अरुण मुखर्जी, राष्ट्रीय संयोजक, अखिल भारतीय बंग परिषद
नई दिल्ली, 17 अगस्त। अखिल भारतीय बंग परिषद के तत्वावधान में सोमवार को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित ‘स्वाभिमान समारोह’ में दिल्ली के बंगाली समाज ने माँ दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन को लेकर अपनी गहरी पीड़ा और चिंता एक स्वर में व्यक्त की। कार्यक्रम में स्पष्ट संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है, पर आस्था का अपमान स्वीकार्य नहीं। दिल्ली सरकार से संवाद कर शीघ्र व्यावहारिक समाधान निकालने की जोरदार माँग उठी।
समारोह में दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजकों, समितियों के पदाधिकारियों, सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। बंगाली समाज की सांस्कृतिक विरासत, दुर्गा पूजा की महत्ता और स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल के योगदान पर चर्चा के साथ सबसे संवेदनशील मुद्दा मूर्ति विसर्जन का रहा।
वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली के बंगाली समाज के लिए दुर्गा पूजा केवल त्योहार नहीं, बल्कि बेटी के घर आने का पावन अवसर है। दस दिनों तक माँ की सेवा-पूजा बेटी की तरह होती है। दसवें दिन बहते जल में विसर्जन हिंदू परंपरा का मूल है। लेकिन एनजीटी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के दिशानिर्देशों के कारण यमुना में विसर्जन प्रतिबंधित है। विकल्प में कृत्रिम तालाब या गड्ढे बनाए जाते हैं, जहाँ मूर्तियों को विसर्जित कर बाद में तोड़कर दफनाने जैसी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। इसे बंगाली समाज हृदय विदारक और आस्था पर प्रहार मानता है।
अखिल भारतीय बंग परिषद के राष्ट्रीय संयोजक अरुण मुखर्जी ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए कहा कि दिल्ली का बंगाली समुदाय वर्षों से इस पीड़ा को सह रहा है। माँ दुर्गा की मूर्ति का उचित विसर्जन न होना न केवल आस्था का अपमान है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान पर भी चोट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिषद का प्रतिनिधि मंडल इस विषय पर दिल्ली सरकार से संवाद चाहता है। आस्था और पर्यावरण दोनों का संतुलन संभव है। कृत्रिम तालाबों को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ और परंपरा के अनुरूप बनाने अथवा वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार जरूरी है, ताकि आगामी दुर्गा पूजा में माँ का विदाई समारोह गरिमापूर्ण हो।

कार्यक्रम में भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता भारती घोष, भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष एवं कालकाजी निगम पार्षद योगिता सिंह, त्रिपुरा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुबोल भौमिक, भाजपा नेता अशोक ठाकुर, अंतरराष्ट्रीय कवि एवं भाजपा प्रवक्ता गजेंद्र सोलंकी, हास्य कवि शंभू शिखर सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने मोबाइल फोन के माध्यम से संबोधित करते हुए माँ दुर्गा और काली की शक्ति, साहस और धर्म की विजय का संदेश दिया।
योगिता सिंह ने दिल्ली में बड़े स्तर पर दुर्गा पूजा आयोजनों को प्रोत्साहित करने और बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने इको-फ्रेंडली मूर्तियों के उपयोग और व्यवस्थित, पर्यावरण-सम्मत विसर्जन व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।

समारोह का संचालन डॉ. रूद्रेश नारायण मिश्रा और विनीत पांडेय ने किया। गजेंद्र सोलंकी की वीर रस की कविताओं और शंभू शिखर के हास्य-व्यंग्य ने माहौल को जीवंत बनाया। वक्ताओं ने नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, बंगाल की विरासत और सामाजिक एकता पर भी प्रकाश डाला।
अखिल भारतीय बंग परिषद के पदाधिकारी अरुण मुखर्जी, विभास रंजन मंडल, श्रीकृष्ण तेंदुधार, अजय बैरागी, सुब्रत मंडल, शिखा माथुर, सुशोभन बनर्जी, किशोर तरफदार आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने जोर दिया कि दिल्ली सरकार को बंगाली समाज की भावनाओं को समझते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। आस्था और व्यवस्था के बीच संतुलन समय की माँग है। अखिल भारतीय बंग परिषद का प्रतिनिधि मंडल इस संवेदनशील मुद्दे पर दिल्ली की मुख्यमंत्री से वार्ता करने के लिए तैयार है, ताकि आगामी दुर्गा पूजा से पहले व्यावहारिक समाधान निकल सके और माँ दुर्गा का विसर्जन गरिमा के साथ हो।



