मीडिया स्कैन पत्रकारिता एवं जनसंचार क्षेत्र में सुधार के लिए कार्यरत एक लाभरहित संस्था है। यह संस्था मीडिया एवं जनसंचार के छात्रों तथा पत्रकारों के हितों के लिए निरंतर प्रयासरत रहती है। दिल्ली-एनसीआर में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के पत्रकार भाग लेंगे। आयोजकों का मानना है कि कृषि रिपोर्टिंग को अधिक सटीक, जिम्मेदार और प्रभावी बनाने के लिए पत्रकारों को इन विषयों पर संवाद के माध्यम से जागरूक करना आवश्यक है, ताकि वे पाठकों और दर्शकों तक सही जानकारी पहुँचा सकें।

आजादी के 79 वर्ष पूरे होने के इस अवसर पर यह चर्चा विशेष प्रासंगिक है। भारतीय खेती ने हरित क्रांति से लेकर आज की डिजिटल और तकनीक-आधारित कृषि तक लंबा सफर तय किया है। फसल उत्पादन बढ़ा है, लेकिन किसानों की आय, जलवायु परिवर्तन, बाजार की अनिश्चितता, उर्वरक और बीज की उपलब्धता, सिंचाई की समस्याएँ तथा नीतिगत चुनौतियाँ आज भी गंभीर बनी हुई हैं। सहकारिता आंदोलन और नई कृषि तकनीकों ने कुछ क्षेत्रों में राहत दी है, फिर भी मीडिया कवरेज अक्सर सतही या घटना-केंद्रित ही रह जाता है। गहराई से विश्लेषण, किसानों की आवाज और नीतिगत मुद्दों पर निरंतर रिपोर्टिंग की कमी महसूस की जाती रही है।
कार्यक्रम के माध्यम से पत्रकारों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, फसल प्रबंधन की वैज्ञानिक तरीकों, किसानों की वास्तविक चुनौतियों और सरकारी नीतियों की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। संवाद सत्र में विशेषज्ञ और अनुभवी पत्रकार अनुभव साझा करेंगे। उद्देश्य यह है कि कृषि रिपोर्टिंग केवल मौसमी या संकट के समय तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित, संतुलित और तथ्यात्मक बने। इससे पाठकों को किसानों की स्थिति, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की संभावनाओं की सही तस्वीर मिल सकेगी।

नोएडा मीडिया क्लब के ऑडिटोरियम में होने वाले इस कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर के युवा और अनुभवी पत्रकारों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। आयोजक संस्था मीडिया स्कैन का जोर है कि पत्रकारिता की जिम्मेदारी केवल समाचार देने तक नहीं, बल्कि समाज के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने तक है। कृषि देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। इसलिए इसकी रिपोर्टिंग में गहराई और संवेदनशीलता आवश्यक है।
14 अगस्त को आयोजित यह संवाद आजादी के 79 साल की कृषि यात्रा पर मीडिया की भूमिका का आकलन करने का अवसर प्रदान करेगा। इससे पत्रकारों में जागरूकता बढ़ेगी और वे भविष्य में अधिक प्रभावी कृषि रिपोर्टिंग कर सकेंगे। कार्यक्रम सभी इच्छुक पत्रकारों के लिए खुला है।



