नगरासू गुरुद्वारे में 22 घंटे से गतिरोध, हाईवे किनारे बढ़ी हलचल!!
डीएम-एसपी मौके पर, फिर भी नहीं निकला समाधान, नगरासू बना प्रदेशभर में चर्चा का केंद्र!!
चमोली (उत्तराखंड): बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नगरासू रविवार को पूरे प्रदेश की नजरों का केंद्र बना रहा। यहां स्थित गुरुद्वारे में शनिवार दोपहर शुरू हुआ विवाद रविवार तक भी जारी रहा, जिससे प्रशासनिक अमले में लगातार हलचल बनी हुई है। जिले के शीर्ष अधिकारी मौके पर डटे हैं, लेकिन घंटों की मशक्कत के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार शनिवार दोपहर करीब तीन बजे कुछ निहंग सिख गुरुद्वारे में पहुंचे और इसके बाद विवाद ने तेजी से तूल पकड़ लिया। देखते ही देखते मामला इतना संवेदनशील हो गया कि जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर को स्वयं मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालना पड़ा।
बताया जा रहा है कि निहंग सिख गुरुद्वारा प्रबंधन के रवैये से नाराज बताए जा रहे हैं। इसी नाराजगी के चलते वे गुरुद्वारे के भीतर डटे हुए हैं और अपनी मांगों को लेकर अड़े हैं। प्रशासन लगातार वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक कोई निर्णायक नतीजा सामने नहीं आ पाया है।
घटना के बाद नगरासू क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार आवाजाही बनी हुई है, जबकि आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। स्थानीय लोगों में भी पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा और उत्सुकता बनी हुई है।
गौरतलब है कि 16 जून को कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद के बाद यह दूसरा बड़ा घटनाक्रम है, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण नगरासू की स्थिति को बेहद संवेदनशील मानते हुए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी ने मौके पर सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से कई बार अपील की और शांतिपूर्ण समाधान का आग्रह किया, लेकिन गतिरोध लगातार बना रहा। वार्ता के कई दौर होने के बावजूद अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी।
चारधाम यात्रा के व्यस्ततम मार्गों में से एक पर उत्पन्न इस स्थिति ने प्रशासन के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर यह गतिरोध कब समाप्त होगा और प्रशासन किस तरह सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान तक पहुंचेगा।
फिलहाल नगरासू में हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन 22 घंटे से अधिक समय से जारी यह विवाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।



