दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ जी-7 समिट में द्विपक्षीय मुलाकात तय होने के साथ भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताएँ एक बार फिर वैश्विक मंच पर केंद्र में हैं। वर्ष 2026 के इस समिट में भारत न केवल बहुपक्षीय चर्चाओं में सक्रिय भूमिका निभाने जा रहा है, बल्कि फ्रांस के साथ गहरी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद कर रहा है।
मुख्य अपेक्षाएँ और फोकस एरिया
समुद्री सुरक्षा और हार्मुज जलडमरूमध्य में स्वतंत्र नौवहन
फ्रांस ने भारत के साथ व्यापक समुद्री सुरक्षा साझेदारी का प्रस्ताव रखा है। क्षेत्रीय तनावों के बीच सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में स्वतंत्र नौवहन सुनिश्चित करने के लिए बहुराष्ट्रीय पहल में भारत की भागीदारी की चर्चा प्रमुख है। भारत, जो विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, अपने ऊर्जा सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए इस पहल को महत्वपूर्ण मानता है। इससे हिंद महासागर और पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
रक्षा सहयोग और सैन्य हार्डवेयर
दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग, सैन्य उपकरणों की खरीद, संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। फ्रांस पहले से ही भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है (राफेल, पनडुब्बियाँ, आदि)। इस बैठक में नए समझौतों और संयुक्त अभ्यासों के विस्तार की उम्मीद है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप होगा।
पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता
समिट के किनारे भारत, अमेरिका, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं की बैठक प्रस्तावित है। भारत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा पर फ्रांस के साथ समन्वय बढ़ाना चाहता है। क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और आर्थिक हित भी प्रमुख मुद्दे हैं।
जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी
जी-7 समिट में भारत विकसित देशों से जलवायु वित्त, हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की अपेक्षा रखता है। फ्रांस के साथ पहले से चल रहे साझा कार्यक्रमों को और गति देने की योजना है, ताकि भारत 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल कर सके।
बहुपक्षीय सुधार और वैश्विक दक्षिण की आवाज
भारत जी-7 से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधार, बहुपक्षीय संस्थाओं के लोकतंत्रीकरण और विकासशील देशों की चिंताओं को प्राथमिकता देने की मांग कर रहा है। मैक्रों के साथ यह बैठक इंडो-पैसिफिक रणनीति, क्वाड और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला मजबूती जैसे मुद्दों पर भी चर्चा का अवसर प्रदान करेगी।
भारत की ‘विश्व मित्र’ रणनीति
यह मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय नहीं है, बल्कि भारत की ‘विश्व मित्र’ नीति और बहु-संरेखण (Multi-Alignment) का प्रतीक है। फ्रांस यूरोपीय संघ में भारत का प्रमुख समर्थक रहा है। दोनों देश आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और समुद्री डोमेन जागरूकता पर पहले से सहयोग कर रहे हैं। नई साझेदारी से भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकेगा।
जी-7 समिट 2026 भारत के लिए अवसरों का मंच है-ऊर्जा सुरक्षा से लेकर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वैश्विक नेतृत्व तक। फ्रांस के साथ मजबूत साझेदारी भारत को न केवल क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगी, बल्कि वैश्विक दक्षिण की आवाज को और प्रभावशाली बनाएगी। सफल वार्ता से दोनों देशों के बीच विश्वास का नया अध्याय शुरू होगा, जो आने वाले वर्षों में रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।



