लखनऊ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज लखनऊ पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने गए। साथ में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या और ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे। बारिश के बीच यह स्वागत न केवल औपचारिक रहा, बल्कि हावभाव से भरा भी दिखा। दीप प्रज्वलन में शाह और योगी साथ रहे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज लखनऊ पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने गए। साथ में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या और ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे। बारिश के बीच यह स्वागत न केवल औपचारिक रहा, बल्कि हावभाव से भरा भी दिखा। दीप प्रज्वलन में शाह और योगी साथ रहे।
बैठक में शाह ने योगी की तारीफ करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त हुआ है। उन्होंने माफियाओं के खिलाफ कठोर शासन की सराहना की और स्पष्ट किया कि यूपी में भाजपा “अंगद का पैर” है, जिसे कोई हिला नहीं सकता।
यह तारीफ सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए चेहरे और नेतृत्व पर मुहर की तरह थी। शाह और योगी अगल-बगल बैठे, और दोनों के बीच की बातचीत सकारात्मक रही।
राजनीति में तस्वीरें बोलती हैं। एक दृश्य में शाह, मौर्या और पाठक अपने छाते खुद पकड़े खड़े थे, जबकि योगी का छाता उनके सुरक्षाकर्मी के हाथ में था। यह छोटा सा अंतर बड़ा संदेश देता है-उत्तर प्रदेश का नेतृत्व योगी का है। किसी दूसरे को लेकर कन्फ्यूजन की जरूरत नहीं। अमित शाह ने लखनऊ से पूरे देश को यही संकेत दिया कि यूपी में सत्ता और संगठन का केंद्र योगी आदित्यनाथ हैं।
पिछले कुछ समय से अमित शाह, योगी, मौर्या और पाठक के बीच ‘दूरी’ या ‘मतभेद’ की खबरें चलती रहीं। ये खबरें राजनीतिक नैरेटिव सेट करने का हिस्सा थीं। आज की तस्वीरों, दीप प्रज्वलन, स्वागत और सार्वजनिक तारीफ ने इन पर विराम लगा दिया। बैठक में भी वे साथ दिखे और आगे की रणनीति पर बात हुई। तथ्य यह है कि शाह ने योगी की उपलब्धियों को स्वीकार किया और तीसरी बार सरकार बनाने का भरोसा जताया।
राजनीति में एकता का प्रदर्शन अक्सर चुनावी तैयारी का हिस्सा होता है। आज लखनऊ में जो दृश्य बना, वह साफ कहता है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का नेतृत्व योगी आदित्यनाथ के हाथ में है और केंद्रीय नेतृत्व भी इसे स्वीकार कर रहा है। कोई कन्फ्यूजन नहीं, कोई छिपी दूरी नहीं-बस एक स्पष्ट संदेश।



