प्रिय रवीश, आपकी कार के माइलेज को लेकर मेरी चिंता नहीं है। कार के माइलेज में #E20 से पुरानी गाड़ियों के माइलेज में कमी आने की बात सामने आ ही रही है। आपका थोड़ा अधिक है तो वो स्वाभाविक ही है, लेकिन मेरी चिंता इस बात को लेकर है कि, महीने में सिर्फ 2-3 दिन आप बाहर निकलते हैं। देश-समाज से आप पूरी तरह कट चुके हैं, यह आपके वक्तव्यों से आसानी से पता चलता है, लेकिन इतना कट जाने की वजह यही है कि, आप अपने घर में, अपने विचारों के दुश्चक्र में भयानक फंस गए हैं। इस तरह से आप बीमार, बहुत बीमार हो जाएंगे। बाहर निकलिए, लोगों से मिलिए। वर्तमान में जीने से अच्छा महसूस होगा। आप टाइम मशीन में अभी भी यूपीए शासनकाल में फँसे हैं। निकल आइए रवीश जी। प्लीज
यह प्रतिक्रिया श्री त्रिपाठी ने रवीश कुमार के एक्स पर की गई टिप्पणी पर की थी :
रवीश लिखते हैं :
मुझे कार की बहुत ज़रूरत नहीं पड़ती है। महीने में दो तीन दिन ही घर से निकलता हूँ। आज कई दिनों बाद कार चलाने गया तो पता चला कि मेरी कार का माइलेज 14km/lसे घट कर 9.6km/lit हो गया है। मेरी कार 2024 की है। 5.4 किलोमीटर प्रति लीटर कम हो गया है। परिवार के लोग इस्तेमाल करते हैं। तेल का ख़र्चा काफ़ी बढ़ गया है। मुझे लगता है कि E20 भी नोटबंदी है। इसके ज़रिये कार और बाइक चालकों पर निष्ठा प्रयोग हो रहा है कि वे किस हद तक मोदी सरकार को सपोर्ट कर सकते हैं। ज़्यादा पैसे ख़र्च कर घटिया ईंधन ख़रीदने और कार डैमेज होने पर चुप रह सकते हैं। मोदी सरकार का प्रयोग सौ फीसद सफल हो गया है। जिस स्केल पर माइलेज गिरा है, मनमोहन सिंह की सरकार होती तो सारे गोदी संपादक पेट्रोल पंप से लाइव रिपोर्ट कर रहे होते। नोट चोरी, वोट चोरी, चंदा चोरी, पेपर चोरी के बाद तेल चोरी को भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह काम केवल मोदी सरकार कर सकती है। उसके समर्थकों का जवाब नहीं। जो लोग 500 रुपया लीटर पेट्रोल ख़रीदने का सपना देख रहे थे, E20 से पूरा करने का मौका मिल गया है। पेट्रोल और कार की मरम्मत का ख़र्चा जोड़ कर इतना हो जाता होगा। सरकार चाहे तो एक और प्रयोग कर सकती है। पेट्रोल पंप पर मोदी समर्थक 38 प्रतिशत वोटर के लिए E20 का विकल्प दे और मोदी विरोधी 62 प्रतिशत को E10 का विकल्प दे। मुझे लगता है कि डिफ़ेंडर वाली मोहतरमा भी निष्ठा नहीं बदलेंगी और E20 ही भराएँगी। अगर ये हो जाए तो मोदी समर्थकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। 😎



