दिल्ली । विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित उन दावों पर निर्वाचन आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है, जिनमें कहा जा रहा है कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में बदलाव कर दिया गया है। आयोग के अनुसार, Form-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार SIR के दौरान जारी आदेश में Declaration Form की भी व्यवस्था की गई है। मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए Declaration Form को Form-6 की प्रक्रिया के साथ जोड़ा गया है, ताकि मतदाताओं को अलग-अलग प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े और दो बार OTP सत्यापन की आवश्यकता न हो।
आयोग का कहना है कि SIR का आदेश मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से जारी किया गया था। ऐसे में SIR से संबंधित इस व्यवस्था को किसी एक अधिकारी का व्यक्तिगत निर्णय बताना सही नहीं होगा।
Supreme Court में भी उठा था SIR की वैधता का सवाल
SIR की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के अधिकार को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। 27 मई 2026 को दिए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR कराने की निर्वाचन आयोग की शक्ति और अपनाई गई प्रक्रिया की जांच की। न्यायालय ने Article 324 और Representation of the People Act, 1950 की Section 21(3) के संदर्भ में आयोग के अधिकार पर विचार किया और SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज किया।
हालांकि, इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि SIR के तहत किसी व्यक्तिगत कार्रवाई को चुनौती नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने प्रक्रिया में नोटिस, सुनवाई और अपील जैसे सुरक्षा उपायों के महत्व को भी रेखांकित किया।
ऐसे में Form-6 से जुड़े दावों की वास्तविकता समझने के लिए मूल Form-6, SIR Order और Declaration Form—इन तीनों को साथ रखकर देखना अधिक उचित होगा।
सोशल मीडिया के दावे में Form-6 में बदलाव करने की बाद गलत है



