शनिवार को अभाविप कार्यकर्ताओं ने विभिन्न पीजी एवं छात्रावासों में विद्यार्थियों से संपर्क कर विद्यार्थी हित से जुड़े मुद्दों पर संवाद किया। सत्य निकेतन हादसे के बाद चल रहे ‘आखिर कब तक?’ अभियान के तहत सुरक्षित विद्यार्थी आवास का मुद्दा उठाया गया। अभाविप की मांग और लगातार प्रदर्शनों के बाद 2400 बेड के गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में हॉस्टल की सीमित संख्या और सीटों की कमी को देखते हुए सभी विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल की सीटें बढ़ाना और सुरक्षित एवं सुलभ आवास उपलब्ध कराना अभाविप का प्रमुख मुद्दा है।
महिला सुरक्षा अभाविप का प्रमुख मुद्दा है। पिंक बूथ, सीसीटीवी कैमरे, महिला सुरक्षा गश्ती वाहन और यू-स्पेशल बस सेवा जैसी पहलों के साथ ‘नारी तू नारायणी’, ‘स्वयंसिद्धा’ और ‘वामिका’ जैसे अभियानों के माध्यम से छात्राओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व को बढ़ावा दिया गया है। डूसू में अकादमिक, महिला, पूर्वोत्तर एवं छात्रावास संबंधी समस्याओं के लिए समर्पित प्रकोष्ठ भी बनाए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों की समस्याओं को सीधे सुनकर उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकें।
अभाविप पैनल से डूसू सचिव पद की प्रत्याशी रिया छाबड़ी ने कहा, “महिला सुरक्षा और हॉस्टल की सुविधा विद्यार्थियों की जरूरतें हैं। अभाविप ने इन मुद्दों को हमेशा जमीन पर उठाया है। हम चाहते हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्राओं को सुरक्षित माहौल मिले और हर विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई के दौरान उचित और सुरक्षित आवास मिल सके। अभाविप की मांग पर 2400 बेड के गर्ल्स हॉस्टल का काम शुरू हुआ है, लेकिन विश्वविद्यालय में हॉस्टल की जरूरत इससे कहीं ज्यादा है। इसलिए आने वाले समय में हॉस्टल की सीटें बढ़ाना हमारी प्राथमिकता रहेगी। विद्यार्थियों के बीच अभाविप के पैनल को लेकर जो उत्साह दिख रहा है, उससे हमें पूरा विश्वास है कि इस बार डूसू में अभाविप 4-0 से जीत दर्ज करेगी।”



