जोधपुर (राजस्थान) : वर्ष 2015 में जब मैंने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में नौकरी शुरू करने के साथ जोधपुर एयरपोर्ट पर कार्यभार ग्रहण किया, उस समय इसकी संरचना वर्तमान स्वरूप से काफी भिन्न थी। उस समय यहां एक सीमित क्षमता वाला टर्मिनल भवन था। एप्रन ऐसा जहां एक समय में केवल दो विमान और एक एटीआर ही खड़े हो सकते थे। इतना ही नहीं ट्रॉली गेट से बड़े विमानों का आवागमन और संचालन पायलट की कुशलता और अत्यधिक सावधानी पर निर्भर करता था। यात्रियों की संख्या निरंतर बढ़ रही थी, किंतु उपलब्ध आधारभूत संरचना भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थी।

समय के साथ यह स्पष्ट रूप से अनुभव किया जाने लगा कि जोधपुर जैसे ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर को एक आधुनिक, विस्तृत और सक्षम टर्मिनल भवन की आवश्यकता है। इसी दृष्टिकोण ने नए टर्मिनल भवन की परिकल्पना को जन्म दिया। इस दिशा में सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना था।
कई चरणों में आयोजित बैठकों, तकनीकी विचार-विमर्श तथा विभिन्न सरकारी विभागों के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप भारतीय वायु सेना से लगभग 37 एकड़ भूमि प्राप्त करने का प्रस्ताव आकार लेने लगा। इस प्रक्रिया में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विशेष रूप से नागरिक उड्डयन मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, भारतीय वायु सेना, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, जिला प्रशासन जोधपुर, नगर निगम तथा अन्य संबंधित विभागों ने महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई।
लगातार प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 2017 के आसपास वह महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपन्न हुआ, जिसके अंतर्गत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को नए टर्मिनल भवन के निर्माण हेतु लगभग 37 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि जोधपुर के उड्डयन इतिहास में एक नए युग की शुरुआत थी।

भूमि उपलब्ध होने के पश्चात् भी विस्तृत योजना निर्माण, स्वीकृतियां, डिज़ाइन, तकनीकी परीक्षण तथा विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पर्याप्त समय लगा। अंततः वर्ष 2021 में परियोजना को अंतिम रूप प्रदान किया गया और निर्माण कार्य प्रारंभ करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। इसके पश्चात् वर्ष 2023 में नए टर्मिनल भवन का निर्माण कार्य औपचारिक रूप से प्रारंभ हुआ।
निर्माण के प्रत्येक चरण में आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता मानकों तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कार्य किया गया। समय-समय पर विभिन्न चुनौतियां भी सामने आईं, किंतु सभी संबंधित एजेंसियों के समन्वय, प्रतिबद्धता और सतत् प्रयासों के परिणामस्वरूप परियोजना निरंतर प्रगति करती रही।

इस संपूर्ण विकास यात्रा का प्रत्यक्ष साक्षी होना मेरे लिए अत्यंत गर्व और संतोष का विषय है। वर्ष 2015 में जिस सीमित संसाधनों वाले एयरपोर्ट से यह यात्रा प्रारंभ हुई थी, आज उसी स्थान पर एक आधुनिक, विशाल और अत्याधुनिक टर्मिनल भवन स्थापित है। यह परिवर्तन केवल आधारभूत संरचना का नहीं, बल्कि जोधपुर की बढ़ती संभावनाओं, प्रगति और नई उड़ान का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में जब भी कोई यात्री इस भवन से अपनी यात्रा प्रारंभ करेगा, वह अनजाने में ही उस लंबी विकास यात्रा का हिस्सा बनेगा जिसने जोधपुर को भारतीय नागरिक उड्डयन के मानचित्र पर एक नई पहचान प्रदान की है।



