सौ सौ चूहे खाकर बिल्ली
हज करने को आई।
अपने संग घड़ियाली आँसू
का इक दरिया लाई।।
जिनके शोणित से उसने
जीवनभर उदर भरा,
उनको श्रद्धांजलि देने वह
शोकपत्र भी लाई।।
धर्मद्रोहरत पर मजहब से
जिसकी प्रीत पुरानी।
आज धर्म की कथा बाँचती
वह चोरों की रानी।।
सत्य, सादगी, न्याय, नीति का
भाषण पिला रही है,
बच्चे–बच्चे के मुख पर है
जिसकी कुटिल कहानी।।
राम काल्पनिक हैं, जो ऐसा
शपथपत्र में लिखते।
वे कपटी, पाखंडी देखो!
रामभक्त अब बनते।।
माना चूक बड़ी कर बैठा
था घर का इक बूढ़ा,
किन्तु शत्रु को क्या हक,
उसको गरियाते फिरते।।
अपराधी जो भी हो उसको
निश्चित दण्ड मिलेगा।
रामधाम जिसने लूटा
उसका सर्वस्व जलेगा।।
रामनिंदकों के भी अब
षड्यंत्र विफल सब होंगे,
रामआस्था ग्रसने वाला
यह खग्रास टलेगा।।
रामकाज में विघ्न बहुत हैं,
कपट, खोट अरु खाई।
कठिन धरम की गैल,
कुटिल है रपटीली काई।।
दानवदल से सतत सजग
चौकन्ना रहना है,
राम परीक्षा लेते सबकी,
धैर्य धरो रे भाई!!



