चलाना होगा तंबाकू से मुक्ति का अभियान …

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कृष्णमुरारी तिवारी अटल

प्रदेश में राष्ट्रव्यापी तम्बाकू निषेध दिवस चलाया जा रहा था‌। तम्बाकू के कारण होने वाली बीमारियों से बचने और तम्बाकू छोड़ने के लिए समाज में जागरुकता लाने के लिए विविध प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम सरकारी स्तर पर जारी थे। इसी सिलसिले में नुक्कड़ नाटकों, विचार गोष्ठियों, पेंटिंग्स ,दीवार लेखन के माध्यम से तंबाकू छोड़ने के कार्यक्रम प्रचारित- प्रसारित किए जा रहे थे। शासन के निर्देशानुसार इसके लिए जिले में ‘विरोध कुमार’ को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। वो जिले भर में विभिन्न कार्यक्रम तय कर रहे थे। इसी तारतम्य में मंचीय सभा के उद्बोधन के लिए उन्हें एक बड़े कार्यक्रम में स्पीच देनी थी। इसके लिए उन्होंने खूब तैयारी की। तम्बाकू और उससे जुड़े मादक पदार्थों, धूम्रपान छोड़ने की तकनीक, दुष्प्रभावों के विषय में उन्होंने झन्नाटेदार रिसर्च की।कई दिनों की मेहनत के बाद आखिरकार उन्होंने फाइनल स्पीच के लिए जानदार-शानदार स्क्रिप्ट तैयार ही कर ली।

अगले दिन कार्यक्रम के लिए – ‘विरोध कुमार’ अपने काफिले के साथ तय कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हो चुके थे। शअपनी गाड़ी में विरोध कुमार और उनका ड्राइवर संयोग प्रसाद केवल दो ही व्यक्ति थे।अपनी नियमित आदत के अनुसार विरोध कुमार ने सिगरेट के पैकेट से एक सिगरेट निकाली। लाइटर से सुलगाकर सिगरेट के कश लेने लगे। कार्यक्रम स्थल कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही था- अचानक उन्हें ध्यान आया तो वे अपने भाषण की स्क्रिप्ट पढ़कर ड्राइवर को सुनाने लगे। इस बीच उनकी वह सिगरेट बुझ चुकी थी। सिगरेट का कोई नया पैकेट भी नहीं बचा था कि जिससे वो नई सिगरेट निकालकर पी लेते थे। कुछ दूर आगे बढ़ने पर उन्हें पास में ही एक पान की गुमटी दिखी। उन्होंने ड्राइवर से कहा- संयोग ,जाओ फला ब्रॉण्ड की सिगरेट का एक पैकेट ले आओ। उसमें मजा नहीं आया। संयोग प्रसाद ने गाड़ी रोकी और झटपट साहब के ब्रॉण्ड की सिगरेट ले आया। फिर क्या था-विरोध कुमार ने दूसरी सिगरेट निकाली और उसके कश में मशगूल होते हुए स्पीच की प्रैक्टिस करने लगे। कार्यक्रम स्थल नज़दीक ही था कि — विरोध कुमार के भाषण की स्क्रिप्ट से प्रभावित होकर – ड्राइवर संयोग ने कहा : सर अगर आप बुरा न मानें तो एक प्रश्न पूछूँ?

हाँ, नि:संकोच पूछो ,संयोग

सर, सिगरेट की तम्बाकू से कोई बीमारी नहीं होती है क्या? क्या सिगरेट पीना फायदेमंद है?

बिल्कुल सिगरेट से भी कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं।इसीलिए इसके बाहर गले के कैंसर की फोटो लगी रहती है।साथ ही ये भी लिखा रहता है कि – Smoking Causes Throat Cancer। इतना ही नहीं कई पैकेट्स में तो Tobacco Causes painful death भी लिखा रहता है।

तो सर फिर आप सिगरेट..! कहकर संयोग ने अपनी बात पूरी करते हुए गाड़ी खड़ी की। विरोध कुमार अपने ड्राइवर के इस प्रश्न से झेंप गए और निरुत्तर होके सभास्थल की ओर बढ़ चले।उस दिन विरोध कुमार मंच से तम्बाकू निषेध पर भले ही लम्बा चौड़ा भाषण दे रहा था लेकिन संयोग प्रसाद के प्रश्न ने उसे गहरी आत्मग्लानि से भर दिया था । कार्यक्रम ख़त्म होने के बाद भी वो अपने ड्राइवर से नज़रें नहीं मिला पा रहा था।

कपिल शर्मा शो और नेटफ्लिक्स पर हिंदी कंटेंट का गिरता स्तर

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मुम्बई। कपिल शर्मा शो, जो कभी भारतीय टेलीविजन का सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो था, आज नेटफ्लिक्स पर अपनी चमक खोता नजर आ रहा है। हाल ही में क्रिकेटर गौतम गंभीर के साथ वाला एपिसोड इसका जीता-जागता उदाहरण है। इस एपिसोड में न तो हास्य था, न ही चुटीले संवाद। दर्शकों को लगा कि प्रोडक्शन टीम केवल बड़े चेहरों के भरोसे शो चला रही है, यह सोचकर कि नामी हस्तियां बुलाने से दर्शक कुछ भी देख लेंगे। लेकिन यह रणनीति अब उलटी पड़ रही है। नेटफ्लिक्स के साथ जुड़ने से शो को भले ही आर्थिक मजबूती मिली हो, लेकिन कंटेंट की गुणवत्ता में भारी कमी आई है।

कपिल शर्मा शो की यह समस्या केवल इस शो तक सीमित नहीं है; यह नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध हिंदी कंटेंट की व्यापक गिरावट का हिस्सा है। एक समय था जब हिंदी सिनेमा और टीवी शो अपनी कहानियों, संवादों और किरदारों के दम पर दर्शकों का दिल जीतते थे। लेकिन आज नेटफ्लिक्स पर अधिकांश हिंदी कंटेंट औसत दर्जे का है। चाहे वह वेब सीरीज हो या स्टैंड-अप कॉमेडी, ज्यादातर शो में गहराई, मौलिकता और रचनात्मकता की कमी साफ दिखती है। नेटफ्लिक्स पर हिंदी कंटेंट में अक्सर दोहराव, कमजोर स्क्रिप्ट और जबरदस्ती का हास्य देखने को मिलता है, जो दर्शकों को निराश करता है।

इसका परिणाम यह हुआ है कि नेटफ्लिक्स के हिंदी दर्शक अब धीरे-धीरे अंग्रेजी कंटेंट की ओर रुख कर रहे हैं। अंग्रेजी शो और फिल्में, चाहे वह “Stranger Things” हो या “The Crown”, अपनी मजबूत कहानी, बेहतरीन प्रोडक्शन और गहन किरदारों के लिए सराही जाती हैं।

इसके विपरीत, हिंदी कंटेंट में ज्यादातर सतही कहानियां और घिसे-पिटे फॉर्मूले देखने को मिलते हैं। डेटा भी इस बदलाव की पुष्टि करता है—नेटफ्लिक्स के भारतीय सब्सक्राइबर्स में हिंदी कंटेंट की खपत में कमी आई है, जबकि अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट की मांग बढ़ रही है।

कपिल शर्मा शो और हिंदी कंटेंट को फिर से प्रासंगिक बनाने के लिए प्रोडक्शन टीम को मौलिकता और गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा। दर्शक बड़े चेहरों से ज्यादा अच्छी कहानियों और हास्य की तलाश में हैं।

यदि नेटफ्लिक्स हिंदी कंटेंट के स्तर को नहीं सुधारेगा, तो भारतीय दर्शकों का भरोसा और भी कम होगा, और वे अन्य प्लेटफॉर्म्स या भाषाओं की ओर पूरी तरह मुड़ जाएंगे।

सड़क से जुड़ी विसंगतियां

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राकेश दुबे

दिल्ली । हाल के वर्षों में भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों व एक्सप्रेस-वे आदि का आशातीत विस्तार हुआ है। सड़कों के नेटवर्क सुधार से उपभोक्ताओं के समय व धन की बचत हुई है तो उद्योग-व्यापार को भी गति मिली है, लेकिन इससे जुड़ी तमाम विसंगतियां भी सामने आई हैं। सड़कों के त्रुटिपूर्ण डिजाइन व निर्माण में चूक को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। पिछले हफ्ते मध्यप्रदेश में लगातार 40 घंटे लगे जाम से जहां हजारों लोगों को घंटों परेशान होना पड़ा, वहीं जाम में फंसकर तीन लोगों की मौत हुई है।

निश्चय ही यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसको लेकर शासन-प्रशासन के साथ ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई को गंभीरता से लेना चाहिए। उन तमाम आशंकाओं को टालना चाहिए जो भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति के कारक बन सकते हैं। बहरहाल, मध्यप्रदेश की घटना को लेकर एनएचएआई की आलोचना की जा रही है। इस घटना के बारे में एनएचएआई के एक अधिकारी की संवेदनहीन टिप्पणी को लेकर भी सवाल उठे हैं। यहां तक कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी एनएचएआई के रुख को कठोर और संवेदनहीन बताया है, जो जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करने वाला है। दरअसल, एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने एनएचएआई को दोषपूर्ण और देर से सड़क निर्माण के लिये फटकार लगायी है, जिसके कारण आगरा-मुबई राष्ट्रीय राजमार्ग के इंदौर-देवास खंड में जाम लग गया था। बताते हैं कि एनएचएआई के कानूनी सलाहकार ने इस बाबत संवेदनहीन टिप्पणी की कि लोग बिना किसी काम के घर से इतनी जल्दी क्यों निकलते हैं? इस टिप्पणी ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया।

निश्चित रूप से इस दुर्घटना और हजारों लोगों के घंटों जाम में फंसे रहने के मामले में जहां एनएचएआई की तरफ से माफी मांगने की जरूरत थी, वहीं उसने दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिये दोष लोगों पर लगाते हुए असंवेदनशील बयान दे डाला। जिसके खिलाफ तल्ख प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक था। यही प्रतिक्रिया अदालत की टिप्पणी में भी झलकती है।

इसमें दो राय नहीं कि अकसर बड़ी सड़कों और राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण के दौरान अंतहीन असुविधा भारतीय यात्रियों के लिए रोजमर्रा के अनुभव हैं। अधिकांश साइटों पर निर्माण से जुड़ी, यात्रियों के अनुकूल सर्वोत्तम परंपराओं को अपनाना और यातायात में व्यवधान को कम से कम करना सुनिश्चित नहीं किया जाता है। निस्संदेह, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय संभाल रहे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की सक्रियता व प्रतिबद्धता की अकसर सराहना होती रहती है। वे सड़कों की गुणवत्ता और सुरक्षा मापदंडों को बढ़ाने को लेकर लगातार अभियान चलाते भी रहते हैं। हालांकि, वे भी मानते रहे हैं कि अभी सुधार की काफी गुंजाइश है। यूँ

तो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण निरंतर यातायात को सुगम मानकों के अनुरूप बनाने के लिये प्रयासरत रहता भी है। निश्चित रूप से स्थलों की स्थिति और भूमि अधिग्रहण के तमाम विवाद भी हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण काम राजमार्गों की व्यावहारिक दिक्कतों को दूर किया जाना होना चाहिए। दरअसल, योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन बड़े पैमाने पर निर्माण फर्मों और ठेकेदारों के माध्यम से किया जाता है। जिसमें व्यापक अनुभव, क्षमता और नैतिकता जैसे कारक मिलकर भूमिका निभाते हैं। निस्संदेह, काम की गुणवत्ता समस्याओं के समाधान में मददगार साबित हो सकती है। जरूरी है कि इस काम में बाह्य हस्तक्षेप राजनीतिक व अन्य स्तर पर न हो। जैसा कि हिमाचल प्रदेश में एक मंत्री पर एनएचएआई के दो अधिकारियों के साथ मारपीट का मामला प्रकाश में आया है। जिसमें मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। जिसको लेकर कई आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। निस्संदेह, हाल के वर्षों में भारत में सड़कों का नेटवर्क काफी सुधरा है। लेकिन एनएचएआई को अपनी कार्यशैली पर पुनर्विचार करना चाहिए। जिससे भविष्य में लंबे जाम लगने और दुर्घटनाओं को टाला जा सके। निस्संदेह, देश के शहरों में आए दिन जाम लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

शासन-प्रशासन को इसके तार्किक समाधान की दिशा में वैज्ञानिक तरीके से गंभीरता के साथ प्रयास करने चाहिए। जाम की सूचना मिलने पर उसे खुलवाने की तत्काल पहल होनी चाहिए। यात्रियों के लिये तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए ताकि भविष्य में जाम में फंसकर किसी की जान न जाए।

PM has been given Namibia’s Highest Award: Order of the Most Ancient Welwitschia Mirabilis

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Delhi : The Order of the Most Ancient Welwitschia Mirabilis is the highest civilian award of Namibia.

The award was established in 1995, shortly after Namibia gained independence in 1990, to recognise distinguished service and leadership.

Named after the Welwitschia Mirabilis, a unique and ancient desert plant endemic to Namibia, the order symbolises resilience, longevity and the enduring spirit of the Namibian people.

This makes it the 27th award for PM Modi and 4th award in this ongoing tour.

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