गया के मोमोज विक्रेता रेहान अंसारी: यौन शोषण का सुनियोजित जाल

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पटना। बिहार के गया जिले के बांकेबाजार थाना क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है जो न केवल स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा कर रहा है, बल्कि समाज में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मुख्य आरोपी रेहान अंसारी मोमोज की दुकान चलाता था। पुलिस ने उसे हाल ही में पटना से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने नाबालिग लड़कियों को फ्री मोमोज के लालच में फंसाया, उनके साथ यौन शोषण किया और आपत्तिजनक वीडियो बनाकर वायरल किए।
रेहान अंसारी बांकेबाजार में मोमोज और मोबाइल की दुकान चलाता था। जांच के अनुसार, वह स्कूल-कोचिंग जाने वाली लड़कियों पर नजर रखता था। फ्री या सस्ते मोमोज देकर उनका विश्वास जीतता, QR कोड से पेमेंट के दौरान नंबर हासिल करता और फिर प्रेम जाल बिछाता। जो लड़कियां नहीं फंसतीं, उन्हें छोड़ देता, लेकिन जो फंस जातीं, उनके साथ वीडियो कॉल पर अश्लील हरकतें करवाता और फिर पहाड़ी इलाके में बुलाकर शोषण करता। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसने स्टैंड खरीदा था और वीडियो रिकॉर्डिंग की तैयारी रखता था।
पुलिस के अनुसार, एक नाबालिग लड़की के भाई ने हिम्मत दिखाई और FIR दर्ज कराई। वीडियो वायरल होने के बाद मामला उजागर हुआ। FIR में POCSO एक्ट, IT एक्ट और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। कुछ सूत्रों में SC/ST एक्ट का भी जिक्र है। पुलिस ने SIT गठित की और तकनीकी साक्ष्यों, लोकेशन ट्रैकिंग तथा कॉल डिटेल्स के आधार पर रेहान को पटना से दबोचा, जहां वह छिपा हुआ था और आगे भागने की तैयारी में था।
जांच में क्या सामने आया?
अब तक 10 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने की खबरें हैं। पुलिस अन्य पीड़ित लड़कियों की पहचान करने में लगी है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि रेहान ने सोची-समझी रणनीति अपनाई थी। वह लड़कियों को पहाड़ी इलाके (बाबा धाम के आसपास) ले जाता और वहां घटना को अंजाम देता। कुछ दावों में कहा गया कि उसके टारगेट पर 20 से ज्यादा लड़कियां थीं, जिनमें अधिकांश नाबालिग और कमजोर वर्ग से थीं।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की कुंठा या अपराध नहीं लगता। इसमें यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रसारण जैसी संगठितता दिखती है। पुलिस पूछताछ में यह भी जांच कर रही है कि क्या इसमें कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं। रेहान की उम्र करीब 18-19 साल बताई जा रही है, लेकिन उसकी हरकतें परिपक्व अपराधी जैसी हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया और सामाजिक प्रभाव
घटना सामने आने के बाद बांकेबाजार में भारी आक्रोश फैला। लोगों ने बाजार बंद रखा और सख्त कार्रवाई की मांग की। गया की पवित्र भूमि पर ऐसी घटना ने हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव भी बढ़ाया, क्योंकि कई रिपोर्टों में पीड़िताओं को हिंदू या महादलित लड़कियां बताया गया। कुछ लोग इसे साम्प्रदायिक एंगल से देख रहे हैं, जबकि पुलिस इसे मुख्य रूप से यौन अपराध के रूप में जांच रही है।
बिहार में लड़कियों की सुरक्षा, खासकर नाबालिगों की, लंबे समय से चुनौती रही है। मोमोज जैसी छोटी चीज के लालच में फंसना दर्शाता है कि युवा पीढ़ी कितनी असुरक्षित है। अभिभावकों को सतर्क रहना चाहिए। बच्चों को अजनबियों से दूरी रखने, फ्री चीजों के प्रलोभन से बचने और किसी भी असहज स्थिति में तुरंत बताने की सलाह दी जा रही है।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की चुनौतियां
पुलिस ने रेहान को न्यायालय में पेश किया है। आगे की जांच में वीडियो की authenticity, अन्य पीड़ितों की संख्या और संभावित गैंग की भूमिका सामने आएगी। Magadh Range IG ने फास्ट-ट्रैक ट्रायल का आश्वासन दिया है।
यह मामला सिर्फ रेहान का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। जहां एक तरफ युवा बेरोजगारी और नैतिक पतन की चर्चा होती है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने का खतरा बढ़ गया है। IT एक्ट के तहत सख्ती जरूरी है।
गया जैसे धार्मिक शहर में ऐसी घटना पवित्रता पर सवाल उठाती है। स्थानीय प्रशासन को सुरक्षा बढ़ानी चाहिए, खासकर पहाड़ी और जंगल वाले इलाकों में। स्कूलों-कोचिंग में जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए।
रेहान अंसारी का मामला यौन कुंठा से आगे का लगता है — यह सुनियोजित शोषण का उदाहरण है। पुलिस की तेज कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन न्याय तभी पूरा होगा जब सभी पीड़ितों को इंसाफ मिले और दोषी को सख्त सजा हो। समाज को भी सोचना होगा कि हम अपनी बेटियों को कितना सुरक्षित महसूस करा पा रहे हैं।
अफवाहों से बचें, आधिकारिक जांच पर भरोसा रखें। बिहार की बेटियां सुरक्षित रहें, यही कामना है।

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