CA (Dr.) Ramawatar Kila Honoured with the Vishisht Bhamashah Samman 2026

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Jaipur: CA (Dr.) Ramawatar Kila, Chairman of Perfect Group and President of Rajasthan Foundation, Delhi Chapter, has been conferred with the prestigious Vishisht Bhamashah Samman 2026 by the Department of Education, Government of Rajasthan, in recognition of his exceptional contribution to the fields of education and social service. The award was presented at the State-Level Bhamashah Samman Ceremony 2026 held at the Birla Auditorium, Jaipur.This year, only 23 distinguished individuals from across the State were selected for the Vishisht Bhamashah Samman, making this recognition a matter of great pride for society and the Rajasthani diaspora.

The ceremony was presided over by Shri Madan Dilawar, Hon’ble Minister for Education, Government of Rajasthan, while Dr. Prem Chand Bairwa, Hon’ble Deputy Chief Minister of Rajasthan, graced the occasion as the Guest of Honour. The event recognised philanthropists and individuals who have made remarkable contributions towards education and social welfare.

Dr. Kila received this honour for his continued contribution towards the development of Rajasthan, his support to the education sector, his efforts in connecting the Rajasthani diaspora with social causes, and his dedicated service towards students, patients, and underprivileged families.

For Dr. Kila, social service has always been a lifelong commitment. For over three decades, he has been actively contributing to the MYM initiative, under which a student hostel is operated in Delhi for students from Rajasthan. The hostel provides accommodation, meals and guidance, enabling students to pursue quality education in a safe and supportive environment.

For over two decades, he has also been actively supporting patients from Rajasthan who travel to Delhi for specialised medical treatment. His initiatives include arranging accommodation and meals for patients and their attendants, as well as extending support by providing free medicines to those in need.

Since 2017, Dr. Kila has been associated with BDSN Akshay Seva, through which free meals are served outside major hospitals in Delhi. More than 2,000 people are provided with free meals every day under this initiative, benefiting patients, attendants and other needy individuals.

On receiving the honour, Dr. Kila expressed his heartfelt gratitude to the Government of Rajasthan, the Department of Education, the dignitaries present at the ceremony, and all his well-wishers. He said that the award is a matter of immense honour and inspiration for him and reaffirmed his commitment to continue working for education, social service and the welfare of those in need.

The Vishisht Bhamashah Samman 2026 is not only a recognition of Dr. Kila’s individual contribution but also a proud moment for the Rajasthani diaspora, social workers, philanthropists and everyone working towards the causes of education and humanitarian service.

Heartiest congratulations and best wishes to CA (Dr.) Ramawatar Kila on being conferred with the prestigious Vishisht Bhamashah Samman 2026.

जब न्याय की प्रतीक्षा प्रतिशोध में बदल जाती है: दो फिल्मों के बहाने समाज के आक्रोश की पड़ताल

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कैलाश चन्द्र

रायपुर : सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होता। कई बार वह समाज के भीतर वर्षों से सुलग रहे आक्रोश, असुरक्षा, न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास और मानवीय संवेदनाओं को इस तरह पर्दे पर उतार देता है कि दर्शक केवल कहानी नहीं देखता, बल्कि स्वयं को उसके भीतर खड़ा हुआ महसूस करता है।

हाल में चर्चित फिल्म ‘धुरंधर’ और विवादों में रही ‘Citizen Vigilante’ इसी श्रेणी की फिल्में हैं। दोनों की पृष्ठभूमि अलग है, पात्र अलग हैं और सामाजिक संदर्भ भी भिन्न हैं, लेकिन एक प्रश्न दोनों के केंद्र में समान रूप से उपस्थित है—यदि पीड़ित को न्याय मिलने की आशा समाप्त हो जाए, तो उसके भीतर जन्म लेने वाले प्रतिशोध को क्या केवल अपराध कहकर समझा जा सकता है?

पीड़ा की पराकाष्ठा और एक भाई का आक्रोश

‘धुरंधर’ में घटनाएँ उस समय निर्णायक मोड़ लेती हैं, जब एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार के गुंडे नायक जस्सी के परिवार को बर्बाद कर देते हैं। पिता की हत्या, बहनों पर अत्याचार और छोटी बहन का अपहरण—इन घटनाओं के बाद जस्सी प्रतिशोध के मार्ग पर चल पड़ता है।

फिल्म में हिंसा के अनेक दृश्य हैं, किंतु उनका उद्देश्य केवल रक्तपात दिखाना नहीं, बल्कि उस मानसिक स्थिति को उकेरना है जिसमें एक व्यक्ति अपने भीतर बची हुई समूची संवेदना खो बैठता है।

फिर भी फिल्म का सबसे मार्मिक क्षण हिंसा नहीं, बल्कि वह दृश्य है जब जस्सी अपनी बंधक बनाई गई छोटी बहन तक पहुँचता है। भाई को देखते ही बहन की दबाई हुई चीखें और टूटता हुआ साहस उस दर्द को व्यक्त कर देता है जिसे किसी संवाद की आवश्यकता नहीं होती।

इसी प्रकार अदालत से बाहर आने के बाद जस्सी का अपनी माँ से कहना—”फौज में मरता तो शहीद कहलाता”—और माँ का उसे गले लगाकर “मेरा फौजी बच्चा” कहना, फिल्म के सबसे भावनात्मक दृश्यों में शामिल हो जाता है। यह दृश्य बताता है कि कानून और समाज का निर्णय अपनी जगह है, लेकिन माँ की दृष्टि में उसका बेटा अब भी वही बच्चा है, जिसे उसने अपने संस्कारों के साथ बड़ा किया था।

जब व्यवस्था पर भरोसा टूटने लगे

दूसरी ओर, ‘Citizen Vigilante’ न्याय व्यवस्था से उपजी निराशा को एक अलग सामाजिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है। कहानी एक नाबालिग पीड़िता के साथ हुए जघन्य यौन अपराध से आरम्भ होती है। न्यायालय द्वारा आरोपियों को सुधार का अवसर दिए जाने के बाद फिल्म का केंद्रीय पात्र स्वयं न्याय करने का मार्ग चुनता है।

फिल्म में वह केवल अपराधियों से ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और उनकी सोच से भी प्रश्न करता है। अपराध, सांस्कृतिक टकराव, प्रवासन, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषय कथा के माध्यम से सामने आते हैं।

यद्यपि फिल्म का वैचारिक दृष्टिकोण अत्यंत स्पष्ट है और कई समीक्षकों ने इसे एकतरफा तथा विवादास्पद माना है, फिर भी यह पश्चिमी समाज के एक वर्ग में मौजूद उस असंतोष को अभिव्यक्त करती है, जो अपराध और न्याय व्यवस्था को लेकर लगातार बढ़ता दिखाई देता है।

सिनेमा का प्रश्न, समाज का उत्तर

इन दोनों फिल्मों की सबसे बड़ी समानता यह है कि इनके नायक स्वयं को व्यवस्था द्वारा असहाय महसूस करते हैं। जब संस्थाओं पर विश्वास कमजोर पड़ता है, तब प्रतिशोध उन्हें न्याय का विकल्प दिखाई देने लगता है।

यही कारण है कि दर्शक कई बार पात्रों के क्रोध को समझ तो लेता है, भले ही उनके तरीकों से सहमत न हो।

सिनेमा का कार्य केवल समाधान देना नहीं, बल्कि कठिन प्रश्नों को समाज के सामने रखना भी है। ‘धुरंधर’ और ‘Citizen Vigilante’ यही करती हैं। वे दर्शकों को यह सोचने के लिए विवश करती हैं कि न्याय केवल अदालतों का विषय नहीं, बल्कि समाज के नैतिक विश्वास का भी आधार है।

निष्कर्ष

प्रतिशोध की कहानियाँ सदैव आकर्षित करती रही हैं, क्योंकि वे मनुष्य की सबसे तीव्र भावनाओं—दर्द, अपमान, क्रोध और न्याय की आकांक्षा—को एक साथ सामने लाती हैं। किंतु वास्तविक जीवन में न्याय और प्रतिशोध के बीच का अंतर बनाए रखना ही किसी सभ्य समाज की पहचान है।

इसीलिए ऐसी फिल्मों को केवल एक्शन या हिंसा के चश्मे से नहीं, बल्कि उस सामाजिक मनोविज्ञान के दस्तावेज़ के रूप में भी देखा जाना चाहिए, जो व्यवस्था से निराश लोगों के मन में उठ रहे प्रश्नों और आक्रोश को अभिव्यक्ति देता है।

( लेखक सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ स्तंभकार हैं)

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए देशभर में शुरू हुआ नुक्कड़ नाटक ‘बधाई हो बधाई’

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 लगभग 200 जिलों में होगा मंचन, रूफटॉप सोलर अपनाने और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति नागरिकों को करेगा जागरूक

नई दिल्ली, जून 2026: स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा नागरिकों को नवीकरणीय ऊर्जा के लाभों से अवगत कराने के उद्देश्य से देशभर में ‘बधाई हो बधाई’ नामक एक विशेष नुक्कड़ नाटक अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
जून 2026 के दौरान देश के लगभग 200 जिलों में प्रस्तुत किए जा रहे इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों तक रूफटॉप सोलर और इसके लाभों की जानकारी सरल, रोचक और प्रभावी तरीके से पहुंचाई जा रही है।
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना को प्रोत्साहित करना और इसके लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। यह योजना नागरिकों को बिजली के खर्च में कमी लाने के साथ-साथ देश को स्वच्छ, हरित और ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देने का अवसर प्रदान करती है।
नुक्कड़ नाटक की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका बिजली बिल शून्य आया है। पड़ोसी उसे बधाई देने पहुंचते हैं और यह जानने की उत्सुकता जताते हैं कि आखिर यह कैसे संभव हुआ। बातचीत के दौरान उन्हें पता चलता है कि उसने पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घर पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया है, जिससे उसका बिजली खर्च लगभग समाप्त हो गया है।
हास्य, गीत-संगीत और जीवंत संवादों से भरपूर यह प्रस्तुति योजना के प्रमुख लाभों को सरल और मनोरंजक तरीके से दर्शकों तक पहुंचाती है। नाटक यह संदेश देता है कि यह योजना न केवल बिजली बिल कम करने में सहायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
‘बधाई हो बधाई’ को इस प्रकार तैयार किया गया है कि दर्शक मनोरंजन के साथ-साथ उपयोगी जानकारी भी प्राप्त करें। स्थानीय भाषा, सहज संवाद और सहभागिता आधारित प्रस्तुति इसे सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षक और यादगार बनाती है।
इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों के बीच रूफटॉप सोलर को लेकर जागरूकता बढ़ाना तथा अधिक से अधिक परिवारों को पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना है। जमीनी स्तर पर समुदायों तक पहुंचकर यह पहल भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को गति देने और सतत विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योजना से संबंधित अधिक जानकारी, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया के लिए नागरिक पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अजीत कुमार हरिजन ने बीस महीने में बटोर लिए करोड़ों

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गंगा महतो

पटना। आप है अजीत कुमार हरिजन जी। आप बीपीएससी की कठिन परीक्षा पास करके डीपीओ जैसे पद पे प्रतिष्ठित हुए। आपकी नौकरी को अभी मात्र 32 महीने हो रहे है।

आप वर्तमान में छपरा जिले में पदस्थापित है। आपने 32 महीनों में बिहार की सेवा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। जैसा आपने नौकरी ज्वाइन करने के पूर्व तमाम इंटरव्यू और मॉक इंटरव्यू में कहा था उन सभी को आप अक्षरशः पालन किये है।

32 महीनों में आपने राज्य के करदाताओं के बेनामी पैसे जो इधर-इधर बिखरे पड़े थे उसको एक जगह एकत्रित करने में आपने मिसाल पेश किया है। आपके 12 महीने तो प्रोबेशन में ही चला गया होगा, तो आपने मात्र 20 महीनों में जो अतुलनीय कार्य किया है वो बिहार के प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र में कई युगों तक प्रेरणा के स्रोत बन कर युवाओं को आत्मबल प्रदान करता रहेगा।

अपने तकरीबन 2.5 साल में छपरा में इधर-उधर बिखरे 2.51 करोड़ रुपये को एक जगह एकत्रित किया और उसको लीगलाइज किया। और इस एकत्रित लीगल धनराशि का प्रयोग आपने अपने परिवार के बेहतरी के लिए खर्च किया। आखिर एक आदमी दिन-रात खून पसीना,मुड़ी का गोदी जला कर पठन-पाठन क्यों करता है भला ? अपनी बेहतरी के लिए ही न ? अपने उज्जवल भविष्य के लिए ही न ? तो अजीत हरिजन जी ने भी यही किया।

32 महीनों में बिहार सरकार ने इनको कुल 27,43,040/- रुपये वेतन के रूप में दिए। वहीं अजीत कुमार हरिजन जी ने अपनी विलक्षण प्रतिभा व विशिष्ट मस्तिष्क का परिचय देते हुए कुल 2,51,06,562/- रुपये कमाए।

लेकिन वो कहते है न कि आपकी तरक्की से कोई जले या न जले आपके जात-भाईयों की सबसे ज्यादा जलती है और जलन उस स्थान विशेष में ज्यादा प्रज्वलित होती है जहाँ सूर्य की किरणें पहुँचती नहीं है। एक व्यक्ति जिनका नाम श्री रवि कुमार राम है उन्होंने इनकी द्रुतगति से दौड़ते रथ में रोड़ा अटकाने का कार्य किया।

श्री रवि कुमार राम जी अजीत कुमार हरिजन जी के पास गए और बोले कि मालिक आप तो अपने जात-भाई है तो तनी कृपा हमारे ऊपर भी बरसा दीजिये न.. तनिक हम भी कुछ पेट पोसने लायक कमा ले।

तो अजीत हरिजन जी ने कहा कि तुमको हम शिक्षा विभाग में वेंडर का कार्य दिला देंगे.. लेकिन कुछ न्यौछावर करना पड़ेगा.. तुम अपने जात-भाई हो तो ज्यादा नहीं 12.50 लाख रुपये दे देना, तुम्हारा वेंडर पक्का।
श्री रवि कुमार राम जी ने तीन किस्तों में 10.70 लाख रुपये नकद और डीपीओ साब के परिवार और रिश्तेदारों के खातों में 1,03,480 रुपये डिजिटल माध्यम से भेजे… शेष 16,520 रुपये का भुगतान नहीं किया गया!!

श्री अजीत कुमार हरिजन जी हिसाब के बड़े पक्के आदमी थे.. यूं ही परीक्षा पास करके थोड़े न डीपीओ बन गए थे ? अभी भी 16,520/- रुपये बाकी थे। पेमेंट नहीं हुआ था। तो वेंडर का काम नहीं दिए रवि कुमार राम जी को।
इस बाबत जब रवि बाबू जवाब मांगे तो अजीत हरिजन बाबू कहने लगे कि ज्यादा जवाब मत मांगो, नहीं तो सारण समेत अन्य जिलों में जो तुम्हारा वेंडरगिरी चल रहा है न वहां से ब्लैकलिस्ट करवा देंगे। समझा ?

अब आ गया रवि राम जी को गुस्सा.. बोले साला अब रवि का ताप दिखाना पड़ेगा अजीत बाबू को….!
रवि राम बाबू लोक शिकायत निवारण कोषांग में शिकायत कर दिए.. कि साहब हमसे वेंडर का कार्य दिलाने के बहाने 12.50 लाख रुपये लिए और अब लौटा नहीं रहे है और न कार्य दे रहे है। इसकी कमाई से ज्यादा इसके पास संपत्ति है.. अभिये अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर एकमा प्रखंड में करीब छह बीघा नौ कट्ठा आठ धुर जमीन लगभग 41.50 लाख रुपये में खरीदी की है। इसकी जांच की जाय और हमारे साथ न्याय भी।

तब डीडीसी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई.. जिसमें जांच पड़ताल के बाद पाया गया कि श्री अजीत कुमार हरिजन जी अपनी प्रशासनिक सेवा के 2.5 साल में 2.51 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व कलेक्शन किया है। जिसके बाद गठित समिति ने इनकी भरी-भूरी प्रशंसा की है और कहा कि बिहार को ऐसे ही ऑफिसर्स की जरूरत है। ऐसे ऑफिसर्स को वर्ष 2027 के बिहार रत्न के लिए नामित भी करना चाहिए।

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