रायपुर : वो कहते हैं कि अपनी पीड़ा और कराह के बारे में कुछ मत बोलो, कुछ मत लिखो। चुप रहो। वर्ना सेक्युलरिज्म ख़तरे में आ जाएगा। उनका कहना है कि- जिहादी आतंक के ख़िलाफ़ कुछ भी कहोगे तो बीजेपी का एजेंडा बनेगा। जब भी आप अपना दर्द बयां करोगे तो ठप्पा लगा दिया जाएगा कि-हिंदू-मु-स्लिम कर रहे हो।कितनी धूर्तता है न साहेब? एक संगठित योजना के तहत लोभ-लालच, भय और लव जिहाद के ज़रिए हिंदुओं के कन्वर्जन का खुला खेल-खेला जा रहा है।जब मामले सामने आते हैं तो विक्टिम कार्ड खेला जाता है। शुतुरमुर्ग की तरह कब तक रेत में सिर धंसाए रहेंगे? जब तक कि कन्वर्जन की तलवार आपकी गर्दन तक न आ जाए?
जहां तक रही बात ‘हिंदू-मु-स्लिम’ करने की तो
सच्चाई तो ये है कि किसी हिंदू को किसी मुस्लिम से कोई तकलीफ़ नहीं है। भारत में रहने वाला हर भारतीय एक है। मु-स्लिम भाई हमारे हैं। लेकिन जिहादी आतंक के ख़िलाफ़ तो चुप नहीं रहा जा सकता न? क्या आपने कभी देखा है कि इन मुद्दों में ‘सच्चे और अच्छे’, ‘सब मुस-लमान ऐसे नहीं होते हैं’— ऐसी संज्ञाओं से अलंकृत मुस्लिम लोग सामने आते हैं?वो कन्वर्जन और कट्टरपंथियों-जिहादियों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करते हों? लेकिन दूसरी ओर आप जिहादियों की पूरी योजना को देखिए—इन सबका अंतिम उद्देश्य क्या है? कन्वर्जन के ज़रिए डेमोग्राफी परिवर्तन। डेमोग्राफी परिवर्तन यानी सत्ता परिवर्तन — और फिर जो हश्र होता है।उसके परिणाम पाकिस्तान और बांग्लादेश के तौर पर सामने आते हैं। ये भी दिमाग न लगाइए तो देश के उन हिस्सों में चले जाइए जहां मु-स्लिम बाहुल्य है। क्या वहां से कोई हिंदू चुनाव जीत पाता है? क्या वहां कोई हिंदू सुरक्षित रह पाता है? वहां के घरों में यही लिखा मिलता है —’यह मकान बिकाऊ है’
28 जुलाई 2025 को राजस्थान पत्रिका ने एक विशेष पड़ताल की। राजस्थान के तक़रीबन 5 जिलों में रहने वाले चीता, मेहरात और काठात समाज पर अब जिहादियों का ख़तरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार जो तथ्य सामने निकलकर आए वो डरावने हैं— “चीता, मेहरात और काठात समुदाय के लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता खत्म होती जा रही है। इन समुदाय के कई लोग हिंदू जीवन शैली और संस्कार मानना चाहते हैं। लेकिन खुद उनके कुछ रिश्तेदार और गांवों में बाहर से आए मौलवी उनकी धार्मिक स्वतंत्रता छीन रहे हैं। कई गांवों में तो हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि परिवार में किसी की मौत पर शव का दाह संस्कार लॉ एंड ऑर्डर का मामला बन रहा है। त्योहार मनाने के लिए पुलिस को सूचना देनी पड़ रही है। रजामंद न होने पर भी बच्चों के ख़तने का दबाव डाला जा रहा है।”
यानी स्पष्ट है कि जिहादी अपने मॉड्यूल और टास्क को पूरा करने के पूरी शिद्दत के साथ जुटे हुए हैं। पहले सत्ता और प्रशासन हर जगह घुसपैठ कर अपना ‘सुरक्षा कवच’ बनाया। जो उन्हें कानूनी कार्रवाइयों से संरक्षण दे सके। इसके बाद बेख़ौफ़ कन्वर्जन के खेल में जुट गए।
उनके निशाने पर हर राज्यों में बसे वो लोग शामिल हैं जो घुमक्कड़ प्रवृत्ति के हैं। याकि जो आज भी मुख्य धारा की भूमिका में नहीं जुड़ पाए हैं। जो अपनी विशिष्ट परंपराओं, पुस्तैनी कौशल के माध्यम से जीवन व्यतीत करते हैं।
इन समुदायों के कन्वर्जन के लिए — उनके टारगेट एकदम फिक्स्ड हैं-सबके अलग-अलग टास्क हैं जिसमें वो जुटे हुए हैं।
ये ठीक वैसा ही है जैसे 7वीं सदी से शुरू हुए इस्लामिक आक्रमण के दौरान ये सब गर्दन पर तलवार रखकर कराया जाता था। अब पूरी शातिर योजना के तहत कन्वर्जन की पूरी साज़िश को अंज़ाम दिया जा रहा है। इसी नेक्सस का जब कहीं पर्दाफ़ाश होता है तो कहीं नासिक में TCS की HR निदा ख़ान – हिंदू युवतियों, युवकों का कन्वर्जन कराने वाली गिरोह का संरक्षण करती मिलती है।
कहीं कोई यूपी से जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा बनकर आ रहा है। कहीं कोई इंदौर के कांग्रेस पार्षद अनवर डकैत के तौर पर, कहीं भोपाल के शारिक मछली परिवार के तौर पर…तो कहीं भोपाल के एक कॉलेज में जिहादी फरहान कहता है कि- ‘हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर, दुष्कर्म करना – सवाब का काम था’ …तो बुरहानपुर का जिहादी रईस खान पहले हिंदू लड़की को प्यार के जाल में फंसाता है फिर उसका गला का-ट देता है। आए दिन ऐसे मामले आपके सामने आ रहे हैं लेकिन आप – मानने को तैयार ही नहीं हैं। आपको लगता है कि ये भाजपा का एजेंडा है। यही सबसे बड़ा आत्म-घाती क़दम है। क्योंकि आप इस संकट को एड्रेस ही नहीं करना चाहते हैं।
मैं ख़बरों की दुनिया में काम करते हुए हर दिन देखता हूं कि—जितने भी जिहाद के केस आते हैं। उनमें पीड़ितों के साथ विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल के वही लोग खड़े होते हैं जिन्हें आप जैसे सेक्यूलरिज्म में डूबे लोग गालियां देते रहते हैं। क्योंकि सिस्टम – पैसों के आगे झुकता है, अपराधियों को बचाता है। कांग्रेस समेत तममा पार्टियां मौन धारण कर लेती हैं। आप और हम जैसे लोग अपने खोल में छुपे बैठे हैं, तब तक बैठे रहेंगे जब तक संकट हमारे घरों तक न आ जाए।
आप कमाकर कितनी भी धन, संपत्ति खड़ी करते रहिए । अगर आपने संकट नहीं पहचाना, उसके समूल नाश के लिए सामूहिक और सांविधानिक ढंग से कोई क़दम नहीं उठाया।तो इसके दुष्परिणाम हिन्दू समाज को ही भुगतने पड़ेंगे। क्योंकि उन्हें न तो पैसा कमाने से मतलब है, न संपत्ति कमाने से— वो बड़ी प्लानिंग में हैं। एक जिहादी आएगा और ‘लव जिहाद’ के ज़रिए एक झटके में आपका सबकुछ छीनकर चला जाएगा।
उप्र के शामली के व्यापारी के अकेले बेटे आयुष मलिक जैसे व्यापारी को लव जिहाद में फंसाकर योजना के साथ उसका कन्वर्जन करा लिया जाता है। हालांकि बाद में उसकी घर वापसी संभव हुई। लेकिन आप ये देखिए कि जिहादी कितने बड़े अभियान में जुटे हैं।
लेकिन साहेब सेक्युलरिज्म की चासनी में डूबे
आप फिर भी चुप हैं। आपके हलक़ से चीख तक नहीं निकल पाती है। ये वो मामले हैं जो पुलिस तक आ गए । इन जैसे न जाने और कितने मामले हैं जो कहीं दब गए। क्या वहां तक किसी की नज़र जा पा रही है? हालांकि इन राज्यों में बीजेपी सरकारों के होने से जिहादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाइयां भी हो रही हैं। वे जेल की सलाखों में भी जा रहे हैं। अवैध जिहादी अड्डे भी ध्वस्त किए जा रहे हैं। लेकिन क्या सबकुछ सरकारों के भरोसे छोड़ा जा सकता है? अगर इन राज्यों में बीजेपी की सरकारें न होती तो क्या ये कार्रवाइयां आपको होती दिखतीं?
सोशल मीडिया, कॉलेज, स्कूल, जिम, रेस्तरां, टूरिस्ट प्लेस, वर्किंग फील्ड, गांव-गली, मुहल्ले और शहर, मुशायरे-मंच, थियेटर-सिनेमा- क्या कहीं ऐसा बचा है जहां जिहादी— आतंक फैलाने पर अमादा न हों? वो हर जगह एक्टिव हैं जहां भी उन्हें थोड़ी गुंजाइश मिलती है वो ‘कन्वर्जन’, अस्मत लूटने, संपत्ति हथियाने और डेमोग्राफी परिवर्तन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के जुटे हैं। देश-विदेश से भरपूर फंडिंग हो रही है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को Collaboration के बदले मोटा पैसा देना। Free Of Cost उनके टूर प्लान करना। वास्तव में ये प्रमोशन के टूल नहीं हैं। बल्कि ब्रेनवाश और कन्वर्जन के लिए चिड़ियों को जाल में फंसाने जैसे विषैले दाने हैं।
ये तथ्य इसलिए नहीं बताए जा रहे हैं कि आप डरिए और माथा पकड़ लीजिए। बल्कि ये जानना इसलिए ज़रूरी है कि सचेत होइए घर-परिवार में संवाद कीजिए। बच्चों और बच्चियों को इन ख़तरों के बारे में अच्छे से बताइए। उन्हें बताइए कि ‘अमर’ बनकर पहचान बनाने वाला — ‘अब्दुल’ हो सकता है। उसके मंसूबों को लेकर सचेत रहें। अपने आस पड़ोस में नज़र रखिए। लोगों की पीड़ाओं को अपनी पीड़ा समझिए।सबके सुख-दु:ख के साथी बनिए।आपकी सामूहिक चेतना के जागृत होने की आवश्यकता है।अपने आस-पास चौकन्नी नज़र रखने की ज़रूरत है। उन समुदायों के साथ आत्मीयता के संबंध बनाने और उन्हें अपनाने की जरूरत है जो विकास के रास्ते में कहीं पीछे छूट गए। उनके लिए सरकारी योजनाओं की मदद और पेट की भूख का इंतजाम करने की आवश्यकता है।सबको अपनाने समरसता और समभाव के साथ संगठित रहने के ये गुण हिंदू समाज के मूल में हैं।बस जांम्बवंत जैसे हर हनुमान को जगाने की आवश्यकता है —
“कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना।।
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।”
ये सब हुआ तो निश्चय मानिए कि ‘लंका दहन’ भी होगा और राक्षसों का संहार भी होगा। धर्म की जय-जयकार भी होगी। बस अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारियां निभाइए।क्योंकि जिहादी आतंक और कन्वर्जन के विरुद्ध समाज की मुखर और प्रखर चेतना ही -इन आसुरी शक्तियों का नाश कर सकती है।



