दिल्ली। भारत में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं के लिए विदेशी फंडिंग प्राप्त करने की प्रक्रिया अब और अधिक जटिल और जवाबदेह होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के नियमों में व्यापक और ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। सोमवार को जारी हुई गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, विदेशी चंदे के दुरुपयोग को रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इन कड़े प्रावधानों को लागू किया गया है। नए संशोधनों के तहत न केवल कंपाउंडिंग पेनल्टी (शमन दंड) के ढांचे को सख्त किया गया है, बल्कि संगठनों के काम करने के भौगोलिक और वैचारिक दायरे को भी पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है।
भौगोलिक सीमा और उद्देश्य का स्पष्ट निर्धारण
नए नियमों का सबसे पहला और महत्वपूर्ण प्रभाव संगठनों के कार्यक्षेत्र पर पड़ेगा। अब किसी भी संगठन को अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में यह स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा कि वह किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में काम करेगा और उसका सही मकसद क्या है।
- शेड्यूल और नया फॉर्म FC-6F: आवेदकों को अपनी गतिविधियों को गृह मंत्रालय द्वारा पहले से तय किए गए शेड्यूल में से ही चुनना होगा।
- एक वर्ष की समयसीमा: वर्तमान में सक्रिय संगठनों को अपने उद्देश्यों और कार्यस्थलों को री-अलाइन (संरेखित) करने के लिए नए फॉर्म FC-6F के माध्यम से एक वर्ष का समय दिया गया है। उन्हें यह स्पष्ट घोषणा करनी होगी कि वे भविष्य में कौन सा विशिष्ट उद्देश्य और स्थान बनाए रखना चाहते हैं।
धार्मिक गतिविधियों की नई परिभाषा: ‘धर्म परिवर्तन’ पर पूर्ण रोक
संशोधित नियमों में धार्मिक श्रेणियों (Religious Categories) को लेकर सबसे बड़ा और सख्त बदलाव किया गया है। नए शेड्यूल में धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, एजुकेशनल और सोशल हेड के तहत स्वीकृत गतिविधियों की सूची दी गई है।
- स्वीकृत गतिविधियां: धार्मिक श्रेणी में मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों, गुरुद्वारा, मठों और पूजा स्थलों के निर्माण, रखरखाव और जीर्णोद्धार की अनुमति है। साथ ही धर्मशाला, लंगर, धार्मिक शिक्षा, नैतिक शिक्षा, सत्संग और मेडिटेशन रिट्रीट के आयोजन को भी वैध माना गया है।
- कड़ा प्रतिबंध: सरकार ने नियमों में साफ कर दिया है कि धार्मिक फिलॉसफी, थियोलॉजी, धार्मिक इतिहास की पढ़ाई और आदिवासी परंपराओं के डॉक्यूमेंटेशन जैसी गतिविधियां तभी मान्य होंगी, जब उनमें ‘धर्म परिवर्तन शामिल न हो’। हर धार्मिक गतिविधि की अनुमति से ‘धर्म परिवर्तन’ को पूरी तरह और स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। इसका सीधा संदेश है कि विदेशी चंदे का इस्तेमाल किसी भी प्रकार के प्रलोभन या मतांतरण के लिए नहीं किया जा सकता।
‘मुख्य अधिकारी’ की परिभाषा और विदेशी नागरिकों पर लगाम
गृह मंत्रालय ने जवाबदेही तय करने के लिए संगठनों के ‘मुख्य पदाधिकारी’ (Chief Functionary) की परिभाषा को अधिक स्पष्ट और विस्तृत किया है। अब इसके दायरे में कंपनी डायरेक्टर, पार्टनर, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के कर्ता और संगठन के नीतिगत मामलों को नियंत्रित करने वाले सभी प्रमुख लोग शामिल होंगे।
- विदेशी नागरिकों पर पाबंदी: नए नियमों के अनुसार, जिन संगठनों में मुख्य पदाधिकारी के रूप में विदेशी नागरिक शामिल हैं (भारतीय मूल के लोगों को छोड़कर), उन्हें सामान्य तौर पर पंजीकरण या पूर्व-अनुमति (Prior Permission) के योग्य नहीं माना जाएगा। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में सरकार आदेश जारी कर इसमें छूट दे सकती है।
फंड के उपयोग पर कड़े वित्तीय नियम
विदेशी चंदे के निष्क्रिय पड़े रहने या उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए वित्तीय नियंत्रण को और मजबूत किया गया है:
- न्यूनतम खर्च की शर्त: किसी संगठन को रिन्यूअल (नवीनीकरण) के योग्य तभी माना जाएगा, जब उसने पिछले दो वित्तीय वर्षों में कम से कम 10 लाख रुपये के विदेशी योगदान का वास्तविक इस्तेमाल किया हो।
- 75% खर्च का नियम: पूर्व-अनुमति के मामलों में विदेशी फंड की अगली किस्त तभी जारी की जाएगी, जब पिछली किस्त का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो चुका हो और फील्ड जांच (Field Verification) के माध्यम से उसकी सत्यता प्रमाणित हो चुकी हो।
- अतिरिक्त विवरण: अब संगठनों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स, विस्तृत गतिविधि रिपोर्ट, मुख्य पदाधिकारियों द्वारा जारी पब्लिकेशन्स और ‘डोनर-एडवाइज्ड फंड’ के माध्यम से आने वाले पैसों के असली दानदाताओं (Ultimate Beneficiaries) की जानकारी भी सरकार को देनी होगी।
उल्लंघन पर भारी जुर्माना (कंपाउंडिंग पेनल्टी)
नियमों की अनदेखी करने वाले संगठनों के लिए वित्तीय दंड को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है:
| उल्लंघन का प्रकार | निर्धारित जुर्माना / पेनाल्टी |
| प्रशासनिक खर्च सीमा का उल्लंघन: धारा-8 के तहत मिले चंदे का 20% से अधिक हिस्सा अन्य कार्यों में खर्च करना। | ₹1,00,000 या सीमा से अधिक खर्च की गई राशि का 5% (जो भी अधिक हो)। |
| सट्टेबाजी/जोखिम भरे निवेश: धारा 8(1) का उल्लंघन कर विदेशी अंशदान को सट्टेबाजी या सट्टा गतिविधियों में लगाना। | ₹1,00,000 या निवेश की गई रकम का 30% (जो भी अधिक हो) + अर्जित की गई 100% कमाई की वसूली। |
| फंड का विचलन (Diversion): विशेष कार्य के लिए मिले चंदे का किसी अन्य कार्य में इस्तेमाल करना। | ₹1,00,000 या डायवर्ट की गई राशि का 30% (जो भी अधिक हो)। |
इमिग्रेशन और लुकआउट नोटिस पर स्पष्टीकरण
मंत्र्यालय ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक स्पष्टीकरण भी जारी किया है। इसके तहत, जो वैधानिक संस्थाएं (Statutory Bodies) आपराधिक अधिकार क्षेत्र (Criminal Jurisdiction) से बाहर हैं, वे किसी भी भारतीय या विदेशी नागरिक को देश छोड़ने से रोकने के लिए सीधे इमिग्रेशन ब्यूरो (Bureau of Immigration) से अनुरोध या लुकआउट सर्कुलर जारी नहीं करवा सकती हैं। इसके लिए उन्हें तय कानूनी और आपराधिक न्याय व्यवस्था के चैनलों का पालन करना होगा।



