अतुल गंगवार: ‘मैं निदा’ से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

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दिल्ली। अतुल गंगवार का भारतीय मीडिया में सफर हमेशा शांत दृढ़ता और भाषा व संस्कृति में गहरे जुड़ाव वाली कहानी कहने की ललक से भरा रहा है। यह सफर तब एक महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुँचा जब उनके वृत्तचित्र मैं निदा को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ कला और संस्कृति वृत्तचित्र का सम्मान मिला। यह फिल्म पद्मश्री उर्दू कवि निदा फाजली का जीवनीपरक चित्रण है, जो सादगी और गहराई के साथ दुनियाओं को जोड़ने वाली साहित्यिक आवाज़ को जीवंत करती है। राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान न केवल उनका व्यक्तिगत उत्कर्ष है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के प्रति उनकी लंबी प्रतिबद्धता की पुष्टि भी है।

टेलीविजन और साहित्य से जुड़ा करियर

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने वाले गंगवार दो दशक से अधिक समय से टेलीविजन उद्योग से जुड़े हैं। उनका पेशेवर सफर बी.ए.जी. फिल्म्स में अनुराधा प्रसाद के मार्गदर्शन में शुरू हुआ। वहाँ उन्होंने लेंस आई, हिट थी हिट है और बिरला यामाहा हाई-5 जैसी कई श्रृंखलाओं का निर्देशन किया। इन शुरुआती अनुभवों ने उन्हें दृश्य कहानी कहने की कला और प्रसारण मीडिया की तेज रफ्तार वाली दुनिया में काम करने का अनुशासन सिखाया।

ग्यारह वर्षों तक उन्होंने सहारा समय चैनल में प्रोग्राम प्रोड्यूसर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने फिल्म-आधारित मनोरंजन से लेकर समाचार और समसामयिक मामलों तक विविध सामग्री संभाली। उन्होंने विभिन्न विषयों पर वृत्तचित्र तैयार और संपादित किए तथा अदबी कॉकटेल और उर्दू बाजार जैसे इन्फोटेनमेंट कार्यक्रम बनाए, जो साहित्य और भाषा के प्रति उनके लगाव को दर्शाते हैं। स्क्रीन पर वे चुनाव आधारित व्यंग्यात्मक कार्यक्रमों के एंकर और प्रस्तुतकर्ता के रूप में परिचित चेहरा बने। ताऊ की खरी-खरी, शब्द बाण और चुनावी चाय की चुस्की—जिसमें उन्होंने स्वर्गीय पद्मश्री टॉम ऑल्टर के साथ सह-मेजबानी की-जैसे कार्यक्रमों में उनकी तीक्ष्ण दृष्टि, गर्मजोशी और हास्य का अनूठा मिश्रण दिखता है।

वृत्तचित्र, सिनेमा और सांस्कृतिक विरासत

टेलीविजन के अनुभव से स्वाभाविक रूप से सिनेमा में उनकी रुचि विकसित हुई। उनकी कहानी को मुआवजा (पैसा जमीन का) फिल्म के लिए अपनाया गया, जिसमें अनुपम खेर ने अभिनय किया। उन्होंने अतुल पांडे द्वारा निर्मित जलेबी कल्चर की कहानी लिखी है और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक उज्ज्वल चटर्जी के लिए हू किल्ड दीनदयाल उपाध्याय की पटकथा पर काम कर रहे हैं। इन कथात्मक परियोजनाओं के साथ-साथ वे वृत्तचित्र बनाने का काम जारी रखे हुए हैं। मैं निदा को 2024 में गोवा में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया, राजस्थान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और जागरण फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र का पुरस्कार मिला तथा मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 में आधिकारिक चयन हासिल किया। उनकी एक अन्य कृति शत शत अटल, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर आधारित जीवनीपरक वृत्तचित्र, वेव्स ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। वे 2026 में रिलीज होने वाली फीचर फिल्म दुल्हनिया ले आएगी के सह-निर्माता भी हैं।

निर्माण के अलावा गंगवार फिल्म समुदाय में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 51वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारत और 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में गैर-फीचर फिल्म श्रेणी के ज्यूरी सदस्य के रूप में सेवा दी है। वे मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की चयन समिति के सदस्य हैं और 2018 में द्वितीय चित्र भारती फिल्म महोत्सव के ज्यूरी में शामिल रहे। वर्तमान में वे वरदान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 के महोत्सव निदेशक हैं तथा भारतीय चित्र साधना के राष्ट्रीय सचिव का पद भी संभाल रहे हैं। वे बोल बिंदास और बिहार अपडेट.कॉम नामक समाचार पोर्टलों के प्रबंध संपादक के रूप में भी काम कर रहे हैं।

बीस से अधिक वर्षों के इस सफर में अतुल गंगवार ने भारतीय मीडिया के बदलाव को अपनी आँखों से देखा है, फिर भी साहित्य, संस्कृति और विचारपूर्ण कहानी कहने से जुड़े रहे। मैं निदाके लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार उस करियर की सार्थक पहचान है, जो राष्ट्र की कलात्मक और बौद्धिक आवाज़ों को सहेजने और प्रस्तुत करने के लिए समर्पित रहा है।

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