मधुबनी (बिहार) : मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र अंतर्गत बलिराजगढ़ गांव में 2-3 नवंबर 2026 की दरम्यानी रात करीब एक बजे एक सनसनीखेज घटना घटी। पुलिस पिकेट पर तैनात सहायक उपनिरीक्षक (ASI) चंद्रमोहन सिंह पर स्थानीय एक घर में गलत नीयत से घुसने और ग्रामीणों द्वारा घेर लिए जाने के बाद अपनी सरकारी सर्विस पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग करने का आरोप है। इस गोलीबारी में 50 वर्षीय अशोक यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि तीन अन्य ग्रामीण-धनिक लाल यादव, फूलो देवी और विजेंद्र यादव-गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
ग्रामीणों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, ASI चंद्रमोहन सिंह बलिराजगढ़ ऐतिहासिक स्थल की सुरक्षा के लिए तैनात थे। वे अक्सर दूध या सामान लेने के बहाने गांव के एक घर में आते-जाते थे, जहां कथित रूप से एक नाबालिग युवति पर उनकी बुरी नजर थी।। उस रात वे घर में दाखिल हुए। पड़ोसी फूलो देवी ने कुछ असामान्य पाया और शोर मचाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने घर को घेर लिया और आरोपी को अंदर बंद कर दिया। खुद को भीड़ से घिरा देखकर सहायक उपनिरीक्षक ने खिड़की या दरवाजे से सर्विस पिस्टल से चार से छह राउंड फायरिंग कर दी और मौके से फरार हो गया।

घटना के बाद यह भी सामने आया कि संबंधित घर में नाबालिग युवती मौजूद थी। विपक्ष और स्थानीय लोगों ने आरोपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और उनके खिलाफ POCSO कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव सहित कई लोगों ने इसे बलात्कार के इरादे से जोड़ा। मधुबनी के एसएसपी योगेंद्र कुमार ने आरोपी ASI को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। सेवा से बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और सूचना देने वाले पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। एसएसपी ने स्पीडी ट्रायल और कठोर सजा की बात कही है।
इस घटना ने बिहार पुलिस की छवि पर सवाल खड़े किए हैं। थानों को लेकर पहले से ही लूटपाट के अड्डे जैसी धारणा प्रचलित रही है। इस हत्याकांड के बाद सवाल उठ रहे हैं कि ASI चंद्रमोहन सिंह जिन मामलों में जांच अधिकारी रहे होंगे, उन रिपोर्टों की निष्पक्षता की समीक्षा होगी या नहीं। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2025 में मधवापुर थाना क्षेत्र में डायल-112 ड्यूटी के दौरान एक नाबालिग बाइक सवार की मौत के मामले में भी उनके खिलाफ आरोप लगे थे।
घटना के बाद गांव में आक्रोश फैला और सड़क जाम हुआ। जिला प्रशासन और पुलिस ने स्थिति नियंत्रित की। आरोपी की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। यह मामला न केवल एक पुलिसकर्मी की कथित आपराधिक हरकत को उजागर करता है, बल्कि पुलिस बल में जवाबदेही और अनुशासन की कमी पर भी गंभीर चिंतन की मांग करता है।



