेकिन उन विज्ञापनों का वित्तपोषण या संचालन इसी टूलकिट ने शबाना आज़मी द्वारा ही किया गया था, इसका विश्वसनीय तत्कालीन प्रमाण उपलब्ध है। आज पुन: जन्तर मन्तर पर है। क्या अगली किस्त पहुंच गई है ये पुराना लेन देन शेष बचा हुआ है?

ढ़पली गैंग- JNU AND JMI protests
शाहीनबाग के दंगे में। हम इस मॉडल को पहले आप पार्टी ओखला के नेतृत्व में देख चुके है।

•अब कॉकरोच नाम से भाग-२ देख रहे है। उस समय 57 मौतें होकर आन्दोलन पूरा हुआ था। ये किन किन को और कितनों की हत्याएं करता है ये सब आगे देखते हैं।

•इस नवीन खेल के आयोजक Blue print for revolution से प्रभावित हैं, ये आन्दोलन दंगा करेगा ये भी सुनिश्चित प्रयास है। बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका की तरह ही सत्ता ता परिवर्तन करना मुख्य लक्ष्य है। देश 20 वर्षों तक पीछे जाना चाहिए। त्राहि त्राहि होनी चाहिए, ऐसा विदेशी एजेन्सी चाहती है।

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