संयुक्त राष्ट्र में भारत की छाप

images-19.jpeg

 

लखनऊ । संयुक्त राष्ट्र महासभा -2026 में भारत ने गहरी छाप छोड़ी। बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर व उनकी टीम ने जहां एक ओर अपने सहयोगी व मित्र राष्ट्रों के साथ संयुक्त राष्ट्र के सुधार व विस्तार पर चर्चा की वहीं दूसरी ओर इस अंतरराष्ट्रीय मंच से पाकिस्तान के झूठ और फरेब को बेनकाब किया । संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संबोधन एक ऐसा सधा हुआ संबोधन था जिसको महासभा में उपस्थित सभी देशों के प्रतिनिधियों ने ध्यान से सुना और तालियां बजाकर उसका समर्थन भी किया ।
इससे पूर्व पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ द्वारा कश्मीर का मुद्दा उठाने और भारत के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करने पर भारत ने अपने राइट आफ रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को अब गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की झूठ की कलई खोलकर रख दी ।
पेटल गहलोत ने कहा कि दुनिया को गुमराह करने वाले इस देश का सच अब किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान की सरकार को सेना द्वारा संचालित एक कठपुतली शासन करार दिया जिसको राजधानी में अपनी अवाम से बचने के लिए सुरक्षा की दीवारें खड़ी करनी पड़ रही हैं। शाहबाज शरीफ द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करने पर भी भारत ने करारा जवाब दिया। भारत ने याद दिलाया कि यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया ने 9/11 के भयानक आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई है। यह जगजाहिर है कि दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना की अकादमी के ठीक बगल में पनाह पाए हुआ था। पेटल ने कहाकि हमारा आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार बना रहेगा। पाकिस्तान द्वारा जारी आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे। भारत ने पूरी दुनिया को एक बार फिर स्पष्ट रूप से बता दिया है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और हमेशा रहेगा।
विदेशमंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में सभी विषयों पर विचार रखकर पूरी दुनिया को स्पष्ट कर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा। भारत ने रूस -यूक्रेन के मध्य चल रहे संघर्ष और अमेरिका -ईरान तनाव के कारण बढ़ रही वैश्विक चुनौतियों तथा ऊर्जा सप्लाई के बाधित होने पर चिंता व्यक्त की और भारतीय नाविकों पर हो रहे हमलों का मुद्दा भी उठाया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से मिलने वाले अवसरों का अधिकतम उपयोग करने के साथ इसके संभावित परिणामों और उभरते जोखिमों से निपटने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई में नवाचार को बढ़ावा देते हुए इसके सुरक्षा प्रभावों का भी ध्यान में रखना जरूरी है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने अत्यंत कड़ाई के साथ स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके नतीजों से बचने के लिए दलीलें दी गईं लेकिन इनमें से कोई भी तर्क अब नहीं टिकेगा। भारत ने स्पष्ट किया कि हम आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। दोस्ती और सद्भावना, आतंकवाद के साथ नहीं चल सकती और ऐसी सोच पर आधारित समझौटन पर स्वाभविक रूप से सवाल उठेंगे।आतंकवाद फैलाने के अभ्यस्त देश को ही अपना रवैया बदलना होगा। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना दुनिया में शांति और सुरक्षा के उद्देश्य से की गई थी किंतु आज भी संघर्ष और टकराव दुनिया की सबसे बड़ी चिंता है।भारत ने पूरी दुनिया से शांति की अपील करते हुए कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी से न सिर्फ सुरक्षा कमजोर होती है अपितु विकास और प्रगति पर भी असर पड़ता है।
विश्व के 11 नेताओं के भाषणों में भी भारत किसी न किसी रूप में छाया रहा। अधिकतर नेताओं ने भारत की बढ़ती भूमिका और उसके साथ सहयोग की जरूरत को रेखांकित किया जबकि कुछ ने भारतीय नागरिकों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेरगो ने सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए भारत को स्थायी सदस्यता देने का समर्थन किया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बाढ़ के बाद भारत की मदद के लिए आभार जताया। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने बहुपक्षवाद,अंतरराष्ट्रीय कानून शांति और समृद्धि से जुड़ी पी4एम में भारत की भागीदारी का उल्लेख फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने व्यापार, दुर्लभ खनिजों व महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग में भारत का नाम लिया। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने भारत की मदद से सीमा के पास विकसित हो रही गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी का उल्लेख किया। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत की यात्रा को याद किया। ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्कहम ने भारत एक उभरती हुई ताकत बताया। किया।आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने हिंद-प्रशान्त क्षेत्र में भारत -जापान और दक्षिण कोरिया के साथ संबंध मजबूत करने की बात कही। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि इतिहास में उन्होंने किसी भी नेता से अधिक लोगों तक ऊर्जा पहुंचाई है।मोदी के कार्यकाल में जितने लोगों को ऊर्जा की पहुंच मिली उतनी किसी दशक में किसी क्षेत्र या देश में नहीं मिली।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं वार्षिक बैठक में यह स्पष्ट हो गया कि अब पूरा विश्व भारत को सुन रहा है और अधिकांश देश भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।

Share this post

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित का लखनऊ में निवास है। वे लेखक, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

scroll to top