संजीव कुमार
दिल्ली । “नर सेवा ही नारायण सेवा है। समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति का जीवन जब संस्कार, शिक्षा और स्वावलंबन से समृद्ध होता है, तभी वास्तविक रामराज्य की संकल्पना साकार होती है।” — पूज्य श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी जी
नई दिल्ली। रोहिणी सेक्टर-4 स्थित सेवा बस्ती में आज सेवा, समरसता और आत्मीयता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला, जब श्रीपेजावर अधोक्षजमठ के पीठाधीश्वर तथा श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी पूज्य श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी जी ने बस्ती का प्रवास किया। पूज्य स्वामी जी ने बस्ती के विभिन्न परिवारों के घरों में जाकर उनसे आत्मीय भेंट की, उनका कुशलक्षेम जाना और परिवारों को आशीर्वाद प्रदान किया।
साधारण परिवारों के घरों में संत का सहज भाव से पहुँचना बस्तीवासियों के लिए अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायी क्षण रहा। स्वामी जी के घर-घर प्रवास ने यह संदेश दिया कि सेवा और समरसता में कोई भेद नहीं होता तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति में नारायण का दर्शन ही भारतीय संस्कृति की मूल भावना है।
सेवा कार्यों ने बदली बस्ती की तस्वीर
एक समय रोहिणी सेक्टर-4 की यह सेवा बस्ती अशिक्षा, व्यसन, सामाजिक कुरीतियों और अनेक कठिनाइयों से जूझ रही थी। संसाधनों एवं उचित मार्गदर्शन के अभाव में बच्चों और युवाओं के सामने भी अनेक चुनौतियाँ थीं।
इस स्थिति को बदलने के लिए सेवा भारती एवं विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने सेवा को माध्यम और आत्मीय संपर्क को आधार बनाकर निरंतर कार्य प्रारंभ किया। वर्षों के सतत प्रयासों का परिणाम आज बस्ती के बदलते वातावरण के रूप में दिखाई दे रहा है।
बस्ती में संचालित ‘हमारी दुनिया संस्कार केंद्र’ और विभिन्न सेवा प्रकल्पों के माध्यम से शिक्षा, संस्कार, स्वास्थ्य, स्वावलंबन तथा सामाजिक समरसता को केंद्र में रखकर कार्य किया जा रहा है।
प्रमुख सेवा कार्य
बाल संस्कार एवं शिक्षा:
बाल संस्कार केंद्रों के माध्यम से बच्चों को अध्ययन में सहयोग, संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति एवं व्यक्तित्व विकास की दिशा में मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
मातृशक्ति एवं युवाओं का स्वावलंबन:
माताओं-बहनों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प तथा कंप्यूटर प्रशिक्षण जैसे कौशल विकास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवा:
बस्तीवासियों के लिए समय-समय पर नि:शुल्क आरोग्य शिविरों का आयोजन कर स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं में सहयोग किया जा रहा है।
व्यसन मुक्ति एवं सामाजिक जागरण:
नशे और सामाजिक कुरीतियों से दूर रखने के लिए निरंतर जनजागरण एवं व्यसन मुक्ति के प्रयास किए जा रहे हैं।
समरसता एवं संस्कार:
सामूहिक उत्सवों, सत्संगों और समरसता गोष्ठियों के माध्यम से बस्ती के परिवारों के बीच आत्मीयता, पारस्परिक सहयोग और सामाजिक एकता को मजबूत किया जा रहा है।
सेवा कार्यों का उद्देश्य केवल सुविधाएँ उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बस्ती के प्रत्येक परिवार को शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसी कारण आज बस्ती के वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई देता है।
“जहाँ संस्कार और स्वावलंबन आता है, वहाँ अज्ञान और कुरीतियाँ समाप्त होती हैं”
बस्ती प्रवास के दौरान आयोजित सत्संग एवं संवाद कार्यक्रम में पूज्य श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी जी ने कहा कि “नर सेवा ही नारायण सेवा है।” उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर उसके जीवन में शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता का प्रकाश पहुँचाना ही सच्ची सेवा है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक रामराज्य का संकल्प तभी सिद्ध होगा, जब समाज के अंतिम छोर पर खड़ा व्यक्ति भी सुसंस्कृत, शिक्षित, स्वस्थ और स्वावलंबी बने। सेवा भारती और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता जिस निष्काम भाव से बस्ती के परिवारों के बीच रहकर सेवा कार्य कर रहे हैं, वह समाज के लिए अनुकरणीय है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि जहाँ संस्कार, शिक्षा और स्वावलंबन का प्रवाह होता है, वहाँ अज्ञान, कुरीतियाँ और सामाजिक विकृतियाँ स्वतः कमजोर पड़ती हैं। सेवा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को केवल सहायता देना नहीं, बल्कि उसे सम्मान के साथ आत्मनिर्भर और समाज का सक्रिय सहभागी बनाना है।
पूज्य स्वामी जी ने बस्तीवासियों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को शिक्षा और संस्कार से जोड़ें, युवाओं को कौशल एवं रोजगार की दिशा में आगे बढ़ाएँ तथा समाज में परस्पर सहयोग और समरसता की भावना को मजबूत करें।
स्वामी जी के इस आत्मीय प्रवास से बस्तीवासियों में विशेष उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिला। उनके घर-घर पहुँचने का यह संदेश स्पष्ट था कि सेवा का केंद्र कोई भवन नहीं, बल्कि समाज का प्रत्येक परिवार है और सेवा का अंतिम लक्ष्य प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सम्मान, संस्कार और स्वावलंबन लाना है।
(लेखक विहीप दिल्ली प्रांत के प्रचार प्रसार प्रमुख हैं)



