अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : 12 वर्षों की कुछ ऐसी रही भारत में योग यात्रा

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भोपाल । आज यानी 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली का जन-आंदोलन बन चुका है। वर्ष 2015 में इसकी शुरुआत हुई थी और अब 12 वर्षों की यात्रा तय करते हुए यह दुनिया के सबसे बड़े सहभागी आरोग्य अभियानों में शुमार हो चुका है। वर्ष 2026 की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ इस बात का संकेत है कि अब योग को व्यायाम मानने से अधिक जीवन भर स्वस्थ और सक्रिय बने रहने के माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

भारत की धरोहर से विश्व का आरोग्य मंत्र

योग भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत है। इसकी जड़ें सिंधु-सरस्वती सभ्यता तक पहुंचती हैं। संस्कृत के ‘युज’ धातु से बने योग शब्द का अर्थ है, जोड़ना या एकत्व स्थापित करना। यही कारण है कि योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम माना जाता है।

 

योग का उल्लेख वेदों, उपनिषदों, महाभारत, रामायण तथा बौद्ध और जैन परंपराओं में मिलता है। महर्षि पतंजलि ने योग सूत्रों के माध्यम से इसकी व्यवस्थित व्याख्या की और इसे एक वैज्ञानिक एवं दार्शनिक स्वरूप प्रदान किया। सदियों तक ऋषि-मुनियों और योगाचार्यों ने इस ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखा और दुनिया तक पहुंचाया।

संयुक्त राष्ट्र की मान्यता और ऐतिहासिक शुरुआत

योग के वैश्विक महत्व को स्वीकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 11 दिसंबर 2014 को 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के 69वें अधिवेशन में इसका प्रस्ताव रखा था, जिसे 175 देशों का अभूतपूर्व समर्थन मिला। यह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे अधिक समर्थन प्राप्त प्रस्तावों में से एक था।

21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। नई दिल्ली के राजपथ पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में 35,985 लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए। इसके बाद योग ने विश्व मंच पर नई पहचान हासिल की। वर्ष 2016 में यूनेस्को ने योग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल कर इसकी वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत किया।

राजपथ से देश के कोने-कोने तक

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य आयोजन हर वर्ष देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित किया जाता रहा है। नई दिल्ली के बाद चंडीगढ़, लखनऊ, देहरादून, रांची, मैसूरु, जबलपुर, श्रीनगर और विशाखापत्‍तनम जैसे शहर इस आयोजन के साक्षी बने। वर्ष 2026 में कोलकाता मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है।

इन आयोजनों ने योग को महानगरों से निकालकर गांवों, कस्बों और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाया। स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सशस्त्र बलों, स्वास्थ्य संस्थानों, कॉर्पोरेट कार्यालयों और सामाजिक संगठनों की बढ़ती भागीदारी ने इसे एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दे दिया।

कॉमन योग प्रोटोकॉल : वैश्विक एकता का सूत्र

योग दिवस की सबसे बड़ी विशेषता ‘कॉमन योग प्रोटोकॉल’ (सीवाईपी) है। वर्ष 2015 में आयुष मंत्रालय ने प्रमुख योग संस्थानों और विशेषज्ञों के सहयोग से 45 मिनट का यह मानकीकृत योग क्रम तैयार किया। इसमें शिथिलीकरण अभ्यास, विभिन्न योगासन, कपालभाति, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकों को शामिल किया गया है।

दरअसल, यह ऐसा प्रारूप है जिसे किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति आसानी से कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं में उपलब्ध यह प्रोटोकॉल दुनिया भर के लोगों को एक समान योग अनुभव प्रदान करता है। यही कारण है कि न्यूयॉर्क से लेकर टोक्यो और रियाद से लेकर जोहान्सबर्ग तक लाखों लोग एक ही समय पर एक समान योगाभ्यास कर पाते हैं।

महामारी में भी नहीं टूटा योग का सिलसिला

कोविड-19 महामारी के दौरान जब दुनिया सामाजिक दूरी और लॉकडाउन की चुनौती से जूझ रही थी, तब योग ने लोगों को मानसिक और शारीरिक मजबूती प्रदान की। सार्वजनिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध के बावजूद अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन डिजिटल माध्यमों से जारी रहा।

“घर पर योग, परिवार के साथ योग” और “आरोग्य के लिए योग” जैसी थीमों ने यह संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी योग व्यक्ति को तनाव, चिंता और अकेलेपन से उबरने में मदद कर सकता है। इस दौर ने योग की प्रासंगिकता को पहले से कहीं अधिक बढ़ा दिया।

एक दशक में जन-आंदोलन का रूप

पिछले 12 वर्षों में योग दिवस का स्वरूप लगातार व्यापक हुआ है। वर्ष 2025 इसका एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने अपनी दस वर्ष की यात्रा पूरी की। “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” थीम के साथ आयोजित इस संस्करण में देशभर में 13 लाख से अधिक कार्यक्रम हुए और 26 करोड़ से अधिक लोगों ने भागीदारी की।

विशाखापत्‍तनम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में तीन लाख से अधिक लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि योग अब एक स्वास्थ्य गतिविधि तक सीमित नहीं रह गया है, यह भारत समेत संपूर्ण विश्‍व के लिए उसकी सामाजिक चेतना का हिस्सा बन चुका है। इस दौरान सबसे बड़ी योग कक्षा और सबसे बड़े सामूहिक सूर्य नमस्कार प्रदर्शन के नए रिकॉर्ड भी बने।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 : स्वस्थ आयु के लिए योग

वर्ष 2026 का विषय ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ है। आज दुनिया की बड़ी आबादी उम्रदराज हो रही है और जीवनशैली संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में केवल जीवन की अवधि बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

योग इस लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। ताड़ासन, त्रिकोणासन और भुजंगासन जैसे आसन शरीर की लचक, संतुलन और रीढ़ की मजबूती बढ़ाते हैं। वहीं अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और ध्यान जैसी प्रक्रियाएं मानसिक शांति, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन को मजबूत करती हैं। यही कारण है कि योग को स्वस्थ आयु की आधारशिला माना जा रहा है।

योग 365 : एक दिन नहीं, पूरे वर्ष का संकल्प

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की सबसे महत्वपूर्ण पहल ‘योग 365’ है। इसका उद्देश्य योग को वर्ष के 365 दिनों का अभ्यास बनाना है। सरकार और विभिन्न संस्थाएं लोगों को घर, विद्यालय, कार्यस्थल और समुदाय स्तर पर नियमित योग अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ‘वाई-ब्रेक’ जैसे छोटे कार्यस्थलीय योग मॉड्यूल कर्मचारियों को तनावमुक्त बनाने में मदद कर रहे हैं। वहीं ‘योग फॉर एयर ट्रैवल’ जैसी नई पहलें आधुनिक जीवनशैली की आवश्यकताओं के अनुरूप योग को ढालने का प्रयास हैं।

स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में योग

वर्ष 2026 में गैर-संचारी रोगों के लिए विशेष योग प्रोटोकॉल भी विकसित किए गए हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए तैयार ये मॉड्यूल योग को निवारक स्वास्थ्य सेवा के रूप में स्थापित कर रहे हैं। इसके अलावा बच्चों, किशोरों, महिलाओं, गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और नशा मुक्ति की प्रक्रिया से गुजर रहे लोगों के लिए भी अलग-अलग योग कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। इससे योग की उपयोगिता और समावेशिता दोनों बढ़ी हैं।

दुनिया को जोड़ता योग

आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, ऐतिहासिक स्मारकों, विश्वविद्यालय परिसरों, खेल मैदानों और सार्वजनिक स्थलों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारतीय दूतावास और सांस्कृतिक केंद्र दुनिया भर में हजारों कार्यक्रमों का समन्वय करते हैं। योग की यही वैश्विक स्वीकार्यता भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है। यह एक ऐसा माध्यम बन चुका है जो भाषा, संस्कृति, धर्म और सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता को स्वास्थ्य और शांति के सूत्र में बांधता है।

योग की असली विरासत

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की 12 वर्षों की यात्रा इस बात की साक्षी है कि एक प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा आधुनिक विश्व की आवश्यकताओं का समाधान बन सकती है। राजपथ से शुरू हुआ यह अभियान आज करोड़ों लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। अत: इस वर्ष का संदेश स्पष्ट है- यह योग किसी विशेष दिन का आयोजन नहीं है, यह तो जीवन जीने की कला है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात में निहित है कि कितने लोग इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाते हैं, इसलिए आज कहना यही है कि जब योग 365 दिनों तक जीवन में उतरेगा, तभी स्वस्थ, संतुलित और सुखी समाज का सपना साकार होगा।

बिहार के थाना, अंचल, प्रखंड से आम आदमी परेशान है, उनके बीच से भरत भूषण तिवारी मिसाल बन गया

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28 दिसम्बर 2024 को बिहार के चर्चित एकाउंटर में दिवंगत हुआ युवा भरत भूषण तिवारी एक पोस्टर शेयर करता है, जिसमें लिखा है। ”बगावत हमेशा ईमानदार और सच्चा इंसान ही करता है। चापलूस तो तलवे चाटकर अपना काम निकालते हैं।” यह सब वह लाइक और कमेंट के लिए नहीं कर रहा था। उसके एक एक पोस्ट के नीचे साफ साफ लिखा मिलता है, लाइक, कमेंट, शेयर ना करें।

आरा (बिहार) : आज मैने एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है निर्णय में मै उन सभी लोगो को अपने तरफ से पुर्ण रुप से माफ करता हूँ जो लोग मेरे साथ कुछ दिन पहले कुछ साजिश के तहत मुझे बदनाम करने के ईरादे से और भी कुछ ईरादे से मुझपर बहुत संगीन आरोप लगाए थें ज़िसमें शाहपुर थाना प्रभारी , रींकु देवी उनके लड़के और उनके साथ जो जो लोग थें मैं उनसभी लोगो को पूरी तरह से और खुद से हिं माफ करता हूँ वैसे इनसभी लोगो की गलती माफ करने लायक है नहीं फिर भी ईश्वर का ध्यान करके मैं इनसभी लोगो को माफ करता हूँ , और माफ उनके लिए भी कर रहा हूँ और खुद के लिए भी और ये करके मैं इनलोगो पर कोई अहसान नहीं कर रहा हूँ ,

 

उनके लिए माफ ईसलिए कर रहा हूँ क्यूंकी मैने तो उनके गलती करने के अनुसार ये बोला था की समाज में ये लोग अपना पूरा जीवन घुट घुट कर व्यतिय करेंगे लेकिन जब सच में समाज में  ईनलोगो का जीवन मेरे कारण एक घूटन के समान हो गया है तो मुझे अभी से ये सभ देखकर बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा है की मैने किसी के जीवन को ऐसा नर्क के जैसा क्युं बना दिया बस इसलिये की इनलोगोनें मेरे साथ बहुत बुरा किया था अगर मैं किसी के साथ भला नहीं कर सकता तो फिर किसी के साथ इतना बुरा कैसे कर सकता हूँ लेकिन इनलोगो नें मेरे उपर ऐसा संगीन आरोप लगाया था और मेरे अस्तित्व के साथ हिं खिलवाड़ करके इनलोगो नें मुझे विवश कर दिया नहीं तो मैं अपने जीवन में किसी का बुरा कभी नहीं करता लेकिन अब कोई विवश हिं करदे तो इसमें कोई क्या कर सकता है , और मैं अपने जीवन में सही इंसान का तो कभी भी बुरा कर हिं नहीं सकता और जो गलत होते हैं तो उसका तो कोई बात हिं नहीं, अपने लिए माफ करने के पिछे मेरा भी कुछ स्वार्थ है वो स्वार्थ यह है की अगर कोई व्यक्ती हमारे जीवन में हमारे साथ कुछ गलत कर देता है और उसके बाद अगर हम उस इंसान को अपने जीवन में ज़ितना ज्यादा उसके बारे में सोचते हैं (जब तक पूरे मन से  माफ नहीं कर देतें तब तक सोच में आजाना लाजमीं है)  य़ा अहमियत देते हैं उतना हिं ज्यादा हम खुद परेशान होते ज़ाते हैं और जबतक हम अपनें जीवन में उस व्यक्ती को अपने दिल और दिमाग से संपूर्ण रुप से माफ नहीं कर देतें तब तक वो व्यक्ती हमारे मन और ख़यालों में एक बोझ की तरह रहता है जो ये बोझ हमारे जीवन में बहोत खतरनाक साबित होते रहता है हम कितना भी प्रयास करलें ये बोझ हमारे मन का पिछा नहीं छोड़ती इससे पिछा छुड़ाने का मात्र एक हिं विकल्प है उस समस्या को अपने दिल और दिमाग से बाहर निकालना और वो प्रक्रिया उस व्यक्ती को पूरी तरह से माफ करनें के बाद हिं पूरी होती है इसलिए मैं अपने खुद के मन को पूरी तरह से स्थिर करनें के लिए इनसभी लोगो को पुर्ण रुप से खुद से हिं माफ करता हूँ और माफ करने का एक और कारण भी है की मै इनलोगो में पहले से बहोत ज्यादा बदलाव भी देख रहा हूँ ,  इसके बाद इनसभी लोगो का जीवन धीरे धीरे शांति और समान होते चली जाएगी लेकिन इनका जीवन समान होनें में थोड़ा वक्त जरूर लगेगा ,

और इसके बाद मैं इनसभी लोगो से आशा और एक निवेदन जरूर करूँगा की भविष्य में कभी भी मुझे विवश ना होना पड़े क्यूंकी मैं कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहता लेकिन लेकिन जो बुरा करता है उसका बुरा हो तो उसमें कोई पाप भी नहीं लेकिन फिर भी मैं जल्दी किसी पर किसी भी तरह का कार्यवाई नहीं करना चाहता लेकिन जब बात सर से उपर जाने लगे और अधर्म धर्म पर हावी होने लगे ,असत्य सत्य को झूठा साबित करने लगे , पाप पुण्य का बुरा करने लगे तो फिर विवश होना तो लाजमीं है और इस स्थान पर तो विवश होना हिं पड़ेगा और नहीं होंगे तो  इसका मतलब हमने अधर्म को बढ़ावा दिया , इसलिए आपसभी ऐसा कोई कार्य ना करें की किसी को विवश हो जाना पड़े आप पर कार्यवाई  करने के लिए , इसलिये आप सभी अपने जीवन में आनन्द रहें समाज में किसी का भी बुरा करने का प्रयास ना करें , समाज में किसी को भी किसी प्रकार की छती ना करें , समाज में किसी गरीब को किसी असहाय लोगो को दबाने का प्रयास ना करें , समाज में अश्लिलता फैलानें का प्रयास ना करें , समाज में लाचार लोगो पर अत्याचार ना करें और समाज में किसी का नाजायज फायादा ना उठाएं , और समाज में परेशान तो कभी किसी को ना करें , अगर कुछ करना हिं है तो समाज में किसी का निस्वार्थ भाव से भला करें , किसी का भला सोचें , समाज में एक अच्छा संदेश फैलाएं या समाज में अच्छा कार्य करें और कुछ नहीं तो कमसे कम खुद अच्छे से रहें और लेगो को भी अच्छे से रहने दें क्यूंकी ये समाज आपका भी है आपलोग भी इस समाज में रहते हैं तो आप सभी इस समाज को जो भी देंगें अच्छा य़ा बुरा वो सभी चिजें अंत में कई गूणा घूर फिर कर आपके पास भी आएगी ,
इसी के साथ मैं आपसभी का पिछली सारी घटनाओं का पोस्ट वापस लेता हूँ और आप सभी से उम्मिद करता हूँ आप सभी अपने जीवन में आनंदित रहेंगे और समाज में दुसरे का तो अहित कभी ना सोचेंगे  और ना करेंगे और मैने आपसभी को पुर्ण रुप से माफ कर दिया तो आपसभी मुझे लेकर चिंता में ना रहें और आप सभी अपना जीवन खुशी खुशी गुजारें बस आपसभी भविष्य में मेरे साथ कभी भी किसी प्रकार की चालाकी य़ा किसी प्रकार का कोई भी विश्वासघात भूल कर भी कभी ना करें और मैने माफ तो करदिया है तो उसके बाद ईश्वर से ये कामना करूँगा की ईश्वर आपसभी को सद्बुद्धि प्रदान करें और आप सभी के जीवन से नकारात्मक सोंच को दूर कर सकारात्मक सोंच उत्तपन्न करें उसके बाद आप सभी खुद एक बहोत अच्छे इंसान बन जाएंगे तो समाज के लिए ये तो और भी अछी बात है।

(मृतक भरत तिवारी द्वारा 27 फरवरी 2022 को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया)

बिहार का CM और भोजपुर जिले के प्रशासन के लिए मेरा ये संदेश है की बिलौटी गांव में जो जवइनिया गांव के लोगो को बसाया जा रहा है उसमें से कुछ लोगो का जमीन अच्छा है उन्हें वहां अपना घर बना कर बसने में कोई समस्या नहीं लेकिन उसमें से कुछ लोगो को लगभग 30 से 40 लोगो के आसपास उस छेत्र के गड्ढे वाले स्थान पर जमीन दिया गया है जो की बारिश के दिनों में वहां भी बाढ़ आ जाता है,

तो उस गड्ढे वाले स्थान पर सरकार के द्वारा बिना मिट्टी डलवाये समाज के कुछ लोगो को क्यूं बसाया जा रहा है बेचारे वो लोग तो अपने जीवन के जिस गंभीर समस्या से निकल कर बाहर आ रहे हैं लेकिन यहां कुछ लोगो का जमीन गड्ढे में होने के कारण फिर से अपने जीवन के उसी समस्या में पड़ जाएंगे तो फिर उन्हें यहां बसाने का क्या फायदा ,

यही सब देखते हुवे भोजपुर के DM साहब से मैं कहना चाहता हूं की अब आप बेझिझक किसी भी दुविधा में पड़े बिना यहां पर आ सकते हैं क्योंकि यहां वही साला चिरकुटबाज CM के आने के पहले जो कार्य करने को बोला गया था लेकिन फिर सभी कार्य नहीं किये गएं थें लेकिन फिर धीरे-धीरे आपके द्वारा करीब-करीब उसमें से समाज के बहुत से कार्य को करवा दिया गया है और आशा है की जो छूटे फूटे कार्य हैं वो भी आपके द्वारा करवा दिया जायेगा और अभी जो यहां fair bhavan बनवाने के लिए दिया गया है उसपे भी जल्द से जल्द कार्य शुरू करवाया जाए नहीं तो system में बैठे बहुत सा छपरी और चिरकुटवा सब है जो इस कार्य में अंदर हिं अंदर बाधा पंहुचा सकता है जैसे साला वही छपरी SDM और भी कुछ लोग तो ऐसे लोगो से फिर से इसी मैटर पर युद्ध करना पड़ सकता है और ऐसे छपरियों से युद्ध तो होगा हिं क्यूंकि अभी बहुत सारे और भी कार्य छूटे हुवे हैं जो बिहार के लोगो से किया गया था ,

 

तो भोजपुर जिले के प्रशासन में अब मुझे सिर्फ आपसे(DM) कोई शिकायत नहीं लेकिन बाकी छपरियों का ईलाज होते रहेगा और युद्ध भी और मैंने समाज और देश में विकास कार्यों के लिए जो जो वादा किया है उसको भी किसी भी हाल में पूरा किया जायेगा ,

तो आप यहां आकर समाज के समस्याओं को देखें-सुनें और उनलोगो की समस्याओं को दूर करें और आशा है की आप इस क्रम में किसी system के चिरकुटबाज अधिकारीयों के बहकावे में ना आएं नहीं तो उस साले चिरकुटबाज अधिकारी का इलाज कर दिया जायेगा जो आपको गलत जानकारी देगा और आपको भ्रम में रखेगा इसलिए  आप खुद से आकर ऐसे समस्याओं को देख सकते हैं और नहीं तो आप वहीं से हिं ऐसे समस्याओं को दूर कर सकते हैं जैसी आपकी मर्जी ,
तो इस क्रम में अब मैं सिर्फ आपके लिए इतना जरूर कर सकता हूं की आपके आने के बाद और जाने के पहले तक system में जो भी साला छपरीबाज लोग हैं उतना देर तक Save हैं लेकिन उससे पहले और उसके बाद जो भी साला छपरिबाजी वाला कुछ भी हरकत किया तो उसका बुरा परिणाम उसको जरूर भोगना हिं पड़ेगा ,

समाज और देश के लोगो से मैं एक और बात कहना चाहता हूं की प्रशासन में बैठे कुछ छपरीबाज और समाज में से कुछ चिरकुटबाज असमाजिक लोग मिलकर मेरे खिलाफ फिर से कुछ षड़यंत्र रच रहे हैं जिसमें से अभी मुख्य रूप से एक और असमाजिक और चरित्रहीन घर का नाम पता चल रहा है जिस साले चिरकुटवा सब का ईलाज मैंने लगभग 3,4 साल पहले बहुत अच्छे से किया था तो ये बात तो समाज में बहुत सारे लोगो को पता तो है हिं और ऐसे चरित्रहिन लोगो का ईलाज करने के बाद अंत में दया आने के कारण मैंने हिं ऐसे लोगो को माफ़ कर दिया था लेकिन अब मुझे ऐसा लगता हैं की मैंने ऐसे लोगो को माफ करके अच्छा नहीं किया था क्यूंकि ऐसे लोग फिर से प्रशासन के कुछ भ्रष्ट लोगो के साथ मिलकर मेरे साथ कुछ षड़यंत्र रच रहे हैं जैसा की बहुत सारे लोगो को ये बात तो पता है हिं की उस घर की स्त्रि नें शाहपुर थाना के प्रभारी के साथ मिलकर मुझे फ़साने के लिए मुझपर कितना गंभीर आरोप लगाया था तो उसके बाद उसका और साथ में उस साले थाना प्रभारी का कैसा इलाज किया गया था लेकिन अब लगता है उस इलाज में कहीं कुछ कमी रह गई थी लेकिन कोई बात नहीं उस कमी को अब पूरा कर लिया जाएगा ,


लेकिन कुछ हद के ईलाज के बाद मैंने सभी को माफ़ भी कर दिया था लेकिन ऐसे अहसान फरामोस लोग लगता है की मेरे दिए हुवे अहसान को बहुत जल्द भूल गए हैं तो इस बार माफ़ी वाफी नहीं दिया जाएगा , इस बार ऐसे असामाजिक लोगो का अब ऐसा इलाज किया जायेगा की इनके पुरे जीवन में अफ़सोस और पछतावे के सिवा कुछ भी नहीं बचेगा और साथ में साला इस बार प्रशासन में जो भी इस चरित्रहीन और असामाजिक घर को अपने झांसे में फंसाने के बाद किसी भी तरह से कुछ भी मदद करेगा तो उसका तो भगवान हिं जानें की साले का क्या होगा ,

साला मुझे कुछ-कुछ पता चला है की प्रशासन में से जो छपरिया सब है वो सब मिलकर समाज में से  जो-जो असामाजिक और गदहवा सब है जिसका जिसका इलाज अभी तक मैंने कई तरह से कर दिया है और जिसका जिसका कर रहा हूं या और भी ऐसे लोग बचे हुवे हैं जिसका इलाज अभी तक मैंने नहीं किया तो उनसभी को मेरे खिलाफ भड़काया जा रहा है और कुछ और हिं षड़यंत्र में फसानें का प्लान बनाया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में समाज और देश के लिए जो मैं क्रांतिकारी युद्ध करने वाला हूं वो ना कर पाऊं और किसी और मैटर में फंस कर अंदर चला जाऊं तो मैं बिहार के सिस्टम के ऐसे चिरकुटों से और समाज के ऐसे पागलों से बोलना चाहता हूं की मेरे कार्यों और मेरे युद्ध के बिच में जो भी आएगा वो चाहे बिहार सरकार के लोग हों या उनका साथ देने वाला समाज के साले असामाजिक लोग हों तो उनसभी में से जो भी मेरे सामने आएगा उसका साला सर धड़ से उड़ा दिया जाएगा क्यूंकि साला तुमसभी प्रशासन के छपरीबाज लोगो का साथ देकर मुझे किसी भी तरह से बाधित करके मेरे समाज और देश के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहे हो तो जो भी ऐसा कार्य करेगा पहले उसी का सर धड़ से अलग करके फिर किसी और के तरफ आगे कदम बढ़ाया जायेगा और इस समाज और देश को ऐसे छपरियों से मुक्त कराया जाएगा और समाज और देश में नई क्रांतिकारी युद्ध को अच्छे से जन्म दे दिया जाएगा,

तो आगे जैसा भी हो आप सभी लोगो को नाम के साथ जरूर बताया जाएगा की कौन कौन ऐसे  गद्दार लोग हैं जो समाज और देश से गद्दारी करके बिहार के छपरीबाज सिस्टम के लोगो की बच बचा कर मदद कर रहे हैं और मुझे इस रास्ते से या अपने रास्ते से हमेशा-हमेशा के लिए हटाना चाहते हैं तो समाज और देश के ऐसे गद्दारों का मात्र एक हिं सजा है सजाए मौत और ये सब इसी लायक है बस मुझे ऐसे लोगो का कहीं भी कुछ भी ऐसा हरकत करते हुवे पकड़ा जाए तो उसके बाद आप सभी को अच्छे से पता चल हिं जाएगा की कौन कौन ऐसे लोग थें तो समाज और देश के साथ गद्दारी कर रहे थें और उसके बाद ऐसे पागलों का क्या हाल हुवा।

(मृतक भरत तिवारी द्वारा 01 जून 2026 को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया)

समाज और देश के लोगो से मैं बताना चाहता हूं की आप सभी लोगो से मैंने जो वादा किया था उसमें से यहाँ का(शाहपुर छेत्र का)करीब करीब बहुत से वादे को पूरा कर दिया गया है अब बस कुछ हिं गिने चुने और कार्य बचे हुवे हैं और आप सभी ये बात ध्यान रखें की ये जो कार्य होने वाला है ये सिर्फ मैंने यहाँ का यानी की इस छेत्र का बताया है जो की जिले और बिहार का अभी मेरा वादा शेष है,

जिसमें से मुख्य रूप से शाहपुर छेत्र के लिए Fire bhavan का जो मेरा मांग था उसको पूरा कर दिया गया है और इस fair bhavan से सिर्फ शाहपुर का छेत्र हिं नहीं बल्कि आपतकाल में शाहपुर के अगल बगल के प्रखंड के लोगो को भी इसका लाभ मिलेगा जैसे- बिहियां, ब्रम्पुर और भी कुछ छेत्र हैं जिनको इसका लाभ मिलेगा और अब इस कार्य को शुरू करवाने की अनुमती दे दी गई है जिसका बजट 3 करोड़ 65 लाख के लगभग है जिसके लिए आरा के DM को बहुत बहुत धन्यवाद ,

आप सभी लोगो से मैं एक और बात बताना चाहता हूं की अब कुछ दिनों में मैं इनलोगो से क्रांतिकारी युद्ध करने का समय देने वाला था तो उसके लिए मुझे नए हथियार की जरुरत थी तो मैंने अपने छोटे भाई को ये व्यवस्था करने के लिए दिया था तो क्या पता ये कैसे कैसे छपरीयों से बात किया और उसी में वो सब उस पिस्टल का पैसा भी ले लिया और हथियार भी नहीं दिया जिसमें कुछ बात बिगड़ा और गजराजगंज थाना नें पिस्टल बेचने वाले को पिस्टल के साथ गिरफ्तार कर लिया गया वो लोग लगभग 3 से 4 थें और उनसभी का घर कारिसाथ था और उनसभी पर FIR हो गया तो उसी में मैं कल गजराज गंज थाना में व्यस्त हो गया था

(मृतक भरत तिवारी द्वारा 24 मई 2026 को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया)

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संध्या शर्मा मिश्रा की कविताएं

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दालचीनी या मेथी
दालचीनी मैं क्यूं इतराऊं,
बात मसाले जाने हैं
छोड़ूं स्वाद निराला अपना
हर व्यंजन ये माने है।
खट्टा मीठा या तीखा हो,
सब में घुलमिल जाती हूं
खीर में जो डल जाऊं तो
फिर दुगुना स्वाद बढ़ाती हूं।
चाय में घुलकर एक अपनी,
अद्भुत खुशबू फैलाती हूं।
काढ़े में मिल जाऊँ तो
रोगों को दूर भागती हूं।
सुनकर लंबी लिस्ट सखी की,
मेथी चुप न रह पाई
लेकर लंबी लिस्ट सामने
वो भी जल्दी ही आई।
कढ़ी बड़ी मुझ बिन ना बनती
सबको खूब सुहाती हूं,
पिज़्ज़ा पर डल जाऊं तो फिर
दुगुना स्वाद बढ़ाती हूँ।
लड्डू में पिसकर मिलजाती,
घुटनों का दर्द भगाती हूँ
बालों की सुंदरता में मैं
चार चांद लगाती हूं।
श्रेष्ठ मैं ही तुम नहीं सखी
यह सच्ची बात बताती हूं
मानो तुम या ना मानों,
मैं खुद पर गर्व जताती हूँ।
दालचीनी सुन बात निराली
मेथी पर गुर्राती है,
मैं मीठी तुम कड़वी,
क्यूं बात समझ ना आती है?
मैं ही श्रेष्ठ मसालों में,
संग चीनी मेरे आती है
तुम जब भी मुंह में आती
कड़वाहट अपने संग लाती।
तुम जब भी मुंह में आती
कड़वाहट अपने संग लाती।
संध्या शर्मा मिश्रा 
 
पिता
मां की बात तो सब करते हैं,
चलो, आज पिता पर कुछ लिखते हैं,
प और पिता का गहरा नाता है,
प सोचते ही अंतर्मन में,
पिता ही तो आता है,
पिता से ही परिवार चलता है,
और पिता से ही तो नाम मिलता है
परिवार का आधार है पिता
सबका पालनहार है पिता
ईश्वर का सबसे खूबसूरत
उपहार है पिता,
घर की बगिया का माली है पिता,
हर त्यौहार की खुशहाली है पिता,
बच्चों का पहला गुरु है पिता,
परिवार का गुरूर है पिता
परीक्षा कोई भी हो, विषय कोई भी हो
सभी का मास्टर है पिता,
बच्चों की कच्ची उम्र का
प्लास्टर है पिता
हर समस्या का समाधान है पिता
हर दुख का निदान है पिता
हर घर की शान है पिता
सारे तीरथ और चारों धाम है पिता
हर ग़म को पीता है पिता
तब भी सबके बीच खुशी से
जीता है पिता
तब भी सबके बीच खुशी से
जीता है पिता…
संध्या शर्मा मिश्रा
ग्रेटर नोएडा।

मुंबई-पोरबंदर और पोरबंदर-अहमदाबाद के बीच नई उड़ान सेवा 27 जून से शुरू, एलायंस एयर ने बढ़ाया नेटवर्क

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नीतिका पाठक

दिल्ली – क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए एलायंस एयर ने गुजरात में अपने नेटवर्क के विस्तार की घोषणा की है। एयरलाइन 27 जून 2026 से मुंबई-पोरबंदर-मुंबई तथा पोरबंदर-अहमदाबाद-पोरबंदर मार्ग पर नई उड़ान सेवाएं शुरू करने जा रही है।

एलायंस एयर के अनुसार, यह सेवा एटीआर-72-600 विमान से संचालित की जाएगी। नई उड़ानें टियर-2 और टियर-3 शहरों को प्रमुख हवाई केंद्रों से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की जा रही हैं, जिससे यात्रियों को बेहतर और तेज हवाई संपर्क उपलब्ध होगा।

उड़ान समय-सारिणी

मुंबई से पोरबंदर: प्रस्थान 07:05 बजे, आगमन 08:40 बजे

पोरबंदर से केशोद: प्रस्थान 09:30 बजे, आगमन 10:00 बजे

केशोद से अहमदाबाद: प्रस्थान 10:25 बजे, आगमन 11:20 बजे

अहमदाबाद से केशोद: प्रस्थान 11:50 बजे, आगमन 12:45 बजे

केशोद से पोरबंदर: प्रस्थान 13:10 बजे, आगमन 13:40 बजे

पोरबंदर से मुंबई: प्रस्थान 14:05 बजे, आगमन 15:35 बजे

एलायंस एयर ने कहा कि नई उड़ान सेवा सौराष्ट्र क्षेत्र की लंबे समय से महसूस की जा रही हवाई संपर्क की आवश्यकता को पूरा करेगी। महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। यहां स्थित कीर्ति मंदिर, सुदामा मंदिर, पोरबंदर बीच और पक्षी अभयारण्य पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं।

एयरलाइन के मुताबिक, बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही द्वारका, सोमनाथ, राजकोट, जामनगर और गिर राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्रमुख स्थलों तक यात्रियों की पहुंच भी आसान होगी।

एलायंस एयर ने यात्रियों से अपनी विभिन्न प्रचार योजनाओं और ऑफर्स की जानकारी के लिए एयरलाइन की वेबसाइट या अधिकृत ट्रैवल पार्टनर्स से संपर्क करने की अपील की है।

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