आरिफ मंसूरी तुम्हारें ‘छद्म वामपंथ’ का ढोल फट गया…

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विवेक गुप्ता

खुर्जा (उप्र) : आरिफ मंसूरी तुम मुझे 2 सितंबर 2024 को NDTV ऑफिस, मैक्स स्क्वायर नोएडा सेक्टर 129,हाईवे वाली साइड चाय की दुकान के पास मिले थे. तुम्हारें साथ तुम्हारीं जैसी हरकतों वाला 54 प्वाइंट सेक्सुअल हैरेसमेंट का फीमेल से मेलधारी रविकांत ओझा भी था. शायद तुम्हें ध्यान नहीं होगा लेकिन मुझे 10 साल पुरानी बातें भी हूबहू याद रहती हैं.

तब तुमसे मैंने कहा था,”आरिफ भाई अगर तुम्हारा मेरे साथ की गई साजिश में हाथ नहीं है,किसी को मेरे खिलाफ भड़काने में योगदान नहीं है तब तुम अपने धर्म की पवित्र किताब की कसम खा जाओ. जिसके बाद तुम हंसते हुए बोले थे,शायद तुम मुझे जानते नहीं,मैं धर्म,किताब को बिल्कुल नहीं मानता.”
वर्तमान में News24 में कथित रूप से काम कर रहे आरिफ मंसूरी जी बताइए अभी-अभी आपका पीतल नगरी से निकाह हुआ है,क्या आपका निकाह किसी धर्म विशेष की तर्ज़ पर हुआ? क्या आपने मुस्लिम धर्म के हिसाब से निकाह किया? क्या आपने ईद पर नमाज पढ़ी? क्या आपने अपने घर में किसी को नमाज पढ़ने से रोका? क्या आपने अपने घर के किसी सदस्य को वामपंथी बनाया? क्या आप झटके का गोश्त खा सकते हैं? इससे आगे लिख दूंगा तो मेरे सिर को काटने पर एक करोड़ का ईनाम रख दिया जाएगा.
अगर इनमें से एक का जवाब भी हां हैं,फिर आप झूठा प्रोपेगेंडा क्यों फैलाते हैं कि ना मैं कोई धर्म मानता हूं और ना ही किसी धार्मिक किताब को. अब छद्म वामपंथ की आड़ में सनातन की आलोचना और सनातनी को भड़काने का काम नहीं चलेगा. साथ ही आपका जो हिन्दू लड़कियों को लेकर गंदा इतिहास रहा है वो भी अब आगे नहीं बढ़ पाएगा. एक भी नई खबर सामने आई तो फिर भगत सिंह बनते देर नहीं लगेगी मुझे.
छद्म वामपंथी(मुस्लिम और हिंदू) उद्योगपति,पूंजीवाद और सामंतवाद का विरोध करते हैं लेकिन अडानी जी Adani Group  और अंबानी जी की मीडिया कंपनी NDTV,News18 India में मोटी सैलरी पर जॉब करते हैं.
बराबरी और हक की बात करने वाले छद्म वामपंथी मीडिया संस्थानों में अपने जूनियरों के ऊपर तानाशाही करते हैं अपना हुक्म बजाते हैं,उनका शोषण करते हैं,जमकर पक्षपात,अन्याय,जातिवाद, अत्याचार और भ्रष्टाचार करते हैं. यानी इनका पूंजीवाद और सामंतवाद का विरोध भी छद्म ही है,तभी इनको कहता हूं “छद्म वामपंथी”.
ये छद्म वामपंथी जमकर ग्रुपिंग करते हैं. क्षेत्रवाद और जातिवाद के रथ पर चढ़कर हक को रौंदते हैं. ये लोग अपने नाकाबिल लोगों को आगे बढ़ाते हैं.
छद्म वामपंथी देशबंधु सिंह की छत्रछाया में सनातन और हिंदू बहन, बेटियों,लड़कियों की अस्मिता को डेंट पहुंचाने वाले छद्म मुस्लिम वामपंथी आसिफ मंसूरी से पूछना चाहता हूं कि तुम बड़े वाले वामपंथी बनते हो,तुमने अपने घर में कितनी शादियां दलित, आदिवासी और पिछड़े हिंदुओं के साथ की हैं?
चलो आरिफ ये ही बता दो सवर्ण हिन्दुओं के लड़कों के साथ कितनी शादियां की हैं? या कम से कम ये बता दो शिया समाज और अब्बासी,अलवी,तेली,गद्दी,कुरैशी,सैफी,सलमानी,मुस्लिम राजपूत-त्यागी,तुर्कों के साथ अन्य पिछड़ी मुस्लिम जातियों के लड़कों के साथ कितनी शादियां या निकाह किए हैं?
जवाब दो या वामपंथी नाम का चोला ओढ़कर “छद्म वामपंथी” केवल हिंदुओं और सनातन धर्म को गाली देने के लिए बने थे क्योंकि केवल मुसलमान बनकर हिंदुओं को गाली देना उनके धर्म की आलोचना करना आसान थोड़े ही होता है.
क्या तुम दलित हिंदुओं का ब्रेनवॉश करके उनके अंदर सनातन के खिलाफ ज़हर भरने के लिए वामपंथ का ढोंग कर रहे हो? क्योंकि तुम्हें कभी मुसलमानों के अंदर के जातिवाद/पठानवाद/फिरकावाद पर बोलते,लिखते नहीं देखा. आरिफ तुमने छद्म वामपंथी बनने का ढोंग इसलिए किया कि इस विचारधारा के साथ नयी लड़कियों को आधुनिकता का झूठा पाठ पढ़ाकर,अपने पद का दुरुपयोग करके उनकी थोड़ी-बहुत मदद करके उन्हें बहकाकर,भड़काकर अपने फेवर में कर लोगे और आगे मौका मिलने पर अपने नापाक मंसूबों को कामयाब कर लोगे? इस बीच अगर कोई तुम्हारी राह में कांटा बना तो अपने छद्म वामपंथी साथियों के साथ मिलकर उसके साथ साजिश कर दोगे,उसे ही किसी की नजर में गलत साबित कर दोगे.
आरिफ क्या तुमने वामपंथ का चोला इसलिए ओढ़ा है कि इस विचारधारा में शराब,गांजा,शबाब और अय्याशी की और जरूरतें आसानी से पूरी हो जातीं हैं? या फिर तुम इसलिए वामपंथी बने जिससे मीडिया में नाकाबिल होते हुए भी वामपंथवाद की बदौलत टिके रहोगे,क्योंकि मीडिया में वामपंथियों का बोलबाला है. हां ये बात अलग है देश में राष्ट्रवादी सरकार आने के बाद वो छुप गए हैं और अवसरवादी बन गए हैं. लेकिन उन्हें मौका मिलकर खुलकर आने में देर नहीं लगेगी.
छद्म वामपंथी खाएंगे भी उद्योगपतियों का और घर जाकर गरियाएंगे भी उद्योगपतियों को. यहां पर अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना की फिल्म “नमक हराम” याद आ गई और उसका एक गाना भी “मैं शायर बदनाम” जो आज की परिस्थिति में होता “मैं ठरकन बदनाम”.
एनडीटीवी में काम करने वाले देशबंधु सिंह,रविकांत ओझा,संतोष कुमार और समरजीत सिंह तुम चारों भी छद्म वामपंथी हो,जो सवाल आरिफ मंसूरी से पूछे हैं वो सवाल तुम चारों के लिए भी हैं,जवाब दो? ये सवाल देश के सभी छद्म वामपंथियों से भी हैं,जानता हूं जिसका जवाब वो नहीं दे पाएंगे.
मुस्लिम वामपंथियों से एक सवाल ये भी कि क्या आप हर तरह का गोश्त खाते हैं? हर तरह का मतलब हर तरह का हलाल का भी और झटके का भी. और हर जानवर का भी,समझ रहे हैं ना. क्या आप अंतिम संस्कार के लिए दफनाने के साथ अग्नि संस्कार में भी विश्वास  रखते हैं.
एक बात और आप किसी मुस्लिम नाम वाले वामपंथी या किसी मुस्लिम की असलियत सामने लाइए तो कोई भी मुस्लिम आपका सपोर्ट नहीं करेगा. अंदरखाने वो अपने धर्म वाले के साथ ही रहेगा,उसकी मदद करेगा. उसकी इमेज बचाने के लिए मौका मिलते ही उसकी पोल खोलने वाले के खिलाफ ही बोलेगा.
अंत बहुत जरूरी है चाहे कोई सवर्ण किसी दलित या पिछड़े के लिए जातीय भेदभाव की भावना रखें या फिर कोई दलित किसी अन्य दलित जाति,आदिवासी समाज के प्रति ऐसी भावना रखें. या फिर कोई पिछड़ा,किसी दलित या अन्य पिछड़ा के लिए जाति को लेकर हीन या श्रेष्ठ होने की भावना रखे. जातिवाद के साथ सामंतवाद, क्षेत्रवाद,मित्रवाद,हकमारी और किसी भी तरह के पक्षपात का भी अंत होना चाहिए.
आज के लड़के और लड़कियों को धर्म को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महापुरुषों,सम्मान के लिए जौहर करने वाली माताओं के स्वर्णिम इतिहास से सीखने की जरूरत है. सबका सम्मान करो लेकिन उनकी सोच और जेहनियत पर नजर जरूर रखो,सावधानी जरूर बरतो.
कट्टर हिंदू बिल्कुल मत बनो क्योंकि हिंदू धर्म ही सहिष्णुता का है हां इतिहास और वर्तमान के हालात से सीखते हुए सावधान हिंदू जरूर बनो. किताबों के साथ आंखों को पढ़ने की जरूरत है. हर बार जो दिखाया जाता है वो सच नहीं होता ये समझने की जरूरत है.
इस पोस्ट में लिखीं बातें पूरी तरह से प्रामाणिक हैं,रिसर्च और तथ्यों पर आधारित हैं. सब-कुछ तो यहां पर लिखा भी नहीं जा सकता. बस यही कहना है सावधानी बरतें,थोड़े से फायदे के लिए अपने धर्म और सच से समझौता ना करें. कट्टर नहीं लेकिन सावधान हिंदू बनने की सख्त जरूरत है.
अगली पोस्ट संतोष कुमार के दम पर पत्रकारिता,खबर और हिन्दी की टांग तोड़ने वाले समरजीत सिंह पर जल्दी ही.(लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। इनसे मीडिया स्कैन की सहमति या समर्थन अनिवार्य नहीं है।यदि इस लेख पर आपकी कोई प्रतिक्रिया है अथवा दूसरे पक्ष को अपनी बात रखनी हो, तो कृपया mediainvite2017@gmail.com पर भेजें)

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