“चुप रहने का समय नहीं रहा” – कॉकरोच जनता पार्टी और विदेशी फंडिंग का आरोप
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन भारतीय राष्ट्रगान और भजन गाकर भारत और भारतीय समुदाय के बीच जानी–पहचानी नाम बन चुकी हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा कि “चुप रहने का समय नहीं रहा।” उनका आरोप है कि अभिजीत दिपके और उनकी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को अमेरिका के उन डोनर्स से फंडिंग मिल रही है, जो प्रधानमंत्री मोदी और उनके नेतृत्व वाले भारत के भविष्य के खिलाफ हैं।
नया नहीं है पैटर्न
- मिलबेन के अनुसार यह कोई नया पैटर्न नहीं है। प्रगतिशील/वामपंथी/सेकुलर विचार वाले, अमेरिका में पढ़े-लिखे व्यक्ति को रेडिकलाइज कर अपने देश वापस भेजा जाता है और फंडिंग देकर अराजकता खड़ी की जाती है। विकास रुक जाए, शासन बिखर जाए, युवा भ्रमित हो जाएं-यही लक्ष्य होता है।
- वे कहती हैं कि ऐसे प्रयास पूरी तरह सफल नहीं होते, लेकिन देश की रफ्तार जरूर धीमी कर देते हैं। ‘कॉकरोच’ का स्वभाव साफ जगह पर नहीं पनपना है। गंदगी, अंधेरा और अफरा-तफरी में ही उसे आराम मिलता है। एक व्यंग्य से शुरू हुआ आंदोलन अब बड़े विरोधों में बदल गया है।
- परीक्षा लीक, बेरोजगारी, चुनाव आयोग-जहां अस्थिरता का मौका दिखे, वहीं यह फैल जाता है। विदेश की पढ़ाई और पुराने राजनीतिक जुड़ाव वाले लोग जब अचानक ‘युवाओं की आवाज’ बन जाते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि असली मकसद सुधार है या सिर्फ व्यवधान।
पिछले साल राहुल गांधी पर उनकी तीखी टिप्पणी
- मिलबेन की यह हालिया टिप्पणी उनकी पहले की राय से मेल खाती है। पिछले साल अक्टूबर 2025 में, जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया था कि वे डोनाल्ड ट्रंप से “डरे” हुए हैं (ट्रंप के उस दावे के बाद कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा), तब मिलबेन ने सीधे राहुल गांधी को संबोधित करते हुए लिखा था:
- “आप गलत हैं, राहुल गांधी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रपति ट्रंप से नहीं डरते। पीएम मोदी विजनरी हैं और अमेरिका के साथ उनकी कूटनीति रणनीतिक है। जैसे डोनाल्ड ट्रंप हमेशा अमेरिका के हितों को पहले रखेंगे, वैसे ही पीएम मोदी भारत के लिए जो सबसे अच्छा है वही करेंगे। और मैं इसकी सराहना करती हूं। यही राष्ट्राध्यक्ष करते हैं। वे अपने देश के लिए जो सबसे अच्छा हो वही कहते और करते हैं।
- मैं आपसे इस तरह की नेतृत्व क्षमता समझने की उम्मीद नहीं करती क्योंकि आपके पास भारत के प्रधानमंत्री बनने की समझ ही नहीं है। बेहतर होगा कि आप अपनी ‘आई हेट इंडिया’ टूर पर लौट जाएं, जिसका दर्शक सिर्फ एक है-आप खुद।”
- यह टिप्पणी राहुल गांधी के उस पोस्ट के जवाब में आई थी जिसमें उन्होंने मोदी पर ट्रंप से डरने, बधाई संदेश भेजते रहने और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दों पर चुप रहने के आरोप लगाए थे। मिलबेन ने साफ कहा कि राज्य प्रमुख अपने देश के हित में फैसले लेते हैं-यह समझना हर किसी के बस की बात नहीं।
मोदी नहीं झुकेंगे, युवा देशभक्तों को उठना होगा
- मिलबेन अब भी वही बात दोहरा रही हैं। वे कहती हैं कि मोदी 25 साल की सेवा और तीन बार की चुनावी जीत के बाद इन विदेशी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे। अब जरूरत है भारत की मिट्टी पर जन्मे, पले-बढ़े और शिक्षित लोगों की। शांतिपूर्ण, संगठित और स्वदेशी काउंटर मूवमेंट की। लोकतंत्र की रक्षा सिर्फ नारे लगाने से नहीं होती। उसे उन ताकतों से बचाना पड़ता है जो बाहर से पैसा लेकर अंदर अराजकता बोती हैं।
- कॉकरोच को कुचलने की जरूरत नहीं। उसे रोशनी में लाना पड़ता है। जब युवा देशभक्त खुद उठकर खड़े होंगे, तो विदेशी फंडिंग वाली विघटनकारी भावना खुद सिमट जाएगी। कॉकरोच की अंधेरी कोनों में घुसने की आदत है। उसे वहां से निकालने का काम हम सबका है।
- मिलबेन की ये टिप्पणियां-चाहे राहुल गांधी पर पिछले साल की हो या अभिजीत दिपके और CJP पर अभी की गई-इनका सार एक ही है: भारत के नेतृत्व और युवाओं को बाहरी हस्तक्षेप और अस्थिरता फैलाने वाली ताकतों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
हरिश साल्वे का ताज़ा आरोप: दिपके और अन्य नाम
- वरिष्ठ वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरिश साल्वे ने हाल में कहा कि भारत में कुछ विरोध प्रदर्शनों के पीछे विदेशी फंडिंग और बाहरी हस्तक्षेप है। उन्होंने अमेरिका को विशेष रूप से उल्लेख किया और नेपाल, श्रीलंका तथा बांग्लादेश में हुई उथल-पुथल का उदाहरण दिया।
- साल्वे ने साफ नाम लिए-अभिजीत दिपके, सौरव दास और कुछ यूट्यूबर्स। उनका सवाल था कि ये लोग विरोध आयोजित करने के लिए धन कहां से लाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी ताकतें भारत की प्रगति रोकने की कोशिश कर रही हैं।
- यह आरोप मिलबेन के पैटर्न वाले दावे से मेल खाता है। दिपके बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़े-लिखे हैं और CJP के जरिए युवा आंदोलन खड़ा करने वाले चेहरे बन चुके हैं।



