‘शत शत अटल’: अटल बिहारी वाजपेयी के बहुआयामी व्यक्तित्व का संवेदनशील चित्रण

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मुम्बई। फिल्म निर्माता अतुल गंगवार और निर्देशक अतुल पांडेय की डॉक्यूमेंट्री ‘शत शत अटल’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो प्रसार भारती वेव्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। यह वृत्तचित्र न केवल अटल जी की राजनीतिक यात्रा को उजागर करता है, बल्कि उनके व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को सामने लाता है जो उन्हें एक संवेदनशील कवि, कुशल राजनेता और सर्वसमावेशी नेता बनाते हैं। फिल्म की पटकथा अत्यंत बारिकी से बुनी गई है, जिसमें अटल जी के जीवन से जुड़े विभिन्न पात्रों को सलीके से शामिल किया गया है। ये पात्र वे लोग हैं जो उनके निकट रहे – सहयोगी, मित्र और समकालीन – जिनके माध्यम से उनके जीवन की गहराई उभरकर सामने आती है।

डॉक्यूमेंट्री का सबसे मजबूत पक्ष है अटल जी के कवि हृदय का चित्रण। फिल्म स्पष्ट करती है कि उनके भीतर का संवेदनशील कवि ही वह तत्व था जो पक्ष-विपक्ष के साथ संवाद की बड़ी भूमिका निभाता था। यह कवि सभी को जोड़कर चलने का हिमायती था, जिसने उन्हें गठबंधन सरकार चलाने की अभूतपूर्व क्षमता प्रदान की। अटल जी न केवल जोड़ना जानते थे, बल्कि अपनी शर्तों पर जोड़कर रखना भी। यही गुण उन्हें भारतीय राजनीति में एक अनोखा स्थान दिलाता है। फिल्म में यह भी खुलासा होता है कि उनकी अधिकांश कविताएं रेल यात्राओं के दौरान लिखी गईं, जो उनके सादगीपूर्ण और चिंतनशील स्वभाव को दर्शाती हैं।

अतुल गंगवार और उनकी टीम का शोध एवं दस्तावेजीकरण सराहनीय है। पुराने फुटेज, साक्षात्कार और ऐतिहासिक सामग्री का उपयोग इतनी कुशलता से किया गया है कि दर्शक अटल जी के जीवन की यात्रा में पूरी तरह डूब जाता है। यह वृत्तचित्र बताता है कि एक अटल बिहारी में कई अटल बिहारी समाए थे – राजनेता, कवि, वक्ता और दूरदर्शी नेता। उनके जीवन के अनछुए पहलू, जैसे रेल यात्राओं में कविता रचना और संवाद की कला, दर्शकों को गहराई से प्रभावित करते हैं।

हालांकि, कुछ कमियां भी हैं। फिल्म में अटल जी की गोद ली हुई बेटी नमिता भट्टाचार्य और उनके दामाद रंजन भट्टाचार्य का कोई उल्लेख नहीं मिलता, जो उनके निजी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थे। इसके अलावा, कई पात्रों के नामों या परिचय की कमी से दर्शकों को उनके वक्तव्यों से जुड़ने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है। फिर भी, ये कमियां फिल्म की समग्र गुणवत्ता को कम नहीं करतीं।

कुल मिलाकर, ‘शत शत अटल’ अटल बिहारी वाजपेयी पर एक जरूरी डॉक्यूमेंट्री है जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को जीवंत करती है। यह न केवल इतिहास के छात्रों और राजनीति प्रेमियों के लिए, बल्कि आम दर्शकों के लिए भी देखने लायक है। प्रसार भारती वेव्स पर उपलब्ध यह फिल्म अटल जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करती है।

फ़िल्म यहाँ देख सकते हैं : www.wavespb.com/links/SH17486Ubq

कुशल भारतीय युवाओं के लिए अन्य देशों में भी उपलब्ध हो रहे हैं रोजगार के अवसर

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ग्वालियर : हाल ही के समय में भारतीय युवाओं ने भारतीय संस्कृति के नियमों का अनुपालन करने की ओर अपने पग बढ़ा दिए हैं। “वसुधैव कुटुम्बकम” के भाव को आत्मसात करते हुए अन्य कई देशों में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से एवं अपनी उच्च शिक्षा समाप्त करने के पश्चात आज भारतीय युवा रोजगार प्राप्त करते हुए इन देशों में आसानी से रच बस रहे हैं। आज कई विकसित देशों में तकनीकी, स्वास्थ्य एवं रीसर्च जैसे क्षेत्रों में भारतीय मूल के नागरिकों का दबदबा बन गया है। इन देशों की अर्थव्यवस्था को गति देने में भारतीय मूल के नागरिकों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कई अन्य देशों में रचे बसे भारतीयों ने अपनी हिंदू सनातन संस्कृति का पालन करते हुए अपनी छाप छोड़ी है। इसके चलते ही आज कई देश – रूस, जापान, इजराईल, वियतनाम, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, फ्रान्स एवं अन्य कई देश – भारतीय युवाओं की खुले रूप से मांग करने लगे हैं। विशेष रूप से विकसित देशों में आज श्रमबल की भारी कमी महसूस की जा रही है क्योंकि इन देशों में बुजुर्गों की संख्या बहुत तेज गति से बढ़ रही है और इन देशों में युवाओं द्वारा बच्चे पैदा नहीं करने अथवा कम बच्चे पैदा करने के चलते युवाओं की बहुत कमी हो गई है। इसीलिए भी विश्व के कई देश आज भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को शीघ्रता के साथ अंतिम रूप देना चाहते हैं ताकि वे भारत से श्रमबल को अपने देशों में विशेष सुविधाएं देकर आकर्षित कर सकें।

इस समय रूस लगभग 20 लाख कामगारों की कमी से जूझ रहा है। 4 एवं 5 दिसम्बर 2025 को रूस के राष्ट्रपति श्री व्लादिमीर पुतिन, 23वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने हेतु, भारत में आए थे। रूस के राष्ट्रपति की भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय चर्चा में अन्य मुद्दों के साथ साथ भारतीय युवाओं के लिए रूस द्वारा अपने दरवाजे खोलने पर भी गम्भीर चर्चा हुई थी। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2017 में प्रारम्भ हुए यूरेशियाई आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ाते हुए उक्त 23वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भारत एवं रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रूस में भारत द्वारा निर्यात की जाने वाली 90 प्रतिशत वस्तुओं पर वर्ष 2028 तक शून्य टैरिफ सम्बंधी शर्तों को अंतिम रूप दिया गया। इससे भारतीय फार्मा और वस्त्र उद्योग के लिए तीन करोड़ उपभोक्ताओं का बाजार खुल जाएगा, जिससे प्रति वर्ष लगभग 1500 से 2000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। यूरेशियाई आर्थिक संघ में रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान, आर्मेनिया और किर्गिस्तान शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत भारत वर्ष 2030 तक सूचना प्रौद्योगिकी, निर्माण और नर्सिंग के क्षेत्रों में रूस को लगभग 5 लाख भारतीय श्रमबल उपलब्ध कराएगा। इससे भारत को अपने रोजगार सृजन के लक्ष्य को पूरा करने और अपनी जनसांख्यिकी बढ़त का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा। रूस के उद्योगपतियों एवं उद्यमियों के संघ के उपाध्यक्ष ने तो बताया है कि रूस को 50 लाख कुशल श्रमिकों की आवश्यकता है और भारत रूस की इस कमी को पूरा करने में अपनी अहम भूमिका निभा सकता है।

आज इजराईल भी, विशेष रूप से हम्मास के साथ हुए संघर्ष के बाद से, निर्माण के क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है और भारत की ओर बहुत आशाभारी नजरों से देख रहा है। इजराईल ने भारत से एक लाख श्रमिकों को उपलब्ध कराने हेतु आग्रह किया है। इजराईल ने भारत के साथ इस सम्बंध में एक द्विपक्षीय रूपरेखा करार भी किया है। भारतीय संसद में उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, इस करार के अंतर्गत, 1 जुलाई 2025 तक 6,774 भारतीय कामगारों को इजराईल भेजा जा चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इजराईल भेजे जाने वाले श्रमिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है ताकि उत्तर प्रदेश से अधिकतम युवाओं को इजराईल भेजकर उन्हें वहां पर आसानी से रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं जापान के प्रधानमंत्री श्री शिगेरू इशिबा के बीच 29-30 अगस्त, 2025 को जापान में हुई बैठक में भारत और जापान के बीच रणनीतिक सहयोग की दिशा में एक दूरदर्शी मार्ग प्रशस्त किया है और दोनों देशों के बीच अगले दशक के लिए एक व्यापक संयुक्त विजन की नींव रखी गई है। जापान ने आगामी दस वर्षों में भारत में अपने निवेश को 2024 के स्तर, लगभग 4,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर, से बढ़ाकर, 6,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर (10 लाख करोड़ जापानी येन) करने की प्रतिबद्धत्ता दिखाई है। पूंजी के प्रवाह के साथ ही, जापान एवं भारत ने एक “पीपल टू पीपल” आदान प्रदान कार्यक्रम को भी आगे बढ़ाने की बात कही है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य है कि जापान की प्रौढ़ हो रही आबादी के चलते वहां के संरचनात्मक श्रमबल के क्षेत्र में कमी को कम करने और भारत के डेमोग्राफिक डिवीडेंड का लाभ उठाने के लिए आने वाले 5 वर्षों में जापान में 5 लाख भारतीय छात्रों और श्रमिकों को भेजने के लक्ष्य को लेकर दोनों देश काम करेंगे। जापान, भारतीय नर्सों के लिए भी अवसर गढ़ने का प्रयास कर रहा है क्योंकि वहां चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सकों एवं नर्सों की भारी कमी है, जबकि जापान में बुजुर्गों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।

इन्वेस्टमेंट बैंकर श्री सार्थक आहूजा की एक रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी, जापान, फिनलैंड एवं ताईवान भारतीय श्रमिकों की सक्रिय रूप से तलाश कर रहे हैं। जर्मनी में स्वास्थ्य सेवा, आईटी, इंजीनीयरिंग और निर्माण जैसे क्षेत्रों में पेशेवर श्रमिकों की भारी कमी है। जर्मनी प्रतिवर्ष लगभग 90,000 भारतीय कुशल श्रमिकों को वीजा जारी करने की योजना बना रहा है। जर्मनी में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 7 लाख से अधिक नौकरियां उपलब्ध हैं। फिनलैंड भारतीयों को आकर्षित करने के उद्देश्य से उन्हें स्थायी निवास प्रदान करने की पेशकश कर रहा है। ताईवान विनिर्माण के क्षेत्र में भारतीय श्रमिकों की तलाश में है।

भारतीय संसद में उपलब्ध कराई गई एक जानकारी के अनुसार पिछले 5 वर्षों के दौरान (जनवरी 2020 से 30 जून 2025 तक) कुल 16,06,964 भारतीय श्रमिकों को विभिन्न देशों में रोजगार के लिए मंजूरी प्रदान की गई है। भारत सरकार ने भारतीय श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए विभिन्न देशों से इस संबंध में विभिन्न प्रकार के समझौते भी सम्पन्न किये हैं। आस्ट्रिया, औस्ट्रेलिया, फ्रान्स, जर्मनी, इटली, डेनमार्क और यूनाइटेड किंगडम के साथ प्रवासन और आवाजाही भागीदारी समझौता सम्पन्न किया गया है। जापान, पुर्तगाल, ताईवान, मारीशस, मलेशिया और इजराईल के साथ श्रम आवाजाही समझौता सम्पन्न किया गया है। बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, साऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात और जॉर्डन जैसे खाड़ी सहयोग देशों (जी सी सी) के साथ श्रम और जन शक्ति सहयोग समझौता सम्पन्न किया गया है जो श्रम और जनशक्ति मुद्दों पर सहयोग के लिए व्यापक रूपरेखा प्रदान करते हैं। साऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात और कुवैत के साथ अलग अलग समझौता ज्ञापन (एम ओ यू) और समझौता घरेलू श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपायों की रूपरेखा तैयार करता हैं। इन समझौता ज्ञापनों और करारों में एक संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से कार्यान्वयन का प्रावधान है, जहां सम्बंधित देशों के साथ संयुक्त कार्य समूहों की नियमित बैठकों के दौरान श्रमिकों के कल्याण और सुरक्षा से सम्बंधित मामलों पर विचार किया जाता है।

विकसित देशों यथा यूरोपीय महाद्वीप के कई देश – यूनान, इटली, ब्रिटेन, फ्रांन्स आदि एवं इजराईल में भारतीय श्रमिकों की मांग बढ़ रही है। भारत ने श्रमिक उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2023 तक 17 देशों के साथ समझौते सम्पन्न किए हैं। विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या वर्ष 1990 में 66 लाख से बढ़कर वर्ष 2024 में 185 लाख हो गई है, जो तीन गुना वृद्धि है। इसी अवधि में वैश्विक प्रवासियों में भारतीयों की हिस्सेदारी 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 6 प्रतिशत से अधिक हो गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय विश्व के कुल प्रवासी भारतीयों का लगभग आधा हिस्सा है। यूरोप, जापान, रोमानिया, फिनलैंड, रूस, जर्मनी, साऊदी अरब और पश्चिम एशिया में भारतीय श्रमिकों की मांग को पूरा करने के लिए नेशनल स्किल डेवलपमेंट कारपोरेशन (NSDC) भारतीय युवाओं को प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहा है। NSDC अभी तक लगभग 60,000 भारतीय युवाओं को जापान, जर्मनी, इजराईल, ब्रिटेन, बहरीन एवं साऊदी अरब जैसे देशों में रोजगार दिला चुका है। विश्व के कई देशों में कुशल श्रमिकों के रूप में भारतीय युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसीलिए केंद्र सरकार द्वारा कौशल विकास योजना चलाई जा रही है जिसका उद्देश्य देश में कुशल श्रमिकों की मांग को पूरा करना है तथा भारत को ग्लोबल मैनपावर सप्लायर के रूप में स्थापित करना भी लक्ष्य है। यह रणनीति भारत के युवा आबादी को देखते हुए विशेष तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है। यूरोप, जापान और अन्य देशों में आबादी बूढ़ी हो रही है, ऐसे समय में यह भारत के पास एक बड़ा अवसर है। केंद्र सरकार की यह कोशिश है कि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सके। इसके लिए कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है एवं अन्य देशों में भी भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तलाशे जा रहे हैं।

गौनाहा थाना: भ्रष्टाचार का अड्डा या न्याय का गढ़? मुजम्मिल शेख को संरक्षण और पीएमओ तक गुमराह करने के गंभीर आरोप

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मामले का एक आरोपी खुद को ‘इंडिया टुडे’ का पत्रकार बताता है

बेतिया। बिहार के नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील गौनाहा थाने पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट आचार्य नितिन कुमार रवि ने जमीन कब्जा, फसल लूट और पुलिस की मिलीभगत के मामले में मुजम्मिल शेख व उसके साथियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। पूर्व थानाध्यक्ष राजीव नंदन सिन्हा के कार्यकाल में थाने को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया जा रहा है, जबकि हाल ही में रक्सौल थानाध्यक्ष रहते हुए सिन्हा को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया है। अब मांग उठ रही है कि सिन्हा के समय लिए गए निर्णयों की पुन: जांच हो, क्योंकि थाने की रिपोर्ट से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भी गुमराह किया गया।

पूर्व थानाध्यक्ष राजीव नंदन सिन्हा का निलंबन: भ्रष्टाचार का खुलासा

मई 2025 में चंपारण रेंज के डीआईजी हरिकिशोर राय ने रक्सौल थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राजीव नंदन सिन्हा को निलंबित कर दिया। आरोप था कि सिन्हा ने स्थानीय व्यवसायी टुन्ना प्रसाद से लाखों रुपये का सामान उधार लिया, लेकिन भुगतान नहीं किया। जब व्यवसायी ने पैसे मांगे तो उसे झूठे अपहरण मामले में फंसा दिया। व्यवसायी की शिकायत पर डीआईजी ने खुद जांच की और आरोप सही पाए जाने पर सिन्हा को तत्काल निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की।

Caption: Rajeev Nandan

यह निलंबन सिन्हा के गौनाहा थानाध्यक्ष रहते हुए के कार्यकाल पर भी सवाल उठाता है। नितिन कुमार रवि का कहना है कि सिन्हा के समय थाना पूरी तरह भ्रष्टाचार का केंद्र था। गौनाहा में कई शिकायतें की गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब जब सिन्हा का भ्रष्ट चरित्र उजागर हो चुका है, तो उनके कार्यकाल के पुराने मामलों, खासकर मुजम्मिल शेख से जुड़े जमीन विवाद की पुन: जांच जरूरी है।

जमीन कब्जा का मामला: कोविड काल से शुरू हुआ विवाद

विवाद की जड़ अप्रैल 2021 में है, जब नितिन कुमार रवि का पूरा परिवार कोविड-19 से संक्रमित था और घर माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित कर सील कर दिया गया था। इसी दौरान मुजम्मिल शेख (पिता सलीम शेख, गांव गम्हरिया, गौनाहा) ने सद्दाम शेख, सज्जाद शेख, चाचा-चचेरे भाई और अन्य असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर जमीन की देखभाल करने वाले रामशरण महतो और अनिल काजी पर हमला किया। उन्हें मारपीट कर जमीन छोड़ने की धमकी दी गई।

परिवार ने व्हाट्सएप से तत्कालीन डीएम कुंदन कुमार को सूचना दी। कोविड नियंत्रित होने के बाद जमीन पर “यह जमीन बिक्री की नहीं है, मालिकाना हक बामदेव झा के पास” लिखा बोर्ड लगाया गया। प्रभात कुमार झा ने अंचल अधिकारी गौनाहा को पैमाइश के लिए आवेदन दिया, जिसमें खाता 02, खेसरा 389, थाना 28, रखवा तीन बीघा की जमीन का जिक्र था। यह जमीन पंडित उमाकांत झा और बामदेव झा के नाम संयुक्त रूप से दर्ज है। लगान रसीद, पट्टा, दस्तावेज संलग्न किए गए। आवेदन एसपी बेतिया, डीएसपी नरकटियागंज, अंचल अधिकारी और एडीएम नरकटियागंज को भी दिए गए।

30 जून 2021 को प्रशांत झा ने गौनाहा थाने में जबरन कब्जा और धमकी की शिकायत दी, लेकिन थाने ने रिसीविंग नहीं दी। थाने में आवेदन लेने की प्रथा ही नहीं है, जैसा नितिन ने आरोप लगाया।

थाने की लापरवाही: फसल लूट से सीसीटीवी फुटेज तक छिपाई

सितंबर 2021 में जनता दरबार में अंचल अधिकारी अमित कुमार ने मूल दस्तावेज मंगाए। 4 सितंबर को 18 दस्तावेज जमा किए गए, जिसमें 1978 की पुरानी शिकायत की कॉपी भी शामिल थी। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं।

15 अक्टूबर 2021 को मुजम्मिल के लोगों ने फसल लूट ली। वीडियो सहित शिकायत दी गई, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबिततत्कालीन थानाध्यक्ष राजीव नंदन सिन्हा ने इसे जनता दरबार का मामला बता दिया। 16 अक्टूबर को जनता दरबार में मुजम्मिल थानाध्यक्ष के चैंबर में आया और बहस में कबूल किया कि नकली पट्टा बनवाने की कोशिश कर रहा है। यह पूरा प्रसंग सीसीटीवी में कैद हुआ (11 बजे से 3 बजे तक), जिसमें मुजम्मिल ने फसल लौटाने और माफी मांगने की बात की। आरटीआई से फुटेज मांगी गई, लेकिनथानाध्यक्ष द्वारा नहीं दी गई।

Caption: Mujammil Shekh

फिर मामूली चोरी का एफआईआर दर्ज हुआ, लेकिन नाम बदलकर नितिन कुमार रवि को निश्चित कुमार सिंह और पिता को जयशंकर सिंह कर दिया गया। कोर्ट से कागज निकलवाने पर यह साबित हुआ। आरटीआई का जवाब नहीं दिया गया।

विरोधाभासी रिपोर्टें: पीएमओ को गुमराह करने का आरोप

जनता दरबार 2021 से 2024 तक चला। मुजम्मिल बटाईदार होने का कोई प्रमाण नहीं ला सका। एक पत्र में सूर्यकांत झा को मालिक बताया गया, दूसरे में दावा करने वाला। अंचल अधिकारी अमित कुमार ने 2022 में पत्र जारी कर मुजम्मिल को जोताबाद बताया, लेकिन आरटीआई से पता चला कि जांच में कोई नाम नहीं दिया गया था।

थाने ने बिना जांच के मुजम्मिल के पक्ष में रिपोर्ट बनाकर पीएमओ को भेजी। नितिन का आरोप है कि थाना आरोपी को बचाने के लिए अलग-अलग पत्रों में गलतियां सुधार रहा है। पेड़ काटे गए, फसलें लूटी गईं, लेकिन कोई एफआईआर नहीं। पैमाइश के आवेदन पर फीस जमा होने के बावजूद कोई तिथि नहीं तय हुई।

नितिन ने बिहार डीजीपी को पत्र लिखकर मुजम्मिल, सलीम, सद्दाम और सज्जाद पर एफआईआर की मांग की। पूर्व एसआई विवेक कुमार बालेंदू (अब थानाध्यक्ष) ने मीडिया से बातचीत में मामले की जानकारी न होने की बात कही, जबकि पहले रिपोर्ट लिख चुके थे। मामले से जुड़ा एक आरोपी खुद को ‘इंडिया टुडे’ का दिल्ली में कथित पत्रकार बताता है।

मुजम्मिल का प्रभाव: कनेक्शन और धमकियां

मुजम्मिल नारायणी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का पेटी कांट्रेक्टर है। वह कंपनी मालिक के आईएएस दामाद का नाम लेकर थाना-अंचल पर दबाव बनाता है। स्थानीय नेताओं के नाम से दलाली और असामाजिक तत्वों से मिलकर जमीन कब्जा करने का आरोप है। धमकी दी गई कि परिवार फसल काटने आए तो महिलाओं से कटवाकर झूठा केस में फंसाया जाएगा।

संवेदनशील क्षेत्र में न्याय की पुकार

गौनाहा नेपाल बॉर्डर पर जनजाति बहुल संवेदनशील क्षेत्र है। यहां भ्रष्ट अधिकारी गरीबों के न्याय में बाधा बन रहे हैं। नितिन ने कहा कि कोरोना से ज्यादा पीड़ा थाने-अंचल से मिली। सैकड़ों आवेदन-आरटीआई दिए, लेकिन न्याय नहीं। नए थानाध्यक्ष और अंचल अधिकारी से पुन: जांच की मांग है।

यह मामला सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता का सवाल है। यदि पीएमओ को भी गुमराह किया जा रहा है, तो चिंता गंभीर है। विभागीय स्तर पर उच्च जांच की जरूरत है ताकि सच सामने आए और दोषियों को सजा मिले।

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धुरंधर :कराची से दिल्ली तक, नकली नोटों का साम्राज्य कैसे ध्वस्त हुआ!

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हाल ही में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म धुरंधर ने एक बार फिर उस छिपी हुई आर्थिक जंग को सुर्खियों में ला दिया है, जो वर्षों से भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही है। फिल्म में अंकित सागर द्वारा निभाया गया किरदार जावेद खनानी पाकिस्तान के उस कुख्यात हवाला सरगना पर आधारित है, जिसने दाऊद इब्राहिम, लश्कर-ए-तैयबा और ISI के लिए अरबों रुपये की नकली भारतीय मुद्रा भारत में पहुंचाई। फिल्म में यह कहानी आधी-अधूरी दिखाई गई है, लेकिन असल जीवन में इसका अंत और भी नाटकीय और प्रभावशाली था – भारत की 2016 की नोटबंदी ने इस पूरे नेटवर्क को रातोंरात कचरे के ढेर में बदल दिया।

जावेद खनानी और उसके जुड़वां भाई अल्ताफ खनानी ने 1980 के दशक में कराची में Khanani & Kalia International (KKI) की स्थापना की। शुरुआत में यह एक सामान्य मुद्रा विनिमय कंपनी थी, लेकिन जल्द ही यह वैश्विक हवाला नेटवर्क का केंद्र बन गई। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 2015 में इसे “ट्रांसनेशनल क्रिमिनल ऑर्गेनाइजेशन” घोषित किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, KKI ने मेक्सिकन ड्रग कार्टेल्स, अफगान हेरोइन तस्करों, अल-कायदा, हिजबुल्लाह और दाऊद इब्राहिम के D-कंपनी के लिए अरबों डॉलर लॉन्डर किए। सबसे खतरनाक हिस्सा था नकली भारतीय नोटों (FICN) का उत्पादन और सप्लाई।

भारतीय खुफिया एजेंसियों और अमेरिकी रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की सरकारी प्रिंटिंग प्रेसें – जैसे क्वेटा और कराची की सिक्योरिटी प्रेस – ISI के इशारे पर उच्च गुणवत्ता वाली नकली भारतीय मुद्रा छापती थीं। ये नोट नेपाल, बांग्लादेश और खाड़ी देशों के रास्ते भारत में घुसाए जाते थे। इसका मकसद दोहरा था: भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग। 2010-2015 के बीच भारत में सर्कुलेशन में FICN की अनुमानित वैल्यू हजारों करोड़ रुपये थी। जावेद खनानी इस नेटवर्क का मुख्य ऑपरेटर था, जो दाऊद के लिए नकली नोट भारत पहुंचाता और हवाला से पैसे ट्रांसफर करता।

8 नवंबर 2016 की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित किया, तो यह सिर्फ काले धन पर वार नहीं था – यह पाकिस्तान प्रायोजित आर्थिक युद्ध पर सीधा हमला था। नोटबंदी के तुरंत बाद पाकिस्तान में छपी नकली मुद्रा बेकार हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ISI के पास भारत में सर्कुलेट हो रही मुद्रा से 150% ज्यादा नकली नोटों का स्टॉक था, जो रातोंरात कागज के टुकड़े बन गया। अनुमान है कि जावेद खनानी ने दाऊद के नेटवर्क के जरिए पहले ही 40,000 करोड़ रुपये की नकली मुद्रा भारत में डाल दी थी, और उसके पास 20,000 करोड़ की अतिरिक्त स्टॉक थी। यह सब व्यर्थ हो गया।

नोटबंदी का असर तत्काल दिखा। कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं 60% कम हो गईं, क्योंकि आतंकी संगठनों के पास पैसे खत्म हो गए। हवाला ऑपरेटर्स की कॉल ट्रैफिक 50% गिरी। पाकिस्तान में दो मुख्य FICN प्रेसें बंद हो गईं। अमेरिकी और भारतीय रिपोर्ट्स में इसे “आर्थिक काउंटरस्ट्राइक” कहा गया।

इस झटके से जावेद खनानी टूट गया। उसके भाई अल्ताफ को 2015 में अमेरिका ने गिरफ्तार किया और 68 महीने की सजा दी। जावेद पर दाऊद और अन्य क्लाइंट्स का दबाव बढ़ गया। 4 दिसंबर 2016 को कराची के एक अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग (साइना टावर या इसी तरह की इमारत) से वह गिरा। पाकिस्तानी पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया – कराची के एडिशनल IG मुश्ताक महेर ने कहा कि वह बिजली के तारों में फंसकर नीचे गिरा। परिवार ने एक्सीडेंट बताया, लेकिन समय की संयोगता ने कई सवाल उठाए। कुछ रिपोर्ट्स में इसे ‘लिक्विडेशन’ कहा गया – नेटवर्क के रहस्यों को दफन करने का तरीका।

भारत में भी इस नेटवर्क की गूंज सुनाई दी। नोटबंदी के दौरान मुंबई के एक परिवार – अब्दुल रज्जाक मोहम्मद सईद और उनके परिजनों – ने 2 लाख करोड़ रुपये की अघोषित आय दिखाई। यह राशि पूरे इनकम डिस्क्लोजर स्कीम की कुल घोषणा से तीन गुना थी। आयकर विभाग ने इसे संदिग्ध मानकर अस्वीकार कर दिया और जब्त कर लिया। जांच में पता चला कि परिवार का पता फर्जी था और PAN अजमेर से मुंबई ट्रांसफर हुए थे। कुछ अनौपचारिक रिपोर्ट्स में इसे दाऊद के नेटवर्क से जोड़ा गया, जहां खनानी जैसे ऑपरेटर्स काले धन को वैध दिखाने की कोशिश कर रहे थे। जांच जारी है, लेकिन यह मामला नोटबंदी के उस बड़े प्रभाव को दिखाता है जो काले धन और नकली मुद्रा के सिंडिकेट पर पड़ा।

पाकिस्तानी एजेंसियां जावेद की मौत की जांच से बचती रहीं, क्योंकि पूरा खुलासा होने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की और बदनामी होती। FATF की ग्रे लिस्ट में पहले से फंसा पाकिस्तान इस आर्थिक युद्ध के सबूतों से बचना चाहता था।

नोटबंदी के नौ साल बाद भी इसके प्रभाव बाकी हैं। नए नोटों की सिक्योरिटी फीचर्स इतनी उन्नत हैं कि पाकिस्तान अब उच्च गुणवत्ता वाली नकली मुद्रा नहीं छाप पाता। आतंकी फंडिंग सूखी, हवाला कमजोर हुआ। फिल्म धुरंधर में जावेद खनानी को कॉमिक विलेन दिखाया गया, लेकिन असलियत में वह एक छिपा हुआ बैंक था – ISI का शैडो बैंकर।

प्रधानंत्री मोदी ने तब कहा था, “थोड़ा धैर्य रखें… 30 दिसंबर दूर नहीं… केंचुए मरे हैं, अब बड़े अजगरों का नंबर है।” आज देखें तो नोटबंदी ने न सिर्फ काले धन पर चोट की, बल्कि सीमा पार के दुश्मनों की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी। यह कहानी बताती है कि कभी-कभी सबसे बड़ा युद्ध बैंक / नोटों से लड़ना पड़ता है।

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