दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया ओैर न्यूजीलैंड की महत्वपूर्ण व एतिहासिक यात्रा संपन्न करने के बाद स्वदेश वापस आ गए हैं। हिंद प्रशांत महासागर के इन तीन देशों की यात्रा कई दृष्टियों से ऐतिहासिक सिद्ध हुई। इन यात्राओं में जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री मोदी की लोगों से जुड़ाव बना लेने की अद्भुत क्षमता शिखर पर दिखाई दी वहीं दूसरी ओर कई ऐसे महत्वपूर्ण समझौतो पर हस्ताक्षर हुए जिनसे भविष्य की सुरक्षा व विकास का परिदृश्य पूरी तरह से बदलता दिखेगा।
तीन देशों की यात्रा के द्वितीय चरण में प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया पहुंचे जहां उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया और भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच नागरिक परमाणु सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में ऑस्ट्रेलिया -भारत परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए।जिसके अंतर्गत ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम देगा। भारत ने वर्ष 2047 तक परमाणु ऊर्जा से एक लाख मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य रखा है जिसके लिए ऑस्ट्रेलिया से प्राप्त यूरेनिम बहुत ही किफायती होगा। यहाँ स्मरणीय है कि एक समय ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम देने से मना कर दिया था । प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज की अध्यक्षता में मेलबर्न में संपन्न तृतीय वार्षिक सम्मेलन में कुल 18 समझौतों और सहयोग दस्तावेजों पर मुहर लगी। इनमें रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, साइबर व क्रिटिकल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के मुद्दे पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया ।भारत और ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त घोषणा पत्र में कहा गया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की। उन्होंने सभी देशों द्वारा आतंकवाद के खतरे का व्यापक व निरंतर मुकाबला करने पर बल दिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति द्वारा सूचीबद्ध वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों, आतंकवादी संगठनों तथा उनके प्रॉक्सी सहयोगियों, प्रायोजकों और फाइनेंसर्स के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य यूरेनियम का समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अभी तक भारत केवल चार देशों कजाकिस्तान से 40 से 50 प्रतिशत, कनाडा से 20 से 30 प्रतिशत, रूस से 10 से 15 प्रतिशत और उज्बेकिस्तान से 10 प्रतिशत यूरेनियम खरीदता है जबकि दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश ऑस्ट्रेलिया है। भारत 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर चल रहा है, इसके लिए कोयले पर निर्भरता कम करने और परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की योजना है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य रक्षा ओैर सुरक्षा सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास और सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर सहमति बनी। अंतरिक्ष सहयेाग, समुद्री सुरक्षा, भारतीय तटरक्षक और ऑस्ट्रेलियाई मैरीटाइम बॉर्डर कमांड के मध्य समझौता हुआ है। व्यापार और निवेश को बढ़ाने, साइबर सुरक्षा और नई तकनीक पर समझौता हुआ है। शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को लेकर भी समझौता हुआ है, अब ऑस्ट्रेलियाई यूनिवसिर्टी के कैंपस भारत में आसानी से खुल सकेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच संबंधों को क्रिकेट व संस्कृति से भी जोड़ा। मेलबर्न के क्रिकेट स्टेडियम में प्रधानमंत्री मोदी का अत्यंत भव्य स्वागत हुआ। क्रिकेट भारत -ऑस्ट्रेलिया संबंधों की कूटनीतिक भाषा है। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की संयुक्त प्रेसवार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम दोनों की बैठकें भी क्रिकेट की तरह होती हैं। दोनों देशों के बीच खेल और खेल उद्योग में सहयोग बढ़ाने के लिए रोडमैप जारी किया गया। इससे स्पष्ट हो गया कि इसी वर्ष दिसंबर में चेन्नई के स्टेडियम में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की बिग बैश लीग का उद्घाटन मैच सबसे बड़ा आकर्षण बनेगा। तय कार्यक्रम के अनुसार ऑस्ट्रेलियाई पुरुष बिग बैश लीग का पहला मैच दिसंबर में चेक मेलबर्न रेनेगेड्स और वर्तमान विजेता पर्थ स्कॉर्चर्स के बीच खेला जाएगा।यह भारत में आयोजित होने वाला पहला विदेशी क्रिकेट लीग मैच होगा।
प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया प्रवास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारतीय मूल की तीन प्राचीन कलाकृतियों को वापस लौटाया है।इनमें एक पाषाण की नंदी प्रतिमा भी है।प्रधानमंत्री मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की गूंज सुनी। 21वीं सदी का भारत आज विकसित होने के लक्ष्य पर काम कर रहा है, ये वो भारत है जो कहता है ग्रो मोर, अचीव मोर। उन्होंने कहा कि जब सोमवार के दिन आतंकवादियों के ठिकानों पर विस्फोट हो रहे थे तब दुनिया ने भारत के रक्षा उपकरणों की क्षमता और विश्वसनीयता देख रही थी। मेलबर्न का 30 हजार की क्षमता वाला स्टेडियम खचाखच भरा था जिस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह शो तो पूरी तरह से हाउसफुल है।ऑस्ट्रेलिया में यह संभवतः पहला अवसर था जब किसी विदेशी नेता के लिए इतनी भीड़ आई जिसमें गजब का उत्साह था और वह मोदी -मोदी के नारे लगा रही थी।
न्यूजीलैंड- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की याात्रा का अंतिम पड़ाव न्यूजीलैंड रहा और वह भी मोदी के रंग में रग गया।भारत के प्रधानमंत्री की यह न्यूजीलैंड यात्रा 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हुई थी।न्यूजीलैंड में तीन लाख प्रवासी भरतीय नागरिक रहते हैं जो वहां के विकास में सहभागिता कर रहे हैं।प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के मध्य शिखर वार्ता के बाद 40 वर्षों का कूटनीतिक सन्नाटा टूट गया।दोनों प्रधानमंत्रियों ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और हिंद प्रशांत क्षेत्र की अहमियत के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचा दिया। दोनों देशों ने रोडमैप 2030 को अनुमति प्रदान की है।दोनों देश 2030 तक व्यापार को दोगुना करेंगे, रक्षा -सुरक्षा संबंधों को भी बढ़ाएंगे। दोनों देशों के मध्य व्यापार 35 हजार करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। दोनों देशों के मध्य 10 समझौता ज्ञापनों और आठ अन्य प्रमुख फैसलों पर मुहर लगी।दोनों देशों ने व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, कृषि- प्रौद्योगिकी, खेल, शिक्षा, पर्यटन संस्कृति और लोगों के परस्पर रिश्तों सहित विभिन्न क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने पर सहमति जताई गई है।
भारत और न्यूजीलैंड के मध्य मुक्त व्यापार समझौता संपन्न हुआ है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने प्रधानमंत्री मोदी के पहुंचने से पूर्व एक महत्वपूर्ण घोषणा करी कि उनके देश से भारत को होने वाले निर्यात का 57 प्रतिशत हिस्सा पहले दिन से ही शुल्क मुक्त होगा।ऑकलैंड में भी प्रधानमंत्री मोदी ने प्रवासी भारतीयों को संबोधित किया, जहां उन्होंने भारत की विकास गाथा का वर्णन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ओैर न्यूजीलैंड के रिश्ते में यादे हैं- दोस्ती है, मूल्य और प्रतिबद्धता है। न्यूजीलैंड की सुंदर परंपरा में सदियों से एक शब्द वाका लोगो को जोड़ता आया है।भारत ड्रोन प्रौद्योगिकीऔरअंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नई ऊचाईयां छू रहा है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह आर्थिक साझेदारी समावेशी और टिकाऊ व्यापार का एक आदर्श मॉडल बन सकती है।



