आइडिया अच्छा है

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अजय श्रीवास्तव

शिमला । रावण के साथ तिलचट्टा दहन का आइडिया जिसका भी है, अच्छा है। यह प्रतीकात्मक दहन बहुत जरूरी है क्योंकि अराजकता और हिंसा से तख्ता पलट का अंतर्राष्ट्रीय प्रयोग यह गंदे कीड़े भारत में भी करना चाहते हैं। सत्ताधारी दल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते यह गिरोह भारतीय राष्ट्र के खिलाफ साजिश करके हिंसा, हत्या और लूटपाट को माध्यम बनाकर तख्ता पलट करना चाहता है। क्रूर इस्लामी जिहाद और हिंसक कम्युनिज्म का यह राष्ट्र विरोधी गिरोह वही है जो लोकतंत्र का फायदा उठाकर खुलेआम “भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह” और “भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी” नारे लगाता है।
बांग्लादेश में हुई अराजकता और तख्तापलट की संभावनाएं यह गिरोह भारत में तलाश रहा है। इस्लामी देश में जिहादियों ने तख्ता पलट से पहले और उसके बाद भी सैकड़ों हिंदू मंदिर तोड़ दिए और हिंदुओं की हत्याएं तथा बलात्कार करके शवों तक का अपमान किया। भारत में यह गिरोह यही दोहराना चाहता है। जिहादी मुस्लिम आतंकवादी बुरहान वानी, अफजल गुरु और अजमल कसाब उनके आदर्श हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मौत की सजा दिए जाने के बाद यही गिरोह छाती पीट पीट कर कहता था, “तुम कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा” और “अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं”। कई दिमागी नक्सली आज तक शर्मिंदा हैं कि सैकड़ों हत्याएं करने वाले आतंकवादियों को सजा सुनाने वाला सुप्रीम कोर्ट अभी तक जिंदा है। यह लोग और उनके समर्थक कई नेता जेब में संविधान लेकर चलते हैं।
तिलचट्टा समुदाय को आगे करके दिमागी नक्सली देश को हिंसा, हत्या और अराजकता की आग में झोंकने का खतरनाक खेल रच रहे हैं। लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव लड़कर सत्ता में आने के सपने पूरे न होने पर बांग्लादेश का अराजक प्रयोग भारत में करने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी। दशकों से देश में नक्सली आतंकवाद या माओवाद कोई यही लोग खाद पानी देते रहे ताकि बंदूक के बल पर देश में तख्ता पलट किया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने दृढ़ संकल्प से माओवादी आतंकवाद का जड़ से सफाई करके उन क्षेत्रों में विकास की रोशनी फैलाई है। इसलिए विजयदशमी पर तिलचट्टा दहन सिर्फ एक प्रतीक है जो देश और समाज के इस संकल्प को दोहराता है की इस्लामी जिहाद और कम्युनिज्म की खतरनाक साजिश लोकतांत्रिक भारत में तिलचट्टो की मौत मरेगी। वंदे मातरम।

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