बदलाव की दहलीज पर आगरा: ताज के साये से विकास के नए क्षितिज तक

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दिल्ली । आगरा शायद अब खुद को भी चौंकाने की तैयारी में है। सदियों से यह शहर एक खूबसूरत मगर कठिन दुविधा में जीता आया है। ताजमहल ने आगरा को दुनिया भर में शोहरत दी, लेकिन उसी ताज की हिफाजत के नाम पर औद्योगिक विकास पर तरह-तरह की पाबंदियां भी लगती रहीं। कारखाने शक की निगाह से देखे गए, नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरियों के जंगल से गुजरना पड़ा और हर बड़ी योजना फाइलों, समितियों, एनओसी व अदालतों के चक्कर काटती रही।
अब यह तस्वीर बदलती दिख रही है। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम जोन (लगभग 10,400 वर्ग किमी) में दो साल पुराना व्यापक प्रतिबंध हटाया। कोर्ट ने गैर-प्रदूषणकारी सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के करीब 400 लंबित आवेदनों पर टीटीजेड प्राधिकरण को विशेषज्ञ निगरानी (नीरी व सीईसी के प्रतिनिधियों की सहमति) के साथ आगे बढ़ने की अनुमति दी। इससे पर्यावरण मानकों के भीतर स्वच्छ उद्योगों के लिए रास्ता खुला है। विधानसभा चुनाव (अपेक्षित फरवरी-मार्च 2027) से पहले अगले महीने-वर्ष आगरा के इतिहास में निर्णायक साबित हो सकते हैं। कई परियोजनाएं पूरी होने के करीब हैं, अनेक निर्माणाधीन हैं और कई पाइपलाइन में हैं।
असली सवाल विकास और विरासत के बीच संतुलन साधने का है। आगरा को धुआं उगलती चिमनियां नहीं चाहिएं; उसे चाहिए स्वच्छ उद्योग, नई तकनीक, सेवा क्षेत्र, पर्यटन आधारित कारोबार और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग। ताज की हिफाजत भी जरूरी है और आगरा के नौजवानों को रोजगार भी।
आगरा की आर्थिक बुनियाद पहले से मजबूत है। यह देश के सबसे बड़े पर्यटन केन्द्रों में शामिल है। जूता उद्योग, संगमरमर की जड़ाई, हस्तशिल्प, कालीन, फाउंड्री, कांच के सामान और पेठा जैसे छोटे-मझोले कारोबार यहां की पुरानी पहचान हैं। शिक्षा क्षेत्र भी फैल रहा है। भौगोलिक स्थिति इसकी बड़ी ताकत है; दिल्ली, जयपुर, ग्वालियर, लखनऊ से सड़क-रेल कनेक्टिविटी शानदार है। यमुना एक्सप्रेसवे और अन्य मार्गों ने यात्रा का नक्शा बदल दिया है।
सबसे बड़ा बदलाव आगरा मेट्रो ला रही है। ताज ईस्ट गेट से मनकामेश्वर (करीब 6 किमी) प्राथमिक खंड मार्च 2024 से संचालित है। मनकामेश्वर से आईएसबीटी तक ट्रायल और सीएमआरएस निरीक्षण अगस्त 2026 में सफल रहे। कॉरिडोर-1 (सिकंदरा से ताज ईस्ट गेट, 14.25 किमी) नवंबर 2026 में पूर्ण संचालन के लक्ष्य पर है; सिकंदरा से ताज तक यात्रा समय घटकर करीब 28 मिनट रह जाएगा। कॉरिडोर-2 (आगरा कैंट से कालिंदी विहार) पर भी निर्माण तेज है। कभी तांगे-रिक्शे और जाम की पहचान वाला शहर आधुनिक जन परिवहन के युग में प्रवेश कर रहा है।
हवाई अड्डे का नया सिविल टर्मिनल भी उम्मीद जगा रहा है। अगस्त 2026 तक करीब 70 प्रतिशत काम पूरा; 30 नवंबर 2026 तक हैंडओवर का लक्ष्य। क्षमता बढ़कर लगभग 1400 यात्रियों तक पहुंचेगी, मल्टीलेवल पार्किंग, एयरोब्रिज और आधुनिक सुविधाएं होंगी। बेहतर कनेक्टिविटी पर्यटकों को दिल्ली से दिनभर की यात्रा के बजाय दो-तीन दिन रुकने के लिए प्रेरित कर सकती है।
सड़कों पर चौड़ीकरण, फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज, नए पुल और ड्रेनेज योजनाएं शहर की सूरत बदल रही हैं। यमुना पर मेट्रो पुल समेत कई पुलों का काम आगे बढ़ रहा है। ग्रेटर आगरा की टाउनशिप और अटल टाउनशिप योजनाएं भीड़भाड़ वाले पुराने शहर से बाहर विकास फैलाने की कोशिश हैं; कई टाउनशिप में प्लॉट आवंटन प्रक्रिया चल रही है।
शिल्पग्राम के पास यूनिटी मॉल (लगभग 128 करोड़ रुपये) उत्तर प्रदेश के ओडीओपी व जीआई टैग उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प को बड़ा बाजार दे सकता है। अगस्त 2026 तक करीब 42 प्रतिशत काम पूरा; नवंबर लक्ष्य है, हालांकि गति पर प्रशासनिक निगरानी बढ़ी है। पर्यटन अब सिर्फ ताजमहल तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आगरा किला, फतेहपुर सीकरी, मेहताब बाग, बटेश्वर और ब्रज क्षेत्र मिलकर बड़ा सर्किट बना रहे हैं। हेरिटेज वॉक, होमस्टे और बेहतर सुविधाएं रुकने की अवधि बढ़ा सकती हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम (पहले मुगल म्यूजियम का नाम बदला गया) तेज गति से तैयार हो रहा है; लक्ष्य 2026 का अंत। कोठी मीना बाजार में शिवाजी स्मारक (50 फुट प्रतिमा, म्यूजियम आदि) पर भी काम आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में एसएन मेडिकल कॉलेज को मिनी एम्स स्तर पर विकसित किया जा रहा है: किडनी ट्रांसप्लांट शुरू, क्रिटिकल केयर यूनिट और अन्य ब्लॉक निर्माणाधीन; पूर्ण रूप 2027 तक अपेक्षित। लेडी लॉयल अस्पताल का विस्तार भी चल रहा है। साइंस पार्क व नक्षत्रशाला (लगभग 40 करोड़) भूमि संबंधी बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ रहा है। कैलाश मंदिर का कायाकल्प चरणबद्ध तरीके से हो रहा है। हाईकोर्ट बेंच की मांग अभी भी लंबित है और अधिवक्ता आंदोलनरत हैं।
ताज के पास प्रस्तावित बैराज/रबर डैम वर्षों से एनओसी और अध्ययनों में अटका है; बजट आवंटित होने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ। पर्यावरण संबंधी चिंताएं जायज हैं, मगर फाइलों को धूल खाने देना भी संरक्षण नहीं कहलाता। ब्यूरोक्रेसी की सुस्ती विकास की बड़ी बाधा बनी हुई है।
आगरा शहर की आबादी लाखों में है; मेट्रो क्षेत्र अनुमानित 25 लाख से अधिक। तेज बढ़ोतरी ने मकान, पानी, सीवर, सड़क, कचरा प्रबंधन और परिवहन पर दबाव डाला है। समाधान शहर की बढ़त रोकना नहीं, बल्कि समझदारी से बढ़ाना है।
अगले बारह महीने अहम हैं। मेट्रो का विस्तार, एयरपोर्ट टर्मिनल, नई सड़कें-पुल, टाउनशिप, पर्यटन परियोजनाएं और स्वच्छ उद्योगों पर नीतिगत फैसले मिलकर तकदीर बदल सकते हैं। आगरा चौराहे पर खड़ा है; एक रास्ता जाम, प्रदूषण और लालफीताशाही की तरफ; दूसरा स्वच्छ उद्योगों, बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार और आधुनिक विकास की ओर। अगर स्वच्छ उद्योग, आधुनिक बुनियादी ढांचा और पर्यावरण संरक्षण हमसफर बन जाएं, तो आगरा सिर्फ ताज का शहर नहीं, उत्तर भारत का बड़ा विकास केन्द्र बन सकता है।

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Brij Khandelwal

Brij Khandelwal

Brij Khandelwal of Agra is a well known journalist and environmentalist. Khandelwal became a journalist after his course from the Indian Institute of Mass Communication in New Delhi in 1972. He has worked for various newspapers and agencies including the Times of India. He has also worked with UNI, NPA, Gemini News London, India Abroad, Everyman's Weekly (Indian Express), and India Today. Khandelwal edited Jan Saptahik of Lohia Trust, reporter of George Fernandes's Pratipaksh, correspondent in Agra for Swatantra Bharat, Pioneer, Hindustan Times, and Dainik Bhaskar until 2004). He wrote mostly on developmental subjects and environment and edited Samiksha Bharti, and Newspress Weekly. He has worked in many parts of India.

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