कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल
रायपुर : संघ वर्षों से विरोध, हिंसा की परिस्थितियों के बीच संघर्ष करते हुए कार्य कर रहा है । 30 सितंबर 2026 को केरलम (केरल) में RSS की शाखा में गीत गा रहे स्वयंसेवकों पर CPM- कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी और DYFI के गुंडों ने हमला किया । उनके साथ मारपीट की। पय्यनूर संघ जिले के चेरपूझा खंड के अरवमचल की ये घटना है। जब CPM-DYFI के इन गुंडों ने हमला किया। उस समय शाखा में बाल स्वयंसेवक भी मौजूद थे। शाखा में जितने लोग थे अगर वो वामपंथियों की हिंसा वाली शैली में प्रतिकार करते तो हो सकता है कि — वहां कोई दूसरी परिस्थिति उत्पन्न हो जाती। किन्तु Rss के स्वयंसेवकों ने हिंसा का रास्ता नहीं चुना क्योंकि संघ का यही स्वभाव है। वो शांति के साथ बस समाज का संगठन करने में जुटे रहते हैं।
सोचिए, अगर यही कुछ भाजपा शासित राज्यों में इकोसिस्टम गैंग के साथ धोखे से हुआ होता तो अब तक लोकतंत्र, संविधान सब ख़तरे में आ जाते। मीडिया से लेकर अख़बारों के पन्ने रंग जाते। पेड इन्फ्लुएंसर के ज़रिए सोशल मीडिया में क्रांतियां आ जातीं। वामी – रुदालियों का शोर थमता नहीं। प्रोटेस्ट की बाढ़ आ जाती। प्रधानमंत्री मोदी को तानाशाह घोषित करने का अभियान चल पड़ता। माओ की स्टाइल में राहुल गांधी – संविधान लिखी बुकलेट लेकर चल पड़ते।
किन्तु ये हिंसक हमला – केरलम में हुआ जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF सरकार है। वी. डी सतीशन -कांग्रेस के मुख्यमंत्री हैं। इसलिए वहां लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति, मौलिक अधिकारों आदि की स्वतंत्रता भला क्यों होनी चाहिए? ऊपर से Rss पर आक्रमण करना जिस कांग्रेस का घोषित एजेंडा हो।वहां ऐसी घटनाओं पर आश्चर्य भी क्यों किया जाना ? वैसे कांग्रेस ने CPM को हराकर ही केरलम में सत्ता में आई है। किन्तु यहां मामला RSS का है इसलिए ये परस्पर विरोधी होने के बावजूद भी एक हैं।क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व वाले कम्युनिस्ट इकोसिस्टम का उद्देश्य है – संघ का दमन करना।
हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जहां-जहां भी वामपंथी रहते हैं। वो हमेशा से अपने विपरीत विचारों और उनसे जुड़े हुए लोगों की ह-त्या करने पर अमादा रहते हैं। किन्तु संविधान का पोस्टर और मुखौटा लेकर खड़े होते हैं। कम्युनिस्ट और वामपंथियों को आ-तंकी क्यों कहा जाता है? वो इसीलिए क्योंकि यही इनका चरित्र है। हिंसा, रक्त-पात, अराजकता ये सब कम्युनिस्टों के मेडल हैं। वो इसमें कभी भी पीछे नहीं रहते।
कुछ और समय पहले लौटिए। केरल के त्रिशूर के रहने वाले सदानंद मास्टर जी जो अब भाजपा से राज्यसभा के सांसद हैं।1994 में माकपा ने उन पर हमला किया था। इसके चलते उन्हें अपने दोनों पैर गंवाने पड़ गए थे। राज्यसभा में 2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद जब उन्होंने राष्ट्रपति की अनुमति से मेज पर कृत्रिम पैर रखे।अपने साथ हुई क्रूर और भयावह
हिंसा को उन्होंने याद किया किया तो सदन में उस दौरान ख़ूब हंगामा मचा था। 5 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था —
“राजनीतिक प्रतिशोध के कारण, युवावस्था में ही सदानंद जी के दोनों पैर काट दिए गए। वे कृत्रिम अंगों के सहारे जीवन यापन करते हैं, फिर भी उनके भाषण में कोई कड़वाहट नहीं है, उनके आचरण में कोई कठोरता नहीं है। यह हमें गर्व से भर देता है। इंडी (INDI) गठबंधन इसके लिए जिम्मेदार है । एक युवा शिक्षक के पैर केवल वैचारिक मतभेदों के कारण काट दिए गए। फिर भी उनके मन में कोई कड़वाहट नहीं है, कोई क्रोध नहीं है। मैं मास्टर सदानंद जी को हृदय से नमन करता हूँ। ऐसे क्रूर हमले के बावजूद, वे राष्ट्र सेवा के अपने संकल्प को निभाते हैं और आज भी नीति निर्माण में योगदान दे रहे हैं। यह गर्व की बात है। ऐसे ही लोगों के बल पर हम राजनीति में जीते और काम करते हैं। उनका बलिदान हमें राष्ट्र के लिए जीने और मरने के लिए प्रेरित करता है।”
केरलम में ऐसे हज़ारों प्रकरण हैं जब RSS, ABVP और भाजपा के कार्यक्रमों, कार्यकर्ताओं पर कम्युनिस्टों ( CPM, CP-IM, SFI ) ने हमला किया है। ख़ू-नी वारदातों को अंज़ाम दिया, ह-त्याएं की। किन्तु संघ ने अपना कार्य कभी नहीं छोड़ा। ये Rss वाले भी पता नहीं किस मिट्टी के बने होते हैं? चाहे कुछ भी हो जाए, वो अपना काम नहीं छोड़ते हैं। इसी का परिणाम है कि पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही परिस्थितियों के बीच संघ डटा रहा। फिर समाज की जागृत शक्ति के चलते जो परिवर्तन आया। उसे देखकर सब हैरान रह गए।
वस्तुत : जब-जब संघ का दमन करने के लिए कांग्रेस ने सरकारी प्रयास किए। वामपंथियों ने हिंसक हमले किए।उस-उस समय संघ- समाज की कई गुना शक्ति के साथ उठ खड़ा हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने संघ समर्पण, भगवा ध्वज और ध्येय को लेकर एक कविता लिखी थी। जो ये बताती है कि संघ के स्वयंसेवक किस अदम्य जिजीविषा और समर्पण के साथ समाज के बीच कार्य करते हैं। उसकी कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं —
“कभी थे अकेले हुए आज इतने
नहीं तब डरे तो भला अब डरेंगे
विरोधों के सागर में चट्टान हैं हम
जो टकराएंगे मौत अपनी मरेंगे
लिया हाथ में ध्वज कभी न झुकेगा
कदम बढ़ रहा है कभी न रुकेगा
न सूरज के सम्मुख अंधेरा टिकेगा
निडर हैं सभी हम अमर हैं सभी हम
के सर पर हमारे वरदहस्त करता
गगन में लहरता है भगवा हमारा”



