दिल्ली। रामचंद्र गुहा का 13 जून 2026 का कॉलम “Control Freaks!” एक बार फिर पुरानी लेफ्ट-लिबरल सोच का नमूना है, जिसमें तथ्यों को तोड़-मरोड़कर, चुनिंदा आंकड़ों से यथार्थ छिपाकर और व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से भरे आरोप लगाकर मोदी सरकार की उपलब्धियों को बदनाम करने की कोशिश की गई है। यह लेख आर्थिक चुनौतियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, जबकि वास्तविकता यह है कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। गुहा की निराशा BJP की लोकप्रियता और हिंदू बहुसंख्यक राष्ट्र की सकारात्मक दिशा से उपजी है, न कि तथ्यों से।
सबसे पहले अर्थव्यवस्था: गुहा दावा करते हैं कि अर्थव्यवस्था अच्छी नहीं चल रही—रुपया कमजोर, पूंजी भाग रही, निजी निवेश सुस्त, खपत कमजोर, विनिर्माण ठप। सच्चाई उलट है। FY26 में भारत का GDP ग्रोथ 7.4-7.7% रहा, जो वैश्विक मंदी और ईरान संकट के बावजूद मजबूत है। विश्व बैंक, IMF और अन्य एजेंसियां भारत को सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था मानती हैं। प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन और ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन दोनों 7-8%+ बढ़े। मैन्युफैक्चरिंग में 8-10% ग्रोथ दर्ज की गई, खासकर PLI स्कीम्स के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और व्हाइट गुड्स में। FDI मजबूत रहा, मार्च 2026 में 6 बिलियन USD+। UPI, डिजिटल इकोनॉमी और इंफ्रास्ट्रक्चर बूम से खपत मजबूत है।
रुपया दबाव में है, लेकिन यह वैश्विक तेल कीमतों (ईरान युद्ध) का असर है, न कि नीतिगत विफलता। भारत ने रिजर्व्स मैनेजमेंट, निर्यात बढ़ावा और गोल्ड इंपोर्ट कटौती से संभाला। स्टॉक मार्केट: सेंसक्स-निफ्टी बार-बार नए हाई बना रहे हैं (जून 2026 में सेंसक्स 75,000+), IT सेक्टर AI चुनौती के बावजूद अनुकूलित हो रहा है। गुहा का ‘दो साल पहले के स्तर’ दावा सही नहीं जान पड़ता।
गुहा अर्थशास्त्रियों की “सुधार” सलाह का हवाला देते हैं—कस्टम्स-टैक्स ब्यूरोक्रेसी कम मनमानी, हेल्थ-एजुकेशन पर खर्च, लेबर इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग आदि। लेकिन मोदी सरकार ने इन्हें पहले ही अमल में लाया। GST ने टैक्स सिस्टम को सरल बनाया, IBC ने दिवालिया प्रक्रिया सुधारी, लेबर कोड सुधार किए। PLI स्कीम (2 लाख करोड़+) ने लाखों नौकरियां पैदा कीं। इंफ्रास्ट्रक्चर पर अभूतपूर्व खर्च (सड़कें, रेल, एयरपोर्ट) से हेल्थ-एजुकेशन इंडायरेक्ट बूस्ट मिला। आयुष्मान भारत, NEP 2020, PM SHRI स्कूल्स—ये सब साक्ष्य हैं। फर्टिलाइजर सब्सिडी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से बेहतर टारगेटेड हुई। BJP-शासित राज्यों में विकास तेज, गैर-BJP राज्यों में भी केंद्र सहयोग देता है। अब पूर्वोत्तर भारत नहीं बल्कि भारत का पूर्वोत्तर हिस्सा कहा जाता है, असम से लेकर मिजोरम,अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय जैसे राज्यों को। वहां आ रहे परिवर्तन को जाकर रामचन्द्रजी को एक बार देखना चाहिए।
ईरान युद्ध का असर स्वीकार्य है, लेकिन सरकार ने तेल डायवर्सिफिकेशन, रिजर्व बिल्डअप और कंजर्वेशन से सामना किया। रेमिटेंस में गिरावट अस्थायी है।
मोदी की महत्वाकांक्षाएं: तथ्यों का विकृत चित्रण
गुहा लिखते हैं कि मोदी सत्ता में बने रहना चाहते हैं, चौथा चुनाव जीतकर नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना चाहते हैं, पर्सनालिटी कल्ट, हिंदू राष्ट्र। यह व्यक्तिगत हमला है। मोदी 2014 से सुशासन, विकास और राष्ट्र-निर्माण पर फोकस्ड हैं। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” नारा जारी है। 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर निकले (NFHS, UNDP डेटा)। राम मंदिर और सोमनाथ—ये सांस्कृतिक पुनरुत्थान हैं, न कि विभाजन। हिंदू बहुसंख्यकवाद का आरोप मुस्लिम तुष्टिकरण की पुरानी कांग्रेस संस्कृति को छिपाने का प्रयास है। CAA, UCC, Article 370 जैसे कदम समान नागरिकता और राष्ट्रीय एकता के लिए थे।
व्यक्तित्व पूजा? हर नेता की छवि होती है, लेकिन मोदी का फोकस डिलीवरी पर है—2 करोड़+ घर, बिजली, शौचालय, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला। पेट्रोल पंप, एयरपोर्ट पर नाम—ये ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी के प्रतीक हैं, न कि वेनिटी। अमित शाह पर हमला भी राजनीतिक पूर्वाग्रह दिखाता है। वे कुशल संगठक हैं, जिन्होंने BJP को 22+ राज्यों तक पहुंचाया।
सत्ता का ‘फॉर्मूला’: हिंदुत्व + हैंडआउट्स + संस्थाएं + क्रोनी कैपिटलिज्म?
यह सबसे घृणित आरोप है। BJP का वोट बैंक विकास, राष्ट्रवाद और अच्छे शासन पर आधारित है। 2014 में कांग्रेस 14 राज्यों में, BJP 4 में। 2026 में BJP/NDA 20+ राज्यों में, कांग्रेस मुट्ठी भर में। यह ‘इनेप्ट कांग्रेस’ नहीं, बल्कि मोदी-शाह की रणनीति—ग्रासरूट कनेक्ट, डिजिटल कैंपेन, डायरेक्ट बेनिफिट्स (पीएम किसान, उज्ज्वला, लाडली बहना सम्मान आदि) का परिणाम है। महिलाएं, किसान, युवा, गरीब—सबको लाभ।
संस्थाओं पर कब्जा? चुनाव आयोग स्वतंत्र चुनाव कराता है। ED/CBI ने भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की—कांग्रेस के घोटालों (2G, कोल, CWG) का जवाब। क्रोनी कैपिटलिज्म? Adani-Ambani पर हमला पुराना है। वास्तव में, Ease of Doing Business में सुधार, इंसॉल्वेंसी कोड, डिफेंस-रेलवे में FDI से हजारों कंपनियां फलीं। स्टार्टअप्स बूम (1 लाख+), MSME सपोर्ट। ओलिगार्की (जिसमें राजनीतिक शक्ति मुख्य रूप से धनवान अभिजात्य वर्ग के हाथों में होती है) नहीं, बल्कि इंक्लूसिव ग्रोथ।
प्रेस पर दबाव और ‘गोदी मीडिया’? विपक्षी चैनल खुलेआम सरकार की आलोचना करते हैं। Godi मीडिया का आरोप उन मीडिया हाउस पर है जो कांग्रेस के जमाने में चापलूसी करते थे। आज डिबेट विविध हैं। आज सभी को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है। रवीश कुमार, अजीत अंजुम, पूण्य प्रसून, अभिसार शर्मा, साक्षी जोशी जैसे पत्रकार एक दशक से अधिक समय से लगातार आलोचना ही कर रहे हैं और कहते हैं कि कहने की आजादी नहीं है। अब उनके प्रोपगेंडा को जनता समझ चुकी है और उन्हेंं समाचार के लिए कम और मनोरंजन के लिए अधिक देख सुन रही है तो इसमें मोदी सरकार को कसूरवार कैसे ठहराया जा सकता है?
कांग्रेस का पतन और BJP की सफलता
2013-14 में यूपीए भ्रष्टाचार, नीति लकवे, उच्च मुद्रास्फीति और जीडीपी 5% के आसपास छोड़ गई। मोदी ने इसे स्थिरता, सुधार और महत्वाकांक्षी विकास से बदला। 22 राज्यों में बीजेपी की सरकार का अर्थ है कि लोगों का उन पर विश्वास है। कांग्रेस का पतन उसकी विरासत राजनीति, परिवारवाद और वोट बैंक पॉलिटिक्स का नतीजा है।
पर्यावरण और दीर्घकालिक स्वास्थ्य
गुहा पर्यावरण का जिक्र करते हैं। मोदी सरकार ने सोलर, रिन्यूएबल एनर्जी में विश्व लीडरशिप ली (450 GW टारगेट), इंटरनेशनल सोलर अलायंस, वन कवर बढ़ाया, स्वच्छ भारत। चुनौतियां हैं, लेकिन पर्यावरण की दिशा में प्रगति साफ दिखाई दे रही है।
रामचंद्र गुहा जैसे कमेंटेटर्स का निराशावाद भारत की उभरती ताकत को स्वीकार नहीं कर पाता। मोदी-शाह की प्राथमिकता राष्ट्र-निर्माण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास है। क्रोनीज्म छोड़कर ओपन कॉम्पिटिशन—PLI, स्टार्टअप इंडिया, ऑटोमेशन और स्किल इंडिया यही कर रहे हैं। संस्थाएं मजबूत हो रही हैं। हिंदुत्व ‘मेजॉरिटेरियनिज्म’ नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास है।
भारत 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है। चुनौतियां (तेल, वैश्विक मंदी) हैं, लेकिन नेतृत्व सक्षम है। गुहा की “कंस्ट्रक्टिव” सलाहें पहले से लागू हैं; उनकी निराशा केवल राजनीतिक है। भारत जाग रहा है—विकास, एकता और गौरव के पथ पर।



