देवाशु झा
दिल्ली । कुछ लोगों को तगड़ा भ्रम है कि वे सनातन धर्म के सबसे महान लड़ाका हैं। उनसे बड़ा राष्ट्रवादी और देशभक्त कोई नहीं है। उन्हें बड़ी विनम्रता से याद दिलाना चाहता हूॅं कि इसी देश में 2014 से पहले यह हिन्दू जाति घुटनों पर थी। भिखमंगों जैसी हालत थी। पाकिस्तानी पिल्ले खखोरते काटते रहते थे। एक व्यक्ति अकेले अपने बूते इस मरे हुए समाज को नया जीवन दे रहा है। वह आप से कम देशभक्त और छोटा राष्ट्रवादी नहीं है? आप से लाख गुणा अधिक ताप झेलता है, तिकड़में काटता है, सुनिश्चित करना चाहता है कि यह देश आगे बढ़ता रहे।
आप आलोचक बनिए, कटहा कुकुर न बनिए। यह दुरदुराना, गरियाना, उपहास करना बंद कर देंगे तो बेहतर रहेगा। स्वस्थ आलोचना का सदैव स्वागत है। यह घड़ी-घड़ी जो उछल कर हुंकारते फिरते हैं ना कि मैं हूॅं महान सनातनी!-वह हास्यास्पद और दयनीय लगता है। आप से लाखों-लाख गुणा अधिक कष्ट ताप सहते हुए, दुर्धर्ष चुनौतियां झेलते हुए उन्होंने इस देश को जागृत किया है। आपको जितना विश्वास अपने आप पर है, उससे अधिक विश्वास उस व्यक्ति पर होना चाहिए।



