मोदी अंश: अमित शाह में प्रधानमंत्री का प्रतिबिंब…

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दिल्ली। एक देश के नागरिकों का स्वतंत्र अभियान जो बारह साल पहले नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की मांग लेकर सड़कों पर उतरा था, अब उसी भाव से अमित शाह को “मोदी अंश” कह रहा है। यह कोई पार्टी का निर्देशित कार्यक्रम नहीं, बल्कि मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड रखने वाले आम लोगों की स्वैच्छिक पहल है।
2012 की आवाज: जब नागरिकों ने कहा ‘नरेंद्र मोदी फॉर पीएम’
2012 में जब भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं चल रही थीं, तब एक नागरिक समूह ने सबसे पहले “नरेंद्र मोदी फॉर पीएम” का नारा बुलंद किया। ये लोग पार्टी के पदाधिकारी नहीं थे। किसी ने उन्हें प्रचार के लिए नहीं भेजा था। जब भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे कहा कि “नेता कौन होगा, यह पार्टी तय करेगी, आप कौन होते हैं नाम आगे बढ़ाने वाले”, तो उन्होंने जवाब दिया: “हम इस देश के नागरिक हैं। हमारे पास मतदाता पहचान पत्र है, आधार कार्ड है। हमें नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में चाहिए।”
उस दौरान उनके पोस्टर सड़कों, मैदानों और सभाओं में दिखे। पोस्टर पर लिखा होता था-“नरेंद्र मोदी फॉर पीएम। बीजेपी के हित में जारी।” क्रिकेट मैदानों से लेकर मोदी की रैलियों तक ये लोग हाथों में पोस्टर लेकर ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाते थे। अभियान पूरी तरह स्वायत्त था। किसी से आर्थिक मदद नहीं लिया गया। कोई प्रायोजक नहीं था। शुभचिंतकों के सुझावों को ठुकराते हुए समूह ने तय किया कि अपनी ताकत से जितना चल सके, उतना चलाया जाएगा।
मिस्ड कॉल अभियान के जरिए दस लाख से अधिक लोगों ने समर्थन दिया। मांग साफ थी-प्रधानमंत्री बनने से पहले ही मोदी के नाम की घोषणा हो। 2014 में जब मोदी प्रधानमंत्री बने, तो इस समूह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बधाई दी और अपने काम में लग गया। प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद वे उनसे मिलने नहीं गए। अपेक्षा सिर्फ इतनी थी कि देश का सिर कभी झुकने न दे और मोदी प्रधानमंत्री बनकर काम करें।

बारह साल बाद: अमित शाह के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर नया अभियान
2026 में, अमित शाह के जन्मदिन से एक दिन पहले, वही समूह फिर सामने आया। उन्होंने कहा: “हम प्रधानमंत्री मोदी के प्रशंसक हैं। वे जब तक चाहें प्रधानमंत्री रहें। लेकिन उनका अंश हमें अमित शाह में दिखता है। इसलिए अमित जी हैं मोदी अंश।”
2014 का अभियान मोदी के जन्मदिन से एक दिन पहले शुरू हुआ था; यह अभियान शाह के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर। समूह का कहना है कि बारह सालों में उन्होंने मोदी की कार्यशैली, निर्णय क्षमता और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति को करीब से देखा। उसी प्रवृत्ति का स्पष्ट प्रतिबिंब उन्हें गृह मंत्री अमित शाह में दिखाई देता है।
मोदी अंश क्यों? हनुमान और नीब करौली बाबा की तरह
हनुमान भक्तों की परंपरा में नीब करौली बाबा को हनुमान का अंश माना जाता है। यह धारणा किसी औपचारिक घोषणा से नहीं, बल्कि गुणों, भक्ति और कार्यशैली की समानता से बनती है। ठीक उसी तरह ये नागरिक “मोदी अंश” की बात कर रहे हैं-किसी पार्टी प्रस्ताव से नहीं, बल्कि देखे-समझे गुणों के आधार पर।
समूह के अनुसार, मोदी में जो दृढ़ता, संगठनात्मक कौशल, राष्ट्रहित में कठोर निर्णय लेने की क्षमता और जमीनी स्तर तक पहुंच बनाने की कला है, वही गुण अमित शाह में भी स्पष्ट हैं। गृह मंत्रालय के कामकाज में आंतरिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक दक्षता को लेकर जो निरंतरता दिखी है, उसे वे मोदी की कार्यशैली का विस्तार मानते हैं। शाह की भूमिका को वे मोदी के राजनीतिक और प्रशासनिक दर्शन का स्वाभाविक विस्तार बताते हैं-जैसे कोई गुरु के गुण शिष्य में, या किसी महान व्यक्तित्व का अंश उसके निकटतम सहयोगी में दिख जाए।
अभियान फिर से स्वायत्त है। किसी बड़े नेता से मुलाकात या प्रायोजन की मांग नहीं की गई है। समूह का जोर इस बात पर है कि नागरिकों को अपने पसंदीदा नेतृत्व की पहचान करने और उसे सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने का अधिकार है। वे कहते हैं कि 2012 में भी यही तर्क था, और आज भी वही है।
नागरिकों की स्वायत्त आवाज
यह समूह बार-बार दोहराता है कि वे भाजपा के कार्यकर्ता नहीं हैं। उनकी पहचान मतदाता और नागरिक की है। 2012 में उन्होंने जो जोखिम उठाया था-कि पार्टी के अंदरूनी निर्णय के बावजूद बाहर से नाम आगे बढ़ाया-उसे आज भी वे याद करते हैं। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में नागरिकों को यह अधिकार है कि वे देखें और कहें कि किस नेता में वे अपने पसंदीदा प्रधानमंत्री की कार्यशैली का अंश देखते हैं।
अमित शाह को ‘मोदी अंश’ कहने का मतलब उत्तराधिकार की घोषणा नहीं है। इसका मतलब है कि मोदी की दृष्टि, अनुशासन और राष्ट्र-प्रथम की भावना का एक स्पष्ट रूप गृह मंत्री में दिखता है। जैसे नीम करोली बाबा की परंपरा में हनुमान के गुणों को पहचानने की बात होती है, वैसे ही यहां नागरिक मोदी के गुणों को शाह में पहचान रहे हैं।
अभियान अभी प्रारंभिक चरण में है। पोस्टर और सोशल मीडिया के जरिए संदेश जा रहा है। समूह का दावा है कि 2012 की तरह ही यह भी बिना किसी बाहरी दबाव या प्रायोजन के चल रहा है। उनका अंतिम संदेश सरल है: प्रधानमंत्री मोदी जब तक चाहें प्रधानमंत्री रहें; लेकिन जो अंश उनमें है, वह अमित शाह में भी दिखता है।

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आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु

आशीष कुमार अंशु एक पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों से मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान स्टेप से जुड़े हुए हैं

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